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रूहेलखंड विश्वविद्यालय : रिसर्च गाइड के लिए शुल्क निर्धारण पर विवाद
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Controversy over fee fixation for research guide
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रूहेलखंड विश्वविद्यालय : रिसर्च गाइड के लिए शुल्क निर्धारण पर विवाद
बिजनौर। रूहेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा शोध पर्यवेक्षक अर्थात रिसर्च गाइड बनने के लिए शुल्क निर्धारित किए जाने पर विवाद शुरू हो गया है। रूहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन रूटा ने शुल्क लिए जाने को ग़लत परंपरा की शुरुआत बताते हुए वापस लेने की मांग उठाई है। रूटा ने शुल्क वसूली का फैसला वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
रूटा के अध्यक्ष एवं वर्धमान कॉलेज बिजनौर में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय ने शोध पर्यवेक्षक अर्थात रिसर्च गाइड बनने के लिए डिग्री कॉलेज के अर्ह शिक्षकों से 15 अक्टूबर तक आवेदन मांगे हैं। विश्वविद्यालय ने इसके लिए 1000 रुपये शुल्क निर्धारित किया है। डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि अभी तक रिसर्च गाइड बनने के लिए शिक्षकों से शुल्क नहीं लिया गया है। आरोप लगाया कि शुल्क निर्धारित करना शिक्षा जगत में एक ग़लत नई परंपरा की शुरुआत है। फैसला शिक्षक को अपमानित करने वाला है। रूटा फैसले का पुरजोर विरोध करता है।
रूटा अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने फैसले पर पुनर्विचार करे। शिक्षकों की गरिमा बनाए रखने के लिए फैसला तुरंत वापस लिया जाए। कहा कि यदि फैसला वापस नहीं लिया जाता है तो रूटा आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा। एसोसिएशन ने शिक्षकों को जागरूक करने के लिए कालेजों में संपर्क शुरू कर दिया है। जल्द ही रूटा कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जाएगी।
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बिजनौर। रूहेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा शोध पर्यवेक्षक अर्थात रिसर्च गाइड बनने के लिए शुल्क निर्धारित किए जाने पर विवाद शुरू हो गया है। रूहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन रूटा ने शुल्क लिए जाने को ग़लत परंपरा की शुरुआत बताते हुए वापस लेने की मांग उठाई है। रूटा ने शुल्क वसूली का फैसला वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
रूटा के अध्यक्ष एवं वर्धमान कॉलेज बिजनौर में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय ने शोध पर्यवेक्षक अर्थात रिसर्च गाइड बनने के लिए डिग्री कॉलेज के अर्ह शिक्षकों से 15 अक्टूबर तक आवेदन मांगे हैं। विश्वविद्यालय ने इसके लिए 1000 रुपये शुल्क निर्धारित किया है। डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि अभी तक रिसर्च गाइड बनने के लिए शिक्षकों से शुल्क नहीं लिया गया है। आरोप लगाया कि शुल्क निर्धारित करना शिक्षा जगत में एक ग़लत नई परंपरा की शुरुआत है। फैसला शिक्षक को अपमानित करने वाला है। रूटा फैसले का पुरजोर विरोध करता है।
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रूटा अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने फैसले पर पुनर्विचार करे। शिक्षकों की गरिमा बनाए रखने के लिए फैसला तुरंत वापस लिया जाए। कहा कि यदि फैसला वापस नहीं लिया जाता है तो रूटा आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा। एसोसिएशन ने शिक्षकों को जागरूक करने के लिए कालेजों में संपर्क शुरू कर दिया है। जल्द ही रूटा कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जाएगी।
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