{"_id":"5dc851928ebc3e5b062c8c19","slug":"additional-commissioner-s-decision-was-wrong-nazibabad-news-mrt4529443182","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपर आयुक्त के फैसले को गलत बताया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपर आयुक्त के फैसले को गलत बताया
विज्ञापन
अपर आयुक्त के फैसले को गलत बताया
नजीबाबाद। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू लखनऊ खंडपीठ ने भूमि विवाद के मामले में मंडल के सेवानिवृत्त हो चुके अपर आयुक्त न्यायिक के आदेश को गलत ठहराया। पीठ ने वादी के पक्ष में दाखिल खारिज करने के आदेश को भी बहाल कर दिया है।
बोर्ड ऑफ रेवेन्यू लखनऊ खंडपीठ में नजीबाबाद क्षेत्र की भूमि का विवाद चल रहा है। खंडपीठ के डॉ. गुरदीप सिंह ने रानी शर्मा बनाम सरफराज प्रकरण में सुनवाई के दौरान भूमि विवाद में रानी शर्मा की निगरानी को स्वीकार करते हुए उनके हक में दाखिल खारिज करने के आदेशों को बहाल रखा है। पठानपुरा निवासी रूखसाना बेगम ने अपने पति की मृत्यु के बाद अपनी आराजी का रानी शर्मा व अन्य के नाम बैनामा कर दिया था। आरोप था कि रूखसाना के जेठ बाबू ने अपने दामाद सरफराज के नाम से फर्जी वसीयत तैयार की थी। भूमि के दाखिल खारिज के समय विवाद उठने पर मामला अपर आयुक्त न्यायालय तक पहुंचा था। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू लखनऊ खंडपीठ ने तत्कालीन अपर आयुक्त आरआर सिंह के आदेश को गैरकानूनी माना और रानी की निगरानी में भूमि का दाखिल खारिज किए जाने संबंधी आदेश जारी किया।
विज्ञापन
नजीबाबाद। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू लखनऊ खंडपीठ ने भूमि विवाद के मामले में मंडल के सेवानिवृत्त हो चुके अपर आयुक्त न्यायिक के आदेश को गलत ठहराया। पीठ ने वादी के पक्ष में दाखिल खारिज करने के आदेश को भी बहाल कर दिया है।
बोर्ड ऑफ रेवेन्यू लखनऊ खंडपीठ में नजीबाबाद क्षेत्र की भूमि का विवाद चल रहा है। खंडपीठ के डॉ. गुरदीप सिंह ने रानी शर्मा बनाम सरफराज प्रकरण में सुनवाई के दौरान भूमि विवाद में रानी शर्मा की निगरानी को स्वीकार करते हुए उनके हक में दाखिल खारिज करने के आदेशों को बहाल रखा है। पठानपुरा निवासी रूखसाना बेगम ने अपने पति की मृत्यु के बाद अपनी आराजी का रानी शर्मा व अन्य के नाम बैनामा कर दिया था। आरोप था कि रूखसाना के जेठ बाबू ने अपने दामाद सरफराज के नाम से फर्जी वसीयत तैयार की थी। भूमि के दाखिल खारिज के समय विवाद उठने पर मामला अपर आयुक्त न्यायालय तक पहुंचा था। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू लखनऊ खंडपीठ ने तत्कालीन अपर आयुक्त आरआर सिंह के आदेश को गैरकानूनी माना और रानी की निगरानी में भूमि का दाखिल खारिज किए जाने संबंधी आदेश जारी किया।
विज्ञापन