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Bijnor News: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से 41 जिलों की ऑडिट रिपोर्ट ही गायब
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों, बजट और खर्च का हिसाब आम लोगों तक पहुंचाने के लिए बनाए गए ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ही पारदर्शिता की तस्वीर अधूरी नजर आ रही है। प्रदेश के 41 जिलों की ऑडिट रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध ही नहीं है। इनमें बिजनौर, बागपत, मेरठ, शामली, मुरादाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले शामिल हैं। इन जिलों के सामने पोर्टल पर ऑडिट रिपोर्ट की संख्या शून्य दिखाई दे रही है। इससे सवाल उठ रहा है कि पंचायतों के वित्तीय कामकाज की ऑनलाइन निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है।
ई-ग्राम स्वराज को पंचायतों की कार्ययोजना बनाने, बजट और लेखा-जोखा रखने, विकास कार्यों की प्रगति दर्ज करने तथा वित्तीय लेनदेन की निगरानी के लिए विकसित किया गया है। इसके साथ ऑडिट ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से पंचायतों के खातों की ऑनलाइन जांच की सुविधा भी दी गई है। इसका उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को पारदर्शी बनाना और सरकारी धन के इस्तेमाल पर निगरानी रखना है।
ऑनलाइन व्यवस्था का मकसद था जवाबदेही तय करना
ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली, खड़ंजा, पेयजल और अन्य विकास कार्यों पर सरकारी धन खर्च होता है। इन कार्यों के लिए स्वीकृत बजट, खर्च और प्रगति की जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज होने पर संबंधित अधिकारी ही नहीं, आम नागरिक भी पंचायत के कामकाज की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऑडिट रिपोर्ट से वित्तीय अभिलेखों की जांच और सामने आई आपत्तियों की जानकारी मिलने का रास्ता खुलता है। ऐसे में यदि पोर्टल पर जिलों के सामने ऑडिट रिपोर्ट की संख्या शून्य दिखाई देती है तो ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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मूल उद्देश्य से भटकने का सवाल
डिजिटल व्यवस्था लागू करने के पीछे मकसद केवल आंकड़े ऑनलाइन दर्ज करना नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल को पारदर्शी बनाना और जिम्मेदारी तय करना भी है। यदि ऑडिट से जुड़ी जानकारी ही पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होती तो आम लोगों के लिए पंचायतों के वित्तीय कामकाज की पड़ताल करना मुश्किल हो जाता है। इससे डिजिटल पारदर्शिता के दावे और पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के बीच अंतर दिखाई देता है।
ऐसे जिले जिनकी ऑडिट रिपोर्ट शून्य
-ई ग्राम स्वराज पोर्टल पर अमरोहा, बागपत, बांदा, बिजनौर, बदायूं, मेरठ, मुरादाबाद, शामली जिलों के आगे ऑडिट रिपोर्ट की संख्या शून्य नजर आ रही है। वहीं सहारनपुर जिले से 96, मुजफ्फरनगर से 26 और बुलंदशहर जिले से 188 ऑडिट रिपोर्ट अपलोड की गई हैं।
पंचायतों का ऑडिट अभी चल रही है। इस माह काफी संख्या में ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कर दी जाएंगी। मंडल स्तर से अनुमति मिल गई है।
-भीमसेन भाटिया, जिला लेखाअधिकारी, पंचायत एवं सोसायटी
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बिजनौर। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों, बजट और खर्च का हिसाब आम लोगों तक पहुंचाने के लिए बनाए गए ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ही पारदर्शिता की तस्वीर अधूरी नजर आ रही है। प्रदेश के 41 जिलों की ऑडिट रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध ही नहीं है। इनमें बिजनौर, बागपत, मेरठ, शामली, मुरादाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले शामिल हैं। इन जिलों के सामने पोर्टल पर ऑडिट रिपोर्ट की संख्या शून्य दिखाई दे रही है। इससे सवाल उठ रहा है कि पंचायतों के वित्तीय कामकाज की ऑनलाइन निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है।
ई-ग्राम स्वराज को पंचायतों की कार्ययोजना बनाने, बजट और लेखा-जोखा रखने, विकास कार्यों की प्रगति दर्ज करने तथा वित्तीय लेनदेन की निगरानी के लिए विकसित किया गया है। इसके साथ ऑडिट ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से पंचायतों के खातों की ऑनलाइन जांच की सुविधा भी दी गई है। इसका उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को पारदर्शी बनाना और सरकारी धन के इस्तेमाल पर निगरानी रखना है।
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ऑनलाइन व्यवस्था का मकसद था जवाबदेही तय करना
ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली, खड़ंजा, पेयजल और अन्य विकास कार्यों पर सरकारी धन खर्च होता है। इन कार्यों के लिए स्वीकृत बजट, खर्च और प्रगति की जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज होने पर संबंधित अधिकारी ही नहीं, आम नागरिक भी पंचायत के कामकाज की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऑडिट रिपोर्ट से वित्तीय अभिलेखों की जांच और सामने आई आपत्तियों की जानकारी मिलने का रास्ता खुलता है। ऐसे में यदि पोर्टल पर जिलों के सामने ऑडिट रिपोर्ट की संख्या शून्य दिखाई देती है तो ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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मूल उद्देश्य से भटकने का सवाल
डिजिटल व्यवस्था लागू करने के पीछे मकसद केवल आंकड़े ऑनलाइन दर्ज करना नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल को पारदर्शी बनाना और जिम्मेदारी तय करना भी है। यदि ऑडिट से जुड़ी जानकारी ही पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होती तो आम लोगों के लिए पंचायतों के वित्तीय कामकाज की पड़ताल करना मुश्किल हो जाता है। इससे डिजिटल पारदर्शिता के दावे और पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के बीच अंतर दिखाई देता है।
ऐसे जिले जिनकी ऑडिट रिपोर्ट शून्य
-ई ग्राम स्वराज पोर्टल पर अमरोहा, बागपत, बांदा, बिजनौर, बदायूं, मेरठ, मुरादाबाद, शामली जिलों के आगे ऑडिट रिपोर्ट की संख्या शून्य नजर आ रही है। वहीं सहारनपुर जिले से 96, मुजफ्फरनगर से 26 और बुलंदशहर जिले से 188 ऑडिट रिपोर्ट अपलोड की गई हैं।
पंचायतों का ऑडिट अभी चल रही है। इस माह काफी संख्या में ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कर दी जाएंगी। मंडल स्तर से अनुमति मिल गई है।
-भीमसेन भाटिया, जिला लेखाअधिकारी, पंचायत एवं सोसायटी