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कवाल के बवाल से खूब खिला कमल
Bijnor
Updated Sat, 17 May 2014 05:30 AM IST
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बिजनौर। बिजनौर व नगीना दोनों ही लोस क्षेत्रों में भाजपा रिकार्ड तोड़ मतों से चुनाव जीती तो वहीं नगीना सीट पर अप्रत्याशित नतीजे रहे। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे मुजफ्फरनगर दंगों के साथ-साथ मोदी लहर को वजह माना जा रहा है। बढ़ा मतदान भाजपा के पक्ष में ही हुआ। बहुसंख्यक मतों के ध्र्रुवीकरण और मुस्लिम मतों में बिखराव भी भाजपा के लिए जीत का बड़ा कारण बना है।
बिजनौर सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा व सपा के बीच ही रहा, जबकि शुरू से ही माना जा रहा था कि भाजपा व बसपा के बीच मुकाबला होगा। मुस्लिम मतदाता भाजपा को चुनाव हराने के लिए हाथी पर सवार हो सकते हैं, लेकिन सारे कयास गलत निकले। ज्यादातर मुस्लिम मतदाता सपा को ही मिले और बसपा का सारा खेल बिगड़ गया। बिजनौर सीट पर मुजफ्फरनगर दंगे का असर साफ दिखा। मुजफ्फरनगर जिले का कवाल गांव बिजनौर लोकसभा क्षेत्र की हिस्सा है। भाजपा प्रत्याशी भारतेंद्र सिंह शुरू से ही इस दंगे को भुनाने की कोशिश में लगे हुए थे। भाजपा से टिकट मिलने के बाद भारतेंद्र सिंह ने चुनाव अभियान भी कवाल गांव से शुरू किया था। दंगों के इस दांव में हाथी पस्त हो गया। मुस्लिम सपा के साथ जुड़ गए और बहुसंख्यक मतदाताओं का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में हो गया, जबकि सपा को मुस्लिमों के अलावा अन्य वोट कम ही मिले। बसपा प्रत्याशी मलूक नागर दलित, मुस्लिम व गुर्जर गठजोड़ के सहारे जीत का सब्जबाग देख रहे थे, लेकिन दंगा प्रभावित बिजनौर लोकसभा सीट पर उनका दांव फेल हो गया। बिजनौर क्षेत्र के पुरकाजी विस क्षेत्र में भाजपा को सर्वाधिक 99635 वोट मिले, मीरापुर में 95816 वोट, गुर्जर बहुल हस्तिनापुर में सबसे ज्यादा यानी 102425 वोट, बिजनौर लोकसभा के ही चांदपुर विस क्षेत्र में भाजपा को 91511 व बिजनौर विस क्षेत्र में 96238 वोट मिले हैं। दंगा प्रभावित पुरकाजी, मीरापुर व उसी क्षेत्र से सटे हस्तिनापुर में बिजनौर जिले के मुकाबले भाजपा को अधिक वोट मिले हैं। अहम बात ये है कि हस्तिनापुर विस क्षेत्र गुर्जर बहुल है, लेकिन यहां पर भी भाजपा को ऐतिहासिक मत मिले हैं और बसपा भाजपा के मुकाबले आधे मत भी हासिल नहीं कर पाई। दंगों की वजह से दलित मतदाता भी भी भाजपा को मिले हैं, जबकि मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव हो गया है। बिजनौर लोकसभा सीट पर करीब 12 से 13 प्रतिशत मतदान बढ़ा था। बढ़ा मतदान भी भाजपा के पक्ष में ही गया। बहरहाल भाजपा के लिए मुजफ्फरनगर दंगा, मुस्लिम मतोें में बिखराव, बढ़ा मतदान इस बड़ी जीत में फायदेमंद रहे।
प्रमोशन में आरक्षण बिल को फाड़ना पड़ा यशवीर को महंगा
बिजनौर। आरक्षित नगीना लोकसभा सीट पर निवर्तमान सांसद यशवीर सिंह की हार से सपा को करारा झटका लगा है। सपा का पूरा फोकस नगीना सीट पर था। मतदान के बाद भी नगीना में सपा को अपर हैंड माना जा रहा था, लेकिन यहां पर भी साइकिल नहीं दौड़ पाई। भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह ने नगीना लोकसभा सीट पर 90 हजार से भी अधिक मतों से सपा को शिकस्त दे दी। सपा की हार के पीछे प्रमोशन में आरक्षण बिल को बड़ी वजह माना जा रहा है। दरअसल नगीना के निवर्तमान सांसद व सपा प्रत्याशी यशवीर सिंह ने संसद में प्रमोशन में आरक्षण बिल की कॉपी फाड़ दी थी, तभी से दलित वर्ग इनसे नाराज था। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पिछड़े व सवर्ण भी सपा से नाराज हो गये। यानी सपा प्रत्याशी यशवीर सिंह को न तो दलित ही मिल पाए और न ही पिछड़े व सवर्ण। नगीना सीट पर 40 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, मगर इनमें भी बिखराव हो गया। भाजपा रोको मुहिम के तहत बड़ी संख्या में मुस्लिम भी बसपा को मिले, लेकिन काफी संख्या में दलित भाजपा पर चले गए। मतगणना हुई तो सभी भौचक्के रह गये। बहरहाल प्रमोशन बिल में आरक्षण की कॉपी फाड़ना, मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव, मुजफ्फरनगर दंगा सपा की हार का कारण बना है।
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बिजनौर सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा व सपा के बीच ही रहा, जबकि शुरू से ही माना जा रहा था कि भाजपा व बसपा के बीच मुकाबला होगा। मुस्लिम मतदाता भाजपा को चुनाव हराने के लिए हाथी पर सवार हो सकते हैं, लेकिन सारे कयास गलत निकले। ज्यादातर मुस्लिम मतदाता सपा को ही मिले और बसपा का सारा खेल बिगड़ गया। बिजनौर सीट पर मुजफ्फरनगर दंगे का असर साफ दिखा। मुजफ्फरनगर जिले का कवाल गांव बिजनौर लोकसभा क्षेत्र की हिस्सा है। भाजपा प्रत्याशी भारतेंद्र सिंह शुरू से ही इस दंगे को भुनाने की कोशिश में लगे हुए थे। भाजपा से टिकट मिलने के बाद भारतेंद्र सिंह ने चुनाव अभियान भी कवाल गांव से शुरू किया था। दंगों के इस दांव में हाथी पस्त हो गया। मुस्लिम सपा के साथ जुड़ गए और बहुसंख्यक मतदाताओं का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में हो गया, जबकि सपा को मुस्लिमों के अलावा अन्य वोट कम ही मिले। बसपा प्रत्याशी मलूक नागर दलित, मुस्लिम व गुर्जर गठजोड़ के सहारे जीत का सब्जबाग देख रहे थे, लेकिन दंगा प्रभावित बिजनौर लोकसभा सीट पर उनका दांव फेल हो गया। बिजनौर क्षेत्र के पुरकाजी विस क्षेत्र में भाजपा को सर्वाधिक 99635 वोट मिले, मीरापुर में 95816 वोट, गुर्जर बहुल हस्तिनापुर में सबसे ज्यादा यानी 102425 वोट, बिजनौर लोकसभा के ही चांदपुर विस क्षेत्र में भाजपा को 91511 व बिजनौर विस क्षेत्र में 96238 वोट मिले हैं। दंगा प्रभावित पुरकाजी, मीरापुर व उसी क्षेत्र से सटे हस्तिनापुर में बिजनौर जिले के मुकाबले भाजपा को अधिक वोट मिले हैं। अहम बात ये है कि हस्तिनापुर विस क्षेत्र गुर्जर बहुल है, लेकिन यहां पर भी भाजपा को ऐतिहासिक मत मिले हैं और बसपा भाजपा के मुकाबले आधे मत भी हासिल नहीं कर पाई। दंगों की वजह से दलित मतदाता भी भी भाजपा को मिले हैं, जबकि मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव हो गया है। बिजनौर लोकसभा सीट पर करीब 12 से 13 प्रतिशत मतदान बढ़ा था। बढ़ा मतदान भी भाजपा के पक्ष में ही गया। बहरहाल भाजपा के लिए मुजफ्फरनगर दंगा, मुस्लिम मतोें में बिखराव, बढ़ा मतदान इस बड़ी जीत में फायदेमंद रहे।
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प्रमोशन में आरक्षण बिल को फाड़ना पड़ा यशवीर को महंगा
बिजनौर। आरक्षित नगीना लोकसभा सीट पर निवर्तमान सांसद यशवीर सिंह की हार से सपा को करारा झटका लगा है। सपा का पूरा फोकस नगीना सीट पर था। मतदान के बाद भी नगीना में सपा को अपर हैंड माना जा रहा था, लेकिन यहां पर भी साइकिल नहीं दौड़ पाई। भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह ने नगीना लोकसभा सीट पर 90 हजार से भी अधिक मतों से सपा को शिकस्त दे दी। सपा की हार के पीछे प्रमोशन में आरक्षण बिल को बड़ी वजह माना जा रहा है। दरअसल नगीना के निवर्तमान सांसद व सपा प्रत्याशी यशवीर सिंह ने संसद में प्रमोशन में आरक्षण बिल की कॉपी फाड़ दी थी, तभी से दलित वर्ग इनसे नाराज था। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पिछड़े व सवर्ण भी सपा से नाराज हो गये। यानी सपा प्रत्याशी यशवीर सिंह को न तो दलित ही मिल पाए और न ही पिछड़े व सवर्ण। नगीना सीट पर 40 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, मगर इनमें भी बिखराव हो गया। भाजपा रोको मुहिम के तहत बड़ी संख्या में मुस्लिम भी बसपा को मिले, लेकिन काफी संख्या में दलित भाजपा पर चले गए। मतगणना हुई तो सभी भौचक्के रह गये। बहरहाल प्रमोशन बिल में आरक्षण की कॉपी फाड़ना, मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव, मुजफ्फरनगर दंगा सपा की हार का कारण बना है।
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