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Bijnor News: इतिहास के फलक पर चमकता रहा है बिजनौर
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बेशक मौजूदा शासन व्यवस्था के तौर बिजनौर का वजूद 200 साल पूरे करने जा रहा है, मगर इस जनपद की धरती का इतिहास बेहद प्राचीन है। रामायण काल में उत्तरापथ के तौर पर इसे जाना गया। महाभारत काल के अवशेष जगह जगह बिखरे पड़े है। मुगलकाल के जहांगीरनामा में बिजनौर की साहनपुर स्टेट का जिक्र मिलता है।
1824 में जिले का मुख्यालय नगीना से बिजनौर लाया गया। बिजनौर में महाभारतकालीन महात्मा विदुर की कुटी, राजा दुष्यंत-शकुंतला की प्रणय स्थल गंगा और मालन का संगम, कण्व ऋषि आश्रम भी है। फिर चाहे गलखा देवी मंदिर हो या मेनका ताल या फिर रामायण काल का सीता मठ हर जगह खुद को प्राचीन साबित करती है।
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बिजनौर। बेशक मौजूदा शासन व्यवस्था के तौर बिजनौर का वजूद 200 साल पूरे करने जा रहा है, मगर इस जनपद की धरती का इतिहास बेहद प्राचीन है। रामायण काल में उत्तरापथ के तौर पर इसे जाना गया। महाभारत काल के अवशेष जगह जगह बिखरे पड़े है। मुगलकाल के जहांगीरनामा में बिजनौर की साहनपुर स्टेट का जिक्र मिलता है।
1824 में जिले का मुख्यालय नगीना से बिजनौर लाया गया। बिजनौर में महाभारतकालीन महात्मा विदुर की कुटी, राजा दुष्यंत-शकुंतला की प्रणय स्थल गंगा और मालन का संगम, कण्व ऋषि आश्रम भी है। फिर चाहे गलखा देवी मंदिर हो या मेनका ताल या फिर रामायण काल का सीता मठ हर जगह खुद को प्राचीन साबित करती है।
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