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और भाकियू के मंच पर भाषण देकर छा गए थे चौधरी जयंत सिंह
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और भाकियू के मंच पर जुट गए थे राजनीतिक दल
बिजनौर। कृषि कानूनों के विरोध में जिले में नया इतिहास भी लिखा गया। आंदोलन को राजनीति से दूर रखने वाली भाकियू के मंच पर रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह शामिल हुए और भाषण भी दिया। तब भाकियू युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव टिकैत और चौधरी जयंत सिंह का एक मंच पर साथ आना चर्चा में रहा था।
26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के बाद भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का भावुक बयान आने के बाद जिले के किसान भी सभी दलों को छोड़कर केवल किसान बन गए थे। तब भाकियू की हर जिले में महापंचायत हो रही थी और जिले में भी एक फरवरी को महापंचायत बुलाई गई थी। महापंचायत में चौधरी जयंत सिंह भी शामिल होना चाहते थे, लेकिन भाकियू के कुछ नेताओं ने इसका विरोध किया। हालांकि बाद में मंच पर न आने की बात कहकर चौधरी जयंत सिंह को महापंचायत में बुलाया गया। महापंचायत सफल बनाने में भाकियू के साथ-साथ पूरे विपक्ष ने जोरदार मेहनत की।
राजकीय आईटीआई बिजनौर के मैदान में हुई महापंचायत में 20 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। चौधरी जयंत सिंह से केवल हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन करने के लिए कहा गया तो रालोद नेता और किसान नाराज हो गए। वे चौधरी जयंत सिंह का भाषण कराने की मांग करने लगे। इस पर गौरव टिकैत ने चौधरी जयंत सिंह को मंच पर बुलाकर माइक सौंपा और भाषण देने के लिए कहा। चौधरी जयंत सिंह ने भाषण दिया और सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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आंदोलन की वजह से हुआ रालोद और सपा में गठबंधन
किसान आंदोलन की वजह से ही रालोद, भाकियू और सपा का गठबंधन परवान चढ़ पा रहा है। इसका असर जिला पंचायत के चुनाव में भी देखने को मिला था जिसमें भाजपा केवल सात जिला पंचायत सीट ही जीती थी और सपा और रालोद का गठबंधन करीब 25 सीट जीतने में सफल रहा था। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में विपक्षी गठबंधन कायम नहीं रह सका और भाजपा के साकेंद्र प्रताप सिंह पंचायत अध्यक्ष बन गए।
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बिजनौर। कृषि कानूनों के विरोध में जिले में नया इतिहास भी लिखा गया। आंदोलन को राजनीति से दूर रखने वाली भाकियू के मंच पर रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह शामिल हुए और भाषण भी दिया। तब भाकियू युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव टिकैत और चौधरी जयंत सिंह का एक मंच पर साथ आना चर्चा में रहा था।
26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के बाद भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का भावुक बयान आने के बाद जिले के किसान भी सभी दलों को छोड़कर केवल किसान बन गए थे। तब भाकियू की हर जिले में महापंचायत हो रही थी और जिले में भी एक फरवरी को महापंचायत बुलाई गई थी। महापंचायत में चौधरी जयंत सिंह भी शामिल होना चाहते थे, लेकिन भाकियू के कुछ नेताओं ने इसका विरोध किया। हालांकि बाद में मंच पर न आने की बात कहकर चौधरी जयंत सिंह को महापंचायत में बुलाया गया। महापंचायत सफल बनाने में भाकियू के साथ-साथ पूरे विपक्ष ने जोरदार मेहनत की।
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राजकीय आईटीआई बिजनौर के मैदान में हुई महापंचायत में 20 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। चौधरी जयंत सिंह से केवल हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन करने के लिए कहा गया तो रालोद नेता और किसान नाराज हो गए। वे चौधरी जयंत सिंह का भाषण कराने की मांग करने लगे। इस पर गौरव टिकैत ने चौधरी जयंत सिंह को मंच पर बुलाकर माइक सौंपा और भाषण देने के लिए कहा। चौधरी जयंत सिंह ने भाषण दिया और सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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आंदोलन की वजह से हुआ रालोद और सपा में गठबंधन
किसान आंदोलन की वजह से ही रालोद, भाकियू और सपा का गठबंधन परवान चढ़ पा रहा है। इसका असर जिला पंचायत के चुनाव में भी देखने को मिला था जिसमें भाजपा केवल सात जिला पंचायत सीट ही जीती थी और सपा और रालोद का गठबंधन करीब 25 सीट जीतने में सफल रहा था। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में विपक्षी गठबंधन कायम नहीं रह सका और भाजपा के साकेंद्र प्रताप सिंह पंचायत अध्यक्ष बन गए।