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चिंई विभाग की 3600 एकड़ भूमि पर भूमाफि ाओं का कब्जा
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:27 AM IST
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माफिया के कब्जे में है सिंचाई
विभाग की 3600 एकड़ भूमि
धामपुर। सिंचाई विभाग के पीली बांध जलाशय की करीब 3600 एकड़ भूमि पर माफिया ने कब्जा कर रखा है। जलाशय बनने के बाद ही माफिया ने इस जमीन को हथिया लिया था। पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद भी माफिया जमीन को नहीं छोड़ रहा है। जलाशय की भूमि पर कब्जे से यह पानी से नहीं भर पाता। माफिया ने आधे से ज्यादा जलाशय पर खेतीबाड़ी शुरू कर दी है।
चार दशक पहले नदियों के पानी को एकत्र कर सिंचाई के उपयोग में लाने के लिए अमानगढ़ वन रेंज से सटे इलाके में हजारों हेक्टेयर भूमि पर करोड़ों रुपये की लागत से पीली बांध जलाशय का निर्माण हुआ था। कुछ समय तो जलाशय में ठीकठाक पानी भरा जाता रहा, लेकिन बाद में खाली पड़ी भूमि को माफिया ने हथियाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे माफिया ने सिंचाई विभाग की 3600 एकड़ भूमि पर कब्जा जमा लिया। सूचना के बावजूद सिंचाई विभाग के अफसर चुप्पी साधे रहे।
इस जलाशय में बरसात का पानी भरने के बाद किसान नहरों से खेतों की सिंचाई करते थे। अब जलाशय के हालात ऐसे हैं कि दो दिन छोड़ने लायक भी पानी इसमें नहीं रहता। पानी सूखने से जलाशय में मछली पालन भी बंद हो गया है। जलाशय की भूमि का एक छोर उत्तराखंड से लगा हुआ है। भाकियू की शिकायत पर पुलिस प्रशासन ने भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए कई बार हाथ-पैर मारे, लेकिन माफिया के सामने उनकी एक न चली। करीब डेढ़ दशक पहले इस भूमि को चरागाह के लिए भी उपयोग किया जाता था, मगर माफिया की सक्रियता के बाद वह भी बंद हो गया है।
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सीएम के सामने उठाएंगे मुद्दा
भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष कैलाश सिंह का कहना है कि वह इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के दरबार में उठाने के लिए 30 जुलाई को लखनऊ रवाना हो रहे हैं। जलाशय की भूमि को पानी भरने के लिए माफिया के कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।
भूमि को चिन्हित किया : एसडीएम
उधर, एसडीएम वीके सिंह का कहना है कि कुछ भूमि को चिन्हित कर लिया गया है। कुछ भूमि पर विधिक अड़चन है। विधिक अड़चन को दूर करने के लिए प्रशासन परैवी कर रहा है।
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विभाग की 3600 एकड़ भूमि
धामपुर। सिंचाई विभाग के पीली बांध जलाशय की करीब 3600 एकड़ भूमि पर माफिया ने कब्जा कर रखा है। जलाशय बनने के बाद ही माफिया ने इस जमीन को हथिया लिया था। पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद भी माफिया जमीन को नहीं छोड़ रहा है। जलाशय की भूमि पर कब्जे से यह पानी से नहीं भर पाता। माफिया ने आधे से ज्यादा जलाशय पर खेतीबाड़ी शुरू कर दी है।
चार दशक पहले नदियों के पानी को एकत्र कर सिंचाई के उपयोग में लाने के लिए अमानगढ़ वन रेंज से सटे इलाके में हजारों हेक्टेयर भूमि पर करोड़ों रुपये की लागत से पीली बांध जलाशय का निर्माण हुआ था। कुछ समय तो जलाशय में ठीकठाक पानी भरा जाता रहा, लेकिन बाद में खाली पड़ी भूमि को माफिया ने हथियाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे माफिया ने सिंचाई विभाग की 3600 एकड़ भूमि पर कब्जा जमा लिया। सूचना के बावजूद सिंचाई विभाग के अफसर चुप्पी साधे रहे।
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इस जलाशय में बरसात का पानी भरने के बाद किसान नहरों से खेतों की सिंचाई करते थे। अब जलाशय के हालात ऐसे हैं कि दो दिन छोड़ने लायक भी पानी इसमें नहीं रहता। पानी सूखने से जलाशय में मछली पालन भी बंद हो गया है। जलाशय की भूमि का एक छोर उत्तराखंड से लगा हुआ है। भाकियू की शिकायत पर पुलिस प्रशासन ने भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए कई बार हाथ-पैर मारे, लेकिन माफिया के सामने उनकी एक न चली। करीब डेढ़ दशक पहले इस भूमि को चरागाह के लिए भी उपयोग किया जाता था, मगर माफिया की सक्रियता के बाद वह भी बंद हो गया है।
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सीएम के सामने उठाएंगे मुद्दा
भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष कैलाश सिंह का कहना है कि वह इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के दरबार में उठाने के लिए 30 जुलाई को लखनऊ रवाना हो रहे हैं। जलाशय की भूमि को पानी भरने के लिए माफिया के कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।
भूमि को चिन्हित किया : एसडीएम
उधर, एसडीएम वीके सिंह का कहना है कि कुछ भूमि को चिन्हित कर लिया गया है। कुछ भूमि पर विधिक अड़चन है। विधिक अड़चन को दूर करने के लिए प्रशासन परैवी कर रहा है।