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Bijnor News: जब तक रहेंगे प्रवासी ''''''''मेहमान'''''''', तब तक अभयारण्य में नहीं होगा निर्माण
Sat, 11 Mar 2023 11:38 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sat, 11 Mar 2023 11:38 PM IST
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बिजनौर का गंगा बैराज
बिजनौर। जब तक प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहेगा, इस अवधि के बीच हाईवे का निर्माण नहीं होगा। यह निर्णय हस्तिनापुर अभयारण्य में वन्य जीवों के विचरण और हैदपुर वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों को देखते हुए लिया गया है। हाईवे और वन अधिकारियों के बीच इस पर सहमति बनने के साथ ही एनओसी मिलने की राह भी आसान हो गई है।
मेरठ पौड़ी नेशनल हाईवे 119 को मेरठ से नजीबाबाद से कोटद्वार तक फोरलेन किया जाना है। फिलहाल मेरठ से बहसूमा और बिजनौर से नजीबाबाद तक हाईवे को फोरलेन किया जा रहा है। करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
उधर बहसूमा से बिजनौर तक हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य की वजह से एनओसी अभी तक नहीं मिली है। भारत सरकार से एनओसी मिलने के बाद ही बहसूमा से बिजनौर के बीच हाईवे को फोरलेन किया जा सकेगा। उधर गंगा पर भी पुल इस एनओसी के बाद ही बनेगा। एनओसी को लेकर पिछले दो सालों से हाईवे के अधिकारी और वन अधिकारियों के बीच मंथन चल रहा है। भारतीय वन्य जीव संस्थान की टीम भी सर्वे कर चुकी है। वन विभाग के अफसरों की मानें तो आपस में लगभग लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन गई है।
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हाईवे निर्माण में प्रमुख समस्या ये हो रही थी कि निर्माण के वक्त वन्य जीवों और प्रवासी पक्षियों को दिक्कत होगी। यूरोप तक से आने वाले प्रवासी पक्षी भी निर्माण के शोरगुल से परेशान हो सकते हैं। जिसके चलते यह सहमति बनी है कि प्रवासी पक्षी जब तक हैदरपुर वेटलैंड और गंगा के किनारे रहेंगे, तब तक निर्माण नहीं किया जाएगा। इनके यहां से चले जाने के बाद ही हाईवे का निर्माण होगा। उधर हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य में वन्य जीवों की आवाजाही के लिए हाईवे में दो अंडर पास बनाए जाने का भी प्रावधान जोड़ा गया है।
विशेषज्ञों की निगरानी में बनेगा पुल
बिजनौर बैराज के पास गंगा नदी पर दूसरा पुल बनाया जाना है। उधर गंगा में डॉल्फिन समेत अन्य जलीय जीव हैं। पुल का निर्माण होने से जलीय जीवों को दिक्कत न होने पाए, इसके लिए भी वन्य जीव संस्थान ने सुझाव दिया है। भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों की मौजूदगी में ही गंगा नदी पर पुल का निर्माण किया जाएगा।
गंगा बैराज के पास आते हैं 20 हजार से ज्यादा पक्षी
फोर लेन निर्माण में प्रवासी पक्षियों की सुविधा को यूं ही ध्यान में नहीं रखा गया, बल्कि इन पक्षियों की संख्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यहां पर हर साल देश-विदेश से 20 हजार से ज्यादा पक्षी आते हैं। यहां पर देशी और प्रवासी पक्षियों की 300 से ज्यादा प्रजातियां मिलती हैं। वहीं गंगा की बात करें तो यहां पर डॉल्फिन, घड़ियाल, दस से ज्यादा प्रजाति के कछुए हैं। इसलिए निर्माण में इनकी सुविधा को मुख्य रूप से इंगित किया गया है।
वर्जन........
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से जो सहमति बनी है, उसमें मुख्य रूप से प्रवासी पक्षियों के आने के समय निर्माण न होना है। हस्तिनापुर अभयारण्य में निर्माण के दौरान प्रवासी पक्षियों, जलीय जीवों की सुरक्षा और उन्हें परेशान न करने की बात प्रमुखता से रखी गई थी। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने सर्वे में इन बिंदुओं को उठाया था, जिस पर दोनों विभागों ने सहमति दे दी है। - ज्ञान सिंह, एसडीओ वन विभाग
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मेरठ पौड़ी नेशनल हाईवे 119 को मेरठ से नजीबाबाद से कोटद्वार तक फोरलेन किया जाना है। फिलहाल मेरठ से बहसूमा और बिजनौर से नजीबाबाद तक हाईवे को फोरलेन किया जा रहा है। करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
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उधर बहसूमा से बिजनौर तक हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य की वजह से एनओसी अभी तक नहीं मिली है। भारत सरकार से एनओसी मिलने के बाद ही बहसूमा से बिजनौर के बीच हाईवे को फोरलेन किया जा सकेगा। उधर गंगा पर भी पुल इस एनओसी के बाद ही बनेगा। एनओसी को लेकर पिछले दो सालों से हाईवे के अधिकारी और वन अधिकारियों के बीच मंथन चल रहा है। भारतीय वन्य जीव संस्थान की टीम भी सर्वे कर चुकी है। वन विभाग के अफसरों की मानें तो आपस में लगभग लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन गई है।
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हाईवे निर्माण में प्रमुख समस्या ये हो रही थी कि निर्माण के वक्त वन्य जीवों और प्रवासी पक्षियों को दिक्कत होगी। यूरोप तक से आने वाले प्रवासी पक्षी भी निर्माण के शोरगुल से परेशान हो सकते हैं। जिसके चलते यह सहमति बनी है कि प्रवासी पक्षी जब तक हैदरपुर वेटलैंड और गंगा के किनारे रहेंगे, तब तक निर्माण नहीं किया जाएगा। इनके यहां से चले जाने के बाद ही हाईवे का निर्माण होगा। उधर हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य में वन्य जीवों की आवाजाही के लिए हाईवे में दो अंडर पास बनाए जाने का भी प्रावधान जोड़ा गया है।
विशेषज्ञों की निगरानी में बनेगा पुल
बिजनौर बैराज के पास गंगा नदी पर दूसरा पुल बनाया जाना है। उधर गंगा में डॉल्फिन समेत अन्य जलीय जीव हैं। पुल का निर्माण होने से जलीय जीवों को दिक्कत न होने पाए, इसके लिए भी वन्य जीव संस्थान ने सुझाव दिया है। भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों की मौजूदगी में ही गंगा नदी पर पुल का निर्माण किया जाएगा।
गंगा बैराज के पास आते हैं 20 हजार से ज्यादा पक्षी
फोर लेन निर्माण में प्रवासी पक्षियों की सुविधा को यूं ही ध्यान में नहीं रखा गया, बल्कि इन पक्षियों की संख्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यहां पर हर साल देश-विदेश से 20 हजार से ज्यादा पक्षी आते हैं। यहां पर देशी और प्रवासी पक्षियों की 300 से ज्यादा प्रजातियां मिलती हैं। वहीं गंगा की बात करें तो यहां पर डॉल्फिन, घड़ियाल, दस से ज्यादा प्रजाति के कछुए हैं। इसलिए निर्माण में इनकी सुविधा को मुख्य रूप से इंगित किया गया है।
वर्जन........
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से जो सहमति बनी है, उसमें मुख्य रूप से प्रवासी पक्षियों के आने के समय निर्माण न होना है। हस्तिनापुर अभयारण्य में निर्माण के दौरान प्रवासी पक्षियों, जलीय जीवों की सुरक्षा और उन्हें परेशान न करने की बात प्रमुखता से रखी गई थी। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने सर्वे में इन बिंदुओं को उठाया था, जिस पर दोनों विभागों ने सहमति दे दी है। - ज्ञान सिंह, एसडीओ वन विभाग