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Bijnor News: दस करोड़ में बना कॉमन फैसिलिटी सेंटर, दो साल से उद्घाटन का इंतजार

Wed, 05 Aug 2026 01:49 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:49 AM IST
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A common facility center built for ten crore rupees has been awaiting inauguration for two years.
नगीना। राह के पत्थर हटाने वाला कोई नहीं, मंजिल सामने है, मगर कारवां चल नहीं पा रहा। नगीना के विश्व प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से नगीना में स्थापित किया गया कॉमन फैसिलिटी सेंटर दो वर्षों से उद्घाटन की बाट जोह रहा है। भवन तैयार है, आधुनिक मशीनें भी स्थापित हैं, लेकिन प्रदूषण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू नहीं हो पा रही है।
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करीब दो वर्ष पूर्व नगीना में कोतवाली मार्ग पर सिटी डिग्री कॉलेज के पीछे कॉमन फैसिलिटी सेंटर का भवन बनकर तैयार हो चुका है। नगीना के हजारों हैंडीक्राफ्ट कारीगरों को इस सेंटर से आधुनिक तकनीक, डिजाइन विकास, मशीनों की सुविधा, गुणवत्ता परीक्षण और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी लेकिन यह सपना फिलहाल अधूरा ही है।
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प्रदूषण विभाग की शर्तों में उलझी परियोजना

कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित करने वाले देवदार एसोसिएशन के संचालक विपुल रस्तोगी बताते हैं कि प्रदूषण विभाग ने कॉमन फैसिलिटी सेंटर के संचालन के लिए कुछ औपचारिकताओं और मानकों को पूरा करने की शर्त रखी है। उनका कहना है कि विभाग के अधिकारी कहते हैं कि बराबर में एक कॉलेज संचालित हो रहा है, इसलिए अनापत्ति प्रमाण पत्र देना संभव नहीं है, जबकि केंद्र की स्थापना के समय भी बराबर में कॉलेज चल रहा था, तब ऐसी कोई शर्त नहीं बताई गई थी।
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कारीगरों को नहीं मिल पा रहा लाभ
यदि यह केंद्र शुरू हो जाए तो नगीना के लकड़ी शिल्प उद्योग को नई तकनीक और आधुनिक संसाधनों का लाभ मिलेगा। छोटे कारीगरों को महंगी मशीनें खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। लेकिन केंद्र के चालू नहीं होने से कारीगर इन सुविधाओं से वंचित हैं।
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अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी

स्थानीय उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने कारीगरों के हित में करोड़ों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक केंद्र बनवाया, लेकिन संबंधित विभागों के बीच समन्वय के अभाव में यह परियोजना उद्घाटन से पहले ही ठप पड़ी है। उनका आरोप है कि जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी भी इस मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं जबकि इस योजना में करीब नौ करोड़ रुपये सरकार द्वारा सब्सिडी दी गई है।

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कॉमन फैसिलिटी सेंटर के बराबर में डिग्री कॉलेज का संचालन हो रहा है। कॉलेज के बराबर में एनओसी देना संभव नहीं है। इस मामले में उच्च अधिकारियों से यहां की तकनीकी रिपोर्ट भेजकर निर्देश मांगे गए हैं। लखनऊ से निर्देश मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई होगी।
- गिरीश चंद्र आर्य, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजनौर
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