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Bijnor News: ‘राजा’ के आते ही राजकुमार शांत, शोर मचा रहे इंसान

Tue, 11 Feb 2025 12:32 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Tue, 11 Feb 2025 12:32 AM IST
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As soon as the 'king' arrives, the prince is quiet, while people are making noise
अफजलगढ़ क्षेत्र के गांव हर्रायवाला के जंगल में निरीक्षण करते सीएफ मुरादाबाद रमेश चंद्रा। स्रोत
बिजनौर, अफजलगढ़ /रेहड़। अभी तक गन्ने के खेतों में गुलदार ही देखे जा रहे थे, वहीं अब बाघ की दस्तक ने दहशत बढ़ा दी है। बाघ की चहलकदमी से पिछले दो दिन में गांव हर्रायवाला क्षेत्र में गुलदार का दिखना लगभग बंद हैं, वहीं इंसानों में खौफ है।
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ग्रामीण वन विभाग से बाघ को पकड़ने की मांग कर रहे हैं। वन विभाग ड्रोन से निगरानी के साथ-साथ पिंजरा लगाकर उसे पकड़ने का प्रयास कर रहा है।
तीन दिन पूर्व गांव हर्रायवाला के पूर्व प्रधान धीरेंद्र शेखावत एवं उनसे सटे पड़ोसी किसान राकेश कुमार निवासी सादकपुर के खेतों में काम करने गए मजदूरों को गन्ने के खेतों में आराम करता बाघ दिखाई दिया था। जिसकी कुछ युवकों ने वीडियो भी बनाकर ली थी और सोशल मीडिया पर डाल दी थी।
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जैसे ही इसका पता चला वन विभाग ने हर्रायवाला से लगे वादीगढ़ चौराहा, भगतावाला, सादकपुर आदि अन्य गांवों में भी धार्मिक स्थलों से एनाउंस कराया और ग्रामीणों को अलर्ट रहने की हिदायत दी। रविवार की देर शाम डीएफओ ज्ञान सिंह ने रेंज के अधिकारियों के साथ उस स्थान का निरीक्षण भी किया।
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वहीं कमाल यह है कि इस क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी के बाद से गुलदार नहीं दिखाई दिया है। सोमवार को अमानगढ़ रेंजर अंकिता किशोर के नेतृत्व में अमानगढ़ एवं नगीना रेंज के वन कर्मियों ने खेतों में काम कर रहे लोगों को बाघ से बचाव के तरीके बताए। उधर, ग्रामीणों ने सोमवार को भी बाघ दिखने का दावा किया।
दो से पांच किमी के दायरे में बना हुआ है खतरा : अमाननगर के जिस गांव में गन्ने के खेत में बाघ आराम करता दिखा था, उससे दो किमी के दायरे में कई गांव आ रहे हैं। जिनमें बादीगढ़ चौराहा, रेहड़ दहलावाला, भगतावाला, राजनगर व हर्रायवाला आदि गांव आते हैं, बाघ के बस्ती के बीच में एक खेत में दिखाई देना ग्रामीण खतरे का संकेत मान रहे हैं, वहीं ग्रामीणों को आशंका सता रही है कि कहीं बाघ किसी बड़ी घटना को अंजाम न दे बैठे।

15 साल पहले दस से ज्यादा जान ले चुका है बाघ : वर्ष 2012-13 में एक बाघिन आदमखोर हो गई थी। मुरादाबाद के जंगलों से होती हुई जब मानियावाला क्षेत्र में पहुंची, तब तक दस से ज्यादा जान ले चुकी थी। इसके बाद कई माह तक आसपास के गांवों में उसकी दहशत रही। उस बाघिन ने 15 से ज्यादा इंसानों को मौत के घाट उतारा था। ऐसे में फिर से एक बाघ के जंगल से भटककर गन्ने के खेतों में पहुंचने से पूरा क्षेत्र दहशत में है।
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