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15 अक्तूबर के बाद धरातल पर उतरेगी बाढ़ सुरक्षा परियोजना
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मंडावर के खादर क्षेत्र मे खेतों का कटान करती गंगा।
- फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। यूं तो इस साल की बरसात से पहले गंगा नदी के किनारे कटान निरोधी और बाढ़ सुरक्षा परियोजना को धरातल पर उतारने का दावा था, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। जबकि नाबार्ड ने मार्च में ही परियोजना को मंजूरी दे दी थी। अब 15 अक्तूबर के बाद इस परियोजना पर काम होगा। जिसमें 62 करोड़ की लागत से बोल्डर स्टड्स और परक्यूपाईन स्टड बनाए जाने हैं।
पहाड़ से निकलकर गंगा नदी मैदानी इलाके में बिजनौर जिले की सीमा से ही प्रवेश करती है। जिले में गौसपुर से लेकर रावली तक गंगा नदी की धारा गहराई में बहती है। यही वजह है कि बालावाली से रावली तक हर साल खादर की जमीनों का गंगा कटान करती है।
बरसात आते ही खादरवासियों को बाढ़ और कटान का डर सताने लगता है। जिससे निपटने के लिए सालों की जद्दोजहद के बाद गौसपुर, सुक्खापुर, कुंदनपुर, मिर्जापुर, सीमली, राजारामपुर, रघुनाथपुर आदि गांव की सुरक्षा के लिए कटान निरोधक एवं बाढ़ सुरक्षा परियोजना को स्वीकृति मिली। नाबार्ड की ओर से इस परियोजना के लिए बजट मुहैया कराया गया है। नाबार्ड की मंजूरी के बाद फाइल शासन में पहुंची।
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खादरवासियों को उम्मीद थी कि इस साल ही यह परियोजना धरातल पर आ जाएगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। जून से बरसात लग गई। अब सिंचाई विभाग बरसात के बीतने का इंतजार कर रहा है। विभाग का दावा है कि बरसात 15 अक्तूबर को खत्म मानी जाती है, इसके बाद ही बाढ़ सुरक्षा के कार्य कराए जाएंगे।
बनाए जाएंगे बोल्डर और परक्यूपाईन स्टड्स
गंगा नदी के बायीं ओर बाढ़ निरोधी काम होना है। जिसमें तटबंध के बजाये बोल्डर स्टड्स और परक्यूपाईन स्टड्स बनाये जाएंगे। दरअसल गंगा की धारा गहराई में होने की वजह से तटबंध नहीं बनाया जा सकता था। ऐसे में बोल्डर और परक्यूपाईन स्टड्स का ही विकल्प शामिल किया गया।
खादर में फिलहाल जारी है कटान
गंगा के खादर इलाके में जमीन का कटान जारी है। करीब एक हजार बीघा जमीन गंगा मेें समा चुकी है। सिर्फ जमीन ही नहीं कई साल पहले फतेहपुर सभाचंद, सीमला, सीमली, कुंदनपुर टीप गांव गंगा में समा चुके हैं। अब ये गांव दूसरी जगह बसे हुए हैं। जमीन के अलावा किसानों को हर साल फसलों का नुकसान भी होता है। कई बार जमीन को गंगा में जाता देख किसान फसल तैयार होने से पहले ही काटने को मजबूर होते हैं।
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पहाड़ से निकलकर गंगा नदी मैदानी इलाके में बिजनौर जिले की सीमा से ही प्रवेश करती है। जिले में गौसपुर से लेकर रावली तक गंगा नदी की धारा गहराई में बहती है। यही वजह है कि बालावाली से रावली तक हर साल खादर की जमीनों का गंगा कटान करती है।
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बरसात आते ही खादरवासियों को बाढ़ और कटान का डर सताने लगता है। जिससे निपटने के लिए सालों की जद्दोजहद के बाद गौसपुर, सुक्खापुर, कुंदनपुर, मिर्जापुर, सीमली, राजारामपुर, रघुनाथपुर आदि गांव की सुरक्षा के लिए कटान निरोधक एवं बाढ़ सुरक्षा परियोजना को स्वीकृति मिली। नाबार्ड की ओर से इस परियोजना के लिए बजट मुहैया कराया गया है। नाबार्ड की मंजूरी के बाद फाइल शासन में पहुंची।
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खादरवासियों को उम्मीद थी कि इस साल ही यह परियोजना धरातल पर आ जाएगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। जून से बरसात लग गई। अब सिंचाई विभाग बरसात के बीतने का इंतजार कर रहा है। विभाग का दावा है कि बरसात 15 अक्तूबर को खत्म मानी जाती है, इसके बाद ही बाढ़ सुरक्षा के कार्य कराए जाएंगे।
बनाए जाएंगे बोल्डर और परक्यूपाईन स्टड्स
गंगा नदी के बायीं ओर बाढ़ निरोधी काम होना है। जिसमें तटबंध के बजाये बोल्डर स्टड्स और परक्यूपाईन स्टड्स बनाये जाएंगे। दरअसल गंगा की धारा गहराई में होने की वजह से तटबंध नहीं बनाया जा सकता था। ऐसे में बोल्डर और परक्यूपाईन स्टड्स का ही विकल्प शामिल किया गया।
खादर में फिलहाल जारी है कटान
गंगा के खादर इलाके में जमीन का कटान जारी है। करीब एक हजार बीघा जमीन गंगा मेें समा चुकी है। सिर्फ जमीन ही नहीं कई साल पहले फतेहपुर सभाचंद, सीमला, सीमली, कुंदनपुर टीप गांव गंगा में समा चुके हैं। अब ये गांव दूसरी जगह बसे हुए हैं। जमीन के अलावा किसानों को हर साल फसलों का नुकसान भी होता है। कई बार जमीन को गंगा में जाता देख किसान फसल तैयार होने से पहले ही काटने को मजबूर होते हैं।