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Bijnor News: सड़क पर रहता है बंदरों का झुंड, आवागमन मुश्किल
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शिवाला कलां में नूरपुर-अमरोहा मार्ग पर बैठा बंदरों का झुंड। संवाद (पड़ताल के साथ)
शिवाला कलां। नूरपुर-अमरोहा मार्ग पर बंदरों का झुंड के बैठने से आवागमन में परेशानी हो रही है। बृहस्पतिवार को नूरपुर अमरोहा मार्ग पर फीना के निकट करीब 200 बंदरों का झुंड झाड़ियां से निकलकर मार्ग पर बैठ गया। इस कारण मार्ग पर वाहनों की दोनों ओर कतारें लग गई। इस मार्ग पर आए दिन भी यही स्थिति बनी रहती है।
गांव में स्कूली बच्चे बंदरों के डर से समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं। क्षेत्र में बंदरों की संख्या बढ़ने से आतंक बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण कई वर्षों से वन विभाग से बंदरों को पकड़कर वनों में छोड़ने की मांग कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से वंदरों को पकड़ने के लिए शीघ्र अभियान चला कर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
पूर्व ग्राम प्रधान ममता राजपूत का कहना कि एक वर्ष के अंदर बंदरों के झुंड ने गांव में आधा दर्जन से अधिक ग्रामीणों को मकानों की छत से धक्का दिया। इससे नीचे गिरकर उनकी मौत हो गई। बंदरों के डर से ग्रामीण मकानों की छत पर कोई कार्य नहीं कर सकते हैं। अधिकारी भी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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किसान विजयपाल सिंह का कहना है कि क्षेत्र में बंदर किसानों की फसलों व खेतों में पेड़ पौधों बर्बाद कर रहे हैं। किसानों ने खेतों में दलहन व सब्जियों की फसलें उगानी बंद कर दी है। सरकार को ऐसी समस्या का समाधान शीघ्र करना चाहिए।
ग्राम प्रधान भैंसा राकेश कुमार ने बताया कि बंदरों की संख्या अधिक बढ़ जाने से मार्गो पर चलना मुश्किल हो गया है। अधिकांश बंदर मार्ग पर झुंड बनाकर बीच गोले पर बैठ जाते हैं। कभी-कभी बंदर मोटरसाइकिल चालकों पर हमला भी कर देते हैं।
बिजेंद्र सिंह का कहना है कि क्षेत्र में आम के बागों की संख्या बहुत है। बंदर आम की फसल तोड़कर बर्बाद करते हैं। बागों के ठेकेदार फसल नष्ट होने से बागों की फसल की कीमत कम करते जा रहे हैं। प्रशासन को इस समस्या का समाधान शीघ्र करना चाहिए।
बंदर को वन्यजीव धारी श्रेणी से निकाल दिया गया है। यह पहले पेड़ों के फल व पेड़ों की कोपल खाता था। लेकिन अब फलदार पौधे कम हो गए हैं इसलिए यह आबादी की ओर बढ़ गए हैं। वन विभाग ने जंगलों में कपीबंद व फलदार पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं, जिससे बंदर उन्हें खा सके। आबादी से इनकों पकड़ने के लिए योजना बनाई जा रही है। ....दुष्यंत कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी, चांदपुर
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गांव में स्कूली बच्चे बंदरों के डर से समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं। क्षेत्र में बंदरों की संख्या बढ़ने से आतंक बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण कई वर्षों से वन विभाग से बंदरों को पकड़कर वनों में छोड़ने की मांग कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से वंदरों को पकड़ने के लिए शीघ्र अभियान चला कर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
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पूर्व ग्राम प्रधान ममता राजपूत का कहना कि एक वर्ष के अंदर बंदरों के झुंड ने गांव में आधा दर्जन से अधिक ग्रामीणों को मकानों की छत से धक्का दिया। इससे नीचे गिरकर उनकी मौत हो गई। बंदरों के डर से ग्रामीण मकानों की छत पर कोई कार्य नहीं कर सकते हैं। अधिकारी भी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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किसान विजयपाल सिंह का कहना है कि क्षेत्र में बंदर किसानों की फसलों व खेतों में पेड़ पौधों बर्बाद कर रहे हैं। किसानों ने खेतों में दलहन व सब्जियों की फसलें उगानी बंद कर दी है। सरकार को ऐसी समस्या का समाधान शीघ्र करना चाहिए।
ग्राम प्रधान भैंसा राकेश कुमार ने बताया कि बंदरों की संख्या अधिक बढ़ जाने से मार्गो पर चलना मुश्किल हो गया है। अधिकांश बंदर मार्ग पर झुंड बनाकर बीच गोले पर बैठ जाते हैं। कभी-कभी बंदर मोटरसाइकिल चालकों पर हमला भी कर देते हैं।
बिजेंद्र सिंह का कहना है कि क्षेत्र में आम के बागों की संख्या बहुत है। बंदर आम की फसल तोड़कर बर्बाद करते हैं। बागों के ठेकेदार फसल नष्ट होने से बागों की फसल की कीमत कम करते जा रहे हैं। प्रशासन को इस समस्या का समाधान शीघ्र करना चाहिए।
बंदर को वन्यजीव धारी श्रेणी से निकाल दिया गया है। यह पहले पेड़ों के फल व पेड़ों की कोपल खाता था। लेकिन अब फलदार पौधे कम हो गए हैं इसलिए यह आबादी की ओर बढ़ गए हैं। वन विभाग ने जंगलों में कपीबंद व फलदार पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं, जिससे बंदर उन्हें खा सके। आबादी से इनकों पकड़ने के लिए योजना बनाई जा रही है। ....दुष्यंत कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी, चांदपुर