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साक्ष्य के अभाव में मौलाना अनवारुल हक बरी
Updated Fri, 14 Jul 2017 01:07 AM IST
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साक्ष्य के अभाव में मौलाना अनवारुल हक दुष्कर्म के आरोप से बरी
बिजनौर।
एडीजे मुमताज अली ने दुष्कर्म के आरोपी बिजनौर के चाहशीरी स्थित जामा मस्जिद के पूर्व इमाम मौलाना अनवारुल हक व उसके साथी खुर्रम को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट में गवाह अपने पहले के बयान से मुकर गए। कोर्ट ने कथित पीड़ित महिला और उसके पति सहित चार गवाहों पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश भी दिए हैं।
गत वर्ष मुजफ्फरनगर के एक व्यक्ति ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि मौलाना अनवारुल हक ने उसकी पत्नी से बलात्कार किया है। उसका कहना था कि तबीयत खराब होने पर वह पत्नी को दुआ के लिए मौलाना अनवारुल हक के पास लेकर गया था। मौलाना उसकी पत्नी को लेकर कलियर शरीफ गया। वहां दो कमरे किराए पर लिए थे। वहां अनवारुल हक ने उसकी पत्नी से दुष्कर्म किया और बाद में उसे ब्लैकमेल करता रहा। 19 अगस्त 2016 को रात 11 बजे वह अपने घर पहुंचा तो अनवारुल हक उसकी पत्नी के साथ था।
रिपोर्ट में आरोप था कि दुष्कर्म में खुर्रम ने अनवारुल हक का सहयोग किया। शोर मचाने पर वहां भीड़ एकत्र हो गई। इसका वीडियो बनाया गया था। यह मामला तूल पकड़ गया था। अनवारुल हक ने दूसरे पक्ष के खिलाफ लूट व मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मौलाना ने एसपी व पुलिस को धमकाते हुए एक वीडियो भी जारी किया था। प्रशासन को धमकाने व एक गवाह से मारपीट के मामले में भी उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके बाद मौलाना फरार हो गया। पुलिस ने फरार घोषित करते हुए उसके घर की कुर्की की थी। बाद में अनवारुल हक कोर्ट में पेश हो गया था। कुछ दिन पहले सुरक्षा की दृष्टि से अनवारुल हक को फतेहगढ़ जेल भेजा गया था। कोर्ट में गवाही के दौरान कथित पीड़ित महिला, उसका पति व सभी प्रमुख गवाह पक्षद्रोही हो गए और बयान बदल दिए।
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कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में अनवारुल हक व उसके सहयोगी खुर्रम को बरी कर दिया। कोर्ट ने पीड़ित महिला और उसके पति सहित चार के खिलाफ धारा 344 सीआरपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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बिजनौर।
एडीजे मुमताज अली ने दुष्कर्म के आरोपी बिजनौर के चाहशीरी स्थित जामा मस्जिद के पूर्व इमाम मौलाना अनवारुल हक व उसके साथी खुर्रम को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट में गवाह अपने पहले के बयान से मुकर गए। कोर्ट ने कथित पीड़ित महिला और उसके पति सहित चार गवाहों पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश भी दिए हैं।
गत वर्ष मुजफ्फरनगर के एक व्यक्ति ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि मौलाना अनवारुल हक ने उसकी पत्नी से बलात्कार किया है। उसका कहना था कि तबीयत खराब होने पर वह पत्नी को दुआ के लिए मौलाना अनवारुल हक के पास लेकर गया था। मौलाना उसकी पत्नी को लेकर कलियर शरीफ गया। वहां दो कमरे किराए पर लिए थे। वहां अनवारुल हक ने उसकी पत्नी से दुष्कर्म किया और बाद में उसे ब्लैकमेल करता रहा। 19 अगस्त 2016 को रात 11 बजे वह अपने घर पहुंचा तो अनवारुल हक उसकी पत्नी के साथ था।
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रिपोर्ट में आरोप था कि दुष्कर्म में खुर्रम ने अनवारुल हक का सहयोग किया। शोर मचाने पर वहां भीड़ एकत्र हो गई। इसका वीडियो बनाया गया था। यह मामला तूल पकड़ गया था। अनवारुल हक ने दूसरे पक्ष के खिलाफ लूट व मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मौलाना ने एसपी व पुलिस को धमकाते हुए एक वीडियो भी जारी किया था। प्रशासन को धमकाने व एक गवाह से मारपीट के मामले में भी उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके बाद मौलाना फरार हो गया। पुलिस ने फरार घोषित करते हुए उसके घर की कुर्की की थी। बाद में अनवारुल हक कोर्ट में पेश हो गया था। कुछ दिन पहले सुरक्षा की दृष्टि से अनवारुल हक को फतेहगढ़ जेल भेजा गया था। कोर्ट में गवाही के दौरान कथित पीड़ित महिला, उसका पति व सभी प्रमुख गवाह पक्षद्रोही हो गए और बयान बदल दिए।
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कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में अनवारुल हक व उसके सहयोगी खुर्रम को बरी कर दिया। कोर्ट ने पीड़ित महिला और उसके पति सहित चार के खिलाफ धारा 344 सीआरपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।