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स्वामी बिजनौरी का नाम लिम्का बुक में

Sat, 28 Nov 2015 12:25 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर Updated Sat, 28 Nov 2015 12:25 AM IST
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Bijnauri owner's name in the Limca Book
बिजनौर। शशि मोहन शर्मा उर्फ स्वामी बिजनौरी का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि उन्हें वर्ष 1985 से अब तक बरगद की लाखों पौध रोपने पर हासिल हुई है। शुक्रवार को लिम्का बुक आफ रिकार्ड में शामिल किए जाने का पत्र उन्हें डाक से प्राप्त हुआ।
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साहित्य बिहार कॉलोनी निवासी विद्युत निगम के रिटायर्ड एसडीओ शशि मोहन शर्मा 35 वर्षों से बरगद के पेड़ लगा रहे हैं। इनके घर में भी लगभग 190 पौधे ग्लास, कप, खाली डिब्बों, बोतल एवं शीशी में लगे हुए हैं। 30 से 35 साल पुराने पेड़ भी इनके गमलों में लगे हुए हैं।
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सैफंट और इंजेक्शन की शीशी में भी लगी वट की पौध एक से पांच साल तक की है। खास बात यह है कि उनको केवल घर में ही बरगद के पेड़ लगाने का शौक नहीं है, बल्कि वे जहां पर भी जाते हैं बरगद की पौध की रोपाई करते हैं।
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कई बिजलीघर, गंगा के किनारे एवं गांवों में बरगद के पौधे लगा चुके शशि मोहन बताते हैं कि उन्हें रॉक गार्डन चंडीगढ़ के संस्थापक नेकचंद से कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। इसी दौरान उन्होंने किसी किताब में पढ़ा कि एक बरगद पाल कर आप कई अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त कर सकते हैं।

क्योंकि प्राणी मात्र को बरगद शुद्ध ऑक्सीजन देने का काम करता है। तभी से उन्होेंने ठान लिया कि वे हमेशा लोगों को बरगद का महत्व बताएंगे और उसकी पौध ही लगाएंगे। बरगद की पौध लगाने का सिलसिला 1985 से चल रहा है। कभी पत्नी ने विरोध किया था किंतु उनके कार्य में अब पूरा परिवार सहयोग करता है।

पौत्र तो पौधे खोजने में उनके बड़े मददगार हैं। उनसे प्रेरणा लेकर टेलीफोन विभाग के एसडीओ हुकुम सिंह शास्त्री ने भी गायत्री शक्ति पीठ के पौधरोपण कार्य को संभाल लिया है। अब वे भी बरगद लगाने में जुट गए हैं। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अमर उजाला दिया।

बताया कि 26 अप्रैल को उनके शौक को अमर उजाला ने अपने पत्र में जगह देकर उनके कार्य से समाज को परिचित कराया था।

लेखन कला के भी धनी शशि मोहन
बिजनौर। शशि मोहन शर्मा का जन्म 1951 में मुरादाबाद जिले के चंदौसी में हुआ। शिक्षा मुरादाबाद में हुई और इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद पहले नलकूप और उसके बाद विद्युत निगम में नौकरी की।


मेरठ में एसडीओ के पद से रिटायर्ड हुए। स्वामी बिजनौरी नाम से इन्होंने विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेख लिखे। नियमित हास्य व्यंग्य एवं आखिर रहस्य क्या था? सीरीज की उनकी करीब 200 रचनाएं विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।
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