{"_id":"626c32533c570d4fe60efa19","slug":"amar-ujala-encroachment-removed-malan-river-from-ganga-bijnor-news-mrt586601467","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला : अतिक्रमण ने गंगा से दूर कर दी मालन नदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला : अतिक्रमण ने गंगा से दूर कर दी मालन नदी
विज्ञापन
नजीबाबाद क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण मालन नदी में आया मोड़।
- फोटो : BIJNOR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला : अतिक्रमण ने गंगा से दूर कर दी मालन नदी
रजनीश त्यागी
बिजनौर। मालन नदी इस समय अतिक्रमण की जंजीरों में बुरी तरह जकड़ गई है। अतिक्रमण के कारण मालन में इतने मोड़ कर दिए गए हैं कि ऊपर से देखने पर सांप की तरह इसमें घुमाव आ गए हैं। तकनीकी भाषा में कहें तो मालन का विसर्पिण लगातार बढ़ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिजनौर जिले में मालन के प्रवेश बिंदू से रावली गंगा तक की हवाई दूसरी करीब 53 किलोमीटर है, धरातल पर मालन नदी करीब 101 किलोमीटर दूरी तय कर गंगा तक पहुंच रही है। संवेदनशीलता की दृष्टि से मालन का विसर्पण 1.98 साइनोसिटी तक पहुंच गया है। जिससे इसमें हर साल बाढ़ और कटान की स्थिति बन जाती है।
मालन नदी पर आज तक कोई सफल अभियान चलता नजर नहीं आया है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर रस्म अदायगी हुई। भूमाफिया ने कार्रवाई के बाद फिर से कब्जा कर लिया। एक दिन या एक साल में नहीं हुआ, बल्कि सालों तक लोग मालन पर कब्जा करते रहे। अपने हिसाब से मालन की जमीन पर खेत बनाते गए और मालन बची जमीन पर अपनी धारा को आगे बढ़ाती गई। अतिक्रमण की स्थिति जानने के लिए पुराने रिकॉर्ड पर नजर डालें तो सब कुछ आसानी से समझ आ जाएगा। बिजनौर जिले की सीमा में जिला गजेटियर में मालन की लंबाई करीब 53 किलोमीटर बताई गई है। यह मालन के ऊपर की हवाई दूरी मानी गई थी। करीब पांच दशक पहले तक मालन में इतने घुमाव नहीं थे, क्योंकि इसकी धारा सीधे बहती थी। अब शासन स्तर से प्रशासन को मिले आंकड़ों की मानें तो अब जिले की सीमा में मालन की धारा की लंबाई करीब 101 किलोमीटर तक पहुंच गई है। तथ्य चौंकाने वाला है, लेकिन यह सच है।
इस तरह बढ़ी मालन की दूरी
मालन नदी जिन क्षेत्रों से होकर बह रही है, अगल-अलग क्षेत्रों में इसकी चौड़ाई भी अलग है। कहीं यह 40 मीटर चौड़ी है तो कहीं 70 मीटर चौड़ी है। इस समय मौके की बात करें तो कई जगहों पर मालन की धारा की चौड़ाई पांच मीटर से दस मीटर के बीच ही रह गई है। कहीं-कहीं तो नाले की स्थिति बन गई है। कारण अतिक्रमण है। लोगों ने खेती की तो मालन की जमीन को खेत की शक्ल दे दी। खेत बनाने के लिए मिट्टी का लेबल मिला दिया। ऐसे में जो जगह गहरी बची, वहीं से होकर मालन बहने लगी। हालात यह बन गए कि घुमाव के कारण मालन एक किलोमीटर की दूरी को ही दो किलोमीटर में तय करके आगे बढ़ रही है।
विज्ञापन
मालन पर शोध कर रहे जिले के लोग
जिले के इतिहास पर काम कर रहे हेमंत कुमार ने बताया कि वह मालन पर काफी समय से शोध कर रहे हैं। मालन की सबसे बड़ी चिंता उसका विसर्पण हैं, जो बरसात में बाढ़ और कटाव का कारण बनता है। मालन नदी उत्तराखंड के हल्दुखाता-शिवराजपुर क्षेत्र से बिजनौर में प्रवेश करती है और रावली के निकट गंगा जी में मिल जाती है। इन स्थानों के बीच हवाई दूरी लगभग 53 किलोमीटर है, जबकि विसर्पित दूरी लगभग 101 किलोमीटर है। इन आंकड़ों के आधार पर मालन की वर्तमान में साइनोसिटी 1.98 आती है। नदी अभियांत्रिकी में 1.5 से अधिक साइनोसिटी वाली नदियों को कटान और मार्ग परिवर्तन की दृष्टि से अति संवेदनशील माना जाता है। हेमंत कुमार कहते हैं कि विसर्पण के कारण ही नदी की मुख्य धारा किनारों से कभी दूर तो कभी पास आ जाती है। विसर्पण को साइनोसिटी नामक इकाई में नापा जाता है। इस समय जनपद बिजनौर में मालन नदी की साइनोसिटी लगभग 1.98 है। यह बाढ़ और कटान के लिए संवेदनशील की श्रेणी में आता है।
विज्ञापन
रजनीश त्यागी
बिजनौर। मालन नदी इस समय अतिक्रमण की जंजीरों में बुरी तरह जकड़ गई है। अतिक्रमण के कारण मालन में इतने मोड़ कर दिए गए हैं कि ऊपर से देखने पर सांप की तरह इसमें घुमाव आ गए हैं। तकनीकी भाषा में कहें तो मालन का विसर्पिण लगातार बढ़ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिजनौर जिले में मालन के प्रवेश बिंदू से रावली गंगा तक की हवाई दूसरी करीब 53 किलोमीटर है, धरातल पर मालन नदी करीब 101 किलोमीटर दूरी तय कर गंगा तक पहुंच रही है। संवेदनशीलता की दृष्टि से मालन का विसर्पण 1.98 साइनोसिटी तक पहुंच गया है। जिससे इसमें हर साल बाढ़ और कटान की स्थिति बन जाती है।
मालन नदी पर आज तक कोई सफल अभियान चलता नजर नहीं आया है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर रस्म अदायगी हुई। भूमाफिया ने कार्रवाई के बाद फिर से कब्जा कर लिया। एक दिन या एक साल में नहीं हुआ, बल्कि सालों तक लोग मालन पर कब्जा करते रहे। अपने हिसाब से मालन की जमीन पर खेत बनाते गए और मालन बची जमीन पर अपनी धारा को आगे बढ़ाती गई। अतिक्रमण की स्थिति जानने के लिए पुराने रिकॉर्ड पर नजर डालें तो सब कुछ आसानी से समझ आ जाएगा। बिजनौर जिले की सीमा में जिला गजेटियर में मालन की लंबाई करीब 53 किलोमीटर बताई गई है। यह मालन के ऊपर की हवाई दूरी मानी गई थी। करीब पांच दशक पहले तक मालन में इतने घुमाव नहीं थे, क्योंकि इसकी धारा सीधे बहती थी। अब शासन स्तर से प्रशासन को मिले आंकड़ों की मानें तो अब जिले की सीमा में मालन की धारा की लंबाई करीब 101 किलोमीटर तक पहुंच गई है। तथ्य चौंकाने वाला है, लेकिन यह सच है।
विज्ञापन
इस तरह बढ़ी मालन की दूरी
मालन नदी जिन क्षेत्रों से होकर बह रही है, अगल-अलग क्षेत्रों में इसकी चौड़ाई भी अलग है। कहीं यह 40 मीटर चौड़ी है तो कहीं 70 मीटर चौड़ी है। इस समय मौके की बात करें तो कई जगहों पर मालन की धारा की चौड़ाई पांच मीटर से दस मीटर के बीच ही रह गई है। कहीं-कहीं तो नाले की स्थिति बन गई है। कारण अतिक्रमण है। लोगों ने खेती की तो मालन की जमीन को खेत की शक्ल दे दी। खेत बनाने के लिए मिट्टी का लेबल मिला दिया। ऐसे में जो जगह गहरी बची, वहीं से होकर मालन बहने लगी। हालात यह बन गए कि घुमाव के कारण मालन एक किलोमीटर की दूरी को ही दो किलोमीटर में तय करके आगे बढ़ रही है।
विज्ञापन
मालन पर शोध कर रहे जिले के लोग
जिले के इतिहास पर काम कर रहे हेमंत कुमार ने बताया कि वह मालन पर काफी समय से शोध कर रहे हैं। मालन की सबसे बड़ी चिंता उसका विसर्पण हैं, जो बरसात में बाढ़ और कटाव का कारण बनता है। मालन नदी उत्तराखंड के हल्दुखाता-शिवराजपुर क्षेत्र से बिजनौर में प्रवेश करती है और रावली के निकट गंगा जी में मिल जाती है। इन स्थानों के बीच हवाई दूरी लगभग 53 किलोमीटर है, जबकि विसर्पित दूरी लगभग 101 किलोमीटर है। इन आंकड़ों के आधार पर मालन की वर्तमान में साइनोसिटी 1.98 आती है। नदी अभियांत्रिकी में 1.5 से अधिक साइनोसिटी वाली नदियों को कटान और मार्ग परिवर्तन की दृष्टि से अति संवेदनशील माना जाता है। हेमंत कुमार कहते हैं कि विसर्पण के कारण ही नदी की मुख्य धारा किनारों से कभी दूर तो कभी पास आ जाती है। विसर्पण को साइनोसिटी नामक इकाई में नापा जाता है। इस समय जनपद बिजनौर में मालन नदी की साइनोसिटी लगभग 1.98 है। यह बाढ़ और कटान के लिए संवेदनशील की श्रेणी में आता है।