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Bijnor News: रात के अंधेरे में छोईया नदी में गिराया जा रहा केमिकल युक्त पानी
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बिजनौर में छोईयां नदी में टैंकर से डाला जा रहा कैमिकलयुक्त पानी।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अंजान, आंकड़ों में बताया जा रहा स्वच्छ है छोईया
-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी बोले, मामले की कराएंगे जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सख्त नियम है कि किसी भी नदी में कोई फैक्टरी प्रदूषित पानी नहीं डाल सकती। मगर, हकीकत इससे उलट है। कुछ फैक्टरियों ने इसका तोड़ भी निकाल लिया है। अब रात के अंधेरे में प्रदूषित पानी टैंकर में भरकर छोईया नदी में गिराया जा रहा है। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इससे अनजान बना हुआ है और जांच की बात कह रहा है।
जिले में दो ऐसी नदियां मालन और छोईया हैं, जो जिले में ही गंगा में गिरती है। इस समय दोनों ही नदियाें में बार-बार प्रदूषित पानी गिराया जाता है, जो आगे जाकर गंगा में मिल जाता है। कुछ माह पहले यही हाल मालन नदी का हुआ था, जिसमें प्रदूषित पानी आने से मछलियां तक मर गई थी। अब छोईया नदी भी कुछ इसी स्थिति में है। कहने के लिए यह नदी है, लेकिन वर्तमान में इसकी हालत नाले से भी खराब हो चुकी है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें प्रदूषण का स्तर ज्यादा खराब नहीं है। छोइया नदी में डिजोल ऑक्सीजन 5.8 होने का दावा किया जाता है। उधर, वर्तमान में जो हालात लग रहे हैं, उससे इसके और ज्यादा प्रदूषित होने से इनकार नहीं किया जा सकता। एक वीडियो सोशल मीडिया पर आई, जिसमें छोईया किनारे एक टैंकर खड़ा हुआ है। इस टैंकर से छोईया में प्रदूषित पानी गिराया जा रहा है। आसपास के लोग बताते हैं कि रात के अंधेरे में कई बार ऐसा किया जाता है।
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हर बार प्रदूषित पानी से अनजान बन जाता है बोर्ड
यह पहली बार नहीं है, जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नदियों में प्रदूषण को लेकर अनजान बना हुआ है। पिछले दिनों मालन में प्रदूषित पानी आया तो उसके नमूने लेने में ही कई दिन का समय लगा दिया था। हालांकि बाद में एक फैक्टरी को नोटिस जारी हुआ और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब छोईया में प्रदूषण को लेकर भी यही हाल नजर आ रहा है। विभाग के अफसर जांच कराने की बात कह रहे हैं।
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नहीं रुका प्रदूषण तो खतरे में पड़ जाएगी गंगा की जैव विविधता
नमामि गंगे समेत वन विभाग भी गंगा में जैव विविधता को कायम करने के लिए तमाम अभियान चला रहा है। गंगा में मछलियां और कछुए तक छोड़े जा रहे हैं। मगर, छोटी नदियों के माध्यम से गंगा में इसी तरह केमिकल वाला पानी जाता रहा तो गंगा में जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
टीम भेजकर जांच कराई जाएगी
छोईया में यदि प्रदूषित पानी गिराया गया है तो यह गलत है। टीम भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी। जिसने भी यह किया, जांच के बाद इस मामले में उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - विजय कुमार, आरओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी बोले, मामले की कराएंगे जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सख्त नियम है कि किसी भी नदी में कोई फैक्टरी प्रदूषित पानी नहीं डाल सकती। मगर, हकीकत इससे उलट है। कुछ फैक्टरियों ने इसका तोड़ भी निकाल लिया है। अब रात के अंधेरे में प्रदूषित पानी टैंकर में भरकर छोईया नदी में गिराया जा रहा है। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इससे अनजान बना हुआ है और जांच की बात कह रहा है।
जिले में दो ऐसी नदियां मालन और छोईया हैं, जो जिले में ही गंगा में गिरती है। इस समय दोनों ही नदियाें में बार-बार प्रदूषित पानी गिराया जाता है, जो आगे जाकर गंगा में मिल जाता है। कुछ माह पहले यही हाल मालन नदी का हुआ था, जिसमें प्रदूषित पानी आने से मछलियां तक मर गई थी। अब छोईया नदी भी कुछ इसी स्थिति में है। कहने के लिए यह नदी है, लेकिन वर्तमान में इसकी हालत नाले से भी खराब हो चुकी है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें प्रदूषण का स्तर ज्यादा खराब नहीं है। छोइया नदी में डिजोल ऑक्सीजन 5.8 होने का दावा किया जाता है। उधर, वर्तमान में जो हालात लग रहे हैं, उससे इसके और ज्यादा प्रदूषित होने से इनकार नहीं किया जा सकता। एक वीडियो सोशल मीडिया पर आई, जिसमें छोईया किनारे एक टैंकर खड़ा हुआ है। इस टैंकर से छोईया में प्रदूषित पानी गिराया जा रहा है। आसपास के लोग बताते हैं कि रात के अंधेरे में कई बार ऐसा किया जाता है।
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हर बार प्रदूषित पानी से अनजान बन जाता है बोर्ड
यह पहली बार नहीं है, जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नदियों में प्रदूषण को लेकर अनजान बना हुआ है। पिछले दिनों मालन में प्रदूषित पानी आया तो उसके नमूने लेने में ही कई दिन का समय लगा दिया था। हालांकि बाद में एक फैक्टरी को नोटिस जारी हुआ और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब छोईया में प्रदूषण को लेकर भी यही हाल नजर आ रहा है। विभाग के अफसर जांच कराने की बात कह रहे हैं।
नहीं रुका प्रदूषण तो खतरे में पड़ जाएगी गंगा की जैव विविधता
नमामि गंगे समेत वन विभाग भी गंगा में जैव विविधता को कायम करने के लिए तमाम अभियान चला रहा है। गंगा में मछलियां और कछुए तक छोड़े जा रहे हैं। मगर, छोटी नदियों के माध्यम से गंगा में इसी तरह केमिकल वाला पानी जाता रहा तो गंगा में जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
टीम भेजकर जांच कराई जाएगी
छोईया में यदि प्रदूषित पानी गिराया गया है तो यह गलत है। टीम भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी। जिसने भी यह किया, जांच के बाद इस मामले में उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - विजय कुमार, आरओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड