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Bijnor: गबन में एसबीडी के प्रबंधक गिरफ्तार, 37 बैंक खातों में क्या चल रहा, कुछ अता-पता नहीं
Sun, 27 Oct 2024 03:33 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Sun, 27 Oct 2024 03:33 PM IST
सार
एसडीएम ने विभिन्न बैंकों में संचालित खातों के विवरण संबंधित कैश बुक, बुक स्टेटमेंट, बिल वाउचर आदि उपलब्ध कराने के कहा था। परंतु ऐसा नहीं किया गया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धामपुर के एसबीडी कॉलेज के प्रबंधक विजय कुमार अग्रवाल को लाखों रुपये के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, शिकायत के आधार पर जांच कमेटी गठित की गई थी। जांच कमेटी ने कॉलेज के खातों में लाखों की हेराफेरी पकड़ी।
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कॉलेज की प्रबंध समिति कार्यकारिणी की सदस्य रेनू गोयल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि कॉलेज की कार्यकारिणी के पदेन अध्यक्ष डीएम ने वित्तीय अनियमितता के आरोप में कॉलेज की कार्यकारिणी को भंग कर दिया था। धामपुर एसडीएम रितु रानी को प्रशासक नियुक्त किया गया था।
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इस मामले की जांच के लिए डीएम ने 30 जुलाई 2024 को एसडीएम नगीना, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी बिजनौर और वित्तीय परामर्शदाता लेखाधिकारी जिला पंचायत की तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।
कमेटी में शामिल एसडीएम ने महाविद्यालय प्राचार्य को विभिन्न बैंकों में संचालित खातों के विवरण संबंधित कैश बुक, बुक स्टेटमेंट, बिल वाउचर आदि उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया। इस पर महाविद्यालय से प्राप्त होने वाले समस्त शुल्कों को नियम अनुसार कार्य दिवस अथवा अगले कार्य दिवस में बैंकों में अवश्य जमा किया जाना था। परंतु ऐसा नहीं हुआ।
कॉलेज के कार्मिकों और प्रबंधक द्वारा रकम को अपने पास गलत ढंग से रखा गया, जो वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। प्राचार्य के स्तर से महाविद्यालय से संबंधित 40 बैंक खातों का विवरण उपलब्ध कराया गया। मगर, 37 बैंक खातों का विवरण संस्था द्वारा जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराया गया। इन 37 खातों में 18,24,268 रुपये की रकम अप्रयुक्त पड़ी थी।
इन खातों में पिछले आठ सालों में हुई 1.90 करोड़ की आय, खर्चा 1.70 करोड़ का हुआ। कॉलेज को एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2024 तक एक करोड़ 84 लाख 453 रुपये 35 पैसे की आय हुई। एक करोड़ 67 लाख 38571 का खर्चा हुआ।
इससे स्पष्ट होता है या तो संस्था द्वारा यह खाते जान-बूझकर छुपाए गए हैं। या फिर कार्मिकों की भी खातों में नियम विरुद्ध संलिप्तता थी। यह भी आरोप है कि विभिन्न प्रकार की सामग्री क्रय करते समय, निर्माण, मरम्मत करते समय नियमों का पालन नहीं हुआ। कई मामलों में कार्य की आवश्यकता नहीं दर्शाई गई।