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गन्ने की एक ही प्रजाति का रकबा 97 प्रतिशत
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गन्ने की एक ही प्रजाति का रकबा 97 प्रतिशत
बिजनौर। जिले के किसान गन्ने की खेती के लिए पूरी तरह 0238 प्रजाति पर निर्भर होते जा रहे हैं। किसान किसी दूसरी प्रजाति को खेतों में बोना नहीं चाहते। यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। किसी भी जिले में एक ही प्रजाति के गन्ने का रकबा 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर किसी गन्ने का रकबा 60 प्रतिशत से अधिक है तो इसे शासन भी गंभीर हालत मानता है। अगर किसी वजह से गन्ने की प्रजाति में बीमारी आ जाती है तो पूरे जिले की फसल बर्बाद हो सकती है।
गन्ना वेस्ट यूपी के किसानों की मुख्य फसल है। किसान पहले सामान्य प्रजाति का गन्ना बोते थे, लेकिन अब अगेती प्रजाति का गन्ना बो रहे हैं। छह सात साल पहले तक जहां जिले में रिजेक्ट व सामान्य प्रजाति का गन्ने का रकबा 50 प्रतिशत से अधिक रहता था, वह अब एक प्रतिशत भी नहीं है। इस समय जिले में दो लाख 47 हजार 491 हेक्टेयर गन्ना खड़ा है। इसमें रिजेक्ट प्रजाति का रकबा शून्य हो चुका है। सामान्य प्रजाति का गन्ना भी 141 हेक्टेयर में ही खड़ा है। अगेती प्रजाति में किसानों ने केवल 0238 प्रजाति को ही पकड़ लिया है। किसान किसी और प्रजाति को अपनाने को तैयार नहीं हैं। जिले में दो लाख 41 हजार 50 हेक्टेयर जमीन में केवल 0236 प्रजाति का ही गन्ना खड़ा है, जो कुल रकबे का 97.48 प्रतिशत है। पिछले साल 0238 का रकबा 96 प्रतिशत था। अगर यही हाल रहा तो अगले साल तक यह प्रजाति बाकी सब प्रजातियों को खत्म कर देगी। जबकि कई और अगेती प्रजाति का गन्ना भी अच्छी पैदावार दे रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में एक ही प्रजाति का गन्ना 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। क्योंकि यदि इस प्रजाति में कोई बीमारी आती है तो पूरे क्षेत्र की फसल बर्बाद हो सकती है।
चीनी मिल पैड़ी रकबा पौधा रकबा
बिजनौर 4394 3387
धामपुर 26967 21642
स्योहारा 21085 16970
नजीबाबाद 7878 8417
बुंदकी 15731 14108
चांदपुर 8489 6723
बिलाई 14738 13865
बरकातपुर 16166 12549
बहादरपुर 14106 14923
धनौरा 2575 2375
खाईखेड़ी 204 179
कुल 132333 115138
नोट:आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
यह है रकबा बढ़ने की वजह
0238 प्रजाति ने गन्ने की खेती को बदल दिया है। रेतीली जमीन में जहां केवल गेहूं और चारे की फसल होती थी वहां भी इसकी अच्छी पैदावार निकल रही है। इसके अलावा किसानों ने बाकी फसलों के मुकाबले गन्ने की खेती को ही चुना है। जो किसान पहली बार या कई साल बाद गन्ने की खेती करते हैं वे 0238 प्रजाति को ही बोते हैं।
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अन्य प्रजाति का गन्ना भी बोएं किसान : जिला गन्ना अधिकारी
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह का कहना है कि किसानों को एक ही प्रजाति के गन्ने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। किसान बाकी अगेती प्रजाति में दूसरे गन्ने भी बोएं। एक ही प्रजाति बोने से किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।
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बिजनौर। जिले के किसान गन्ने की खेती के लिए पूरी तरह 0238 प्रजाति पर निर्भर होते जा रहे हैं। किसान किसी दूसरी प्रजाति को खेतों में बोना नहीं चाहते। यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। किसी भी जिले में एक ही प्रजाति के गन्ने का रकबा 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर किसी गन्ने का रकबा 60 प्रतिशत से अधिक है तो इसे शासन भी गंभीर हालत मानता है। अगर किसी वजह से गन्ने की प्रजाति में बीमारी आ जाती है तो पूरे जिले की फसल बर्बाद हो सकती है।
गन्ना वेस्ट यूपी के किसानों की मुख्य फसल है। किसान पहले सामान्य प्रजाति का गन्ना बोते थे, लेकिन अब अगेती प्रजाति का गन्ना बो रहे हैं। छह सात साल पहले तक जहां जिले में रिजेक्ट व सामान्य प्रजाति का गन्ने का रकबा 50 प्रतिशत से अधिक रहता था, वह अब एक प्रतिशत भी नहीं है। इस समय जिले में दो लाख 47 हजार 491 हेक्टेयर गन्ना खड़ा है। इसमें रिजेक्ट प्रजाति का रकबा शून्य हो चुका है। सामान्य प्रजाति का गन्ना भी 141 हेक्टेयर में ही खड़ा है। अगेती प्रजाति में किसानों ने केवल 0238 प्रजाति को ही पकड़ लिया है। किसान किसी और प्रजाति को अपनाने को तैयार नहीं हैं। जिले में दो लाख 41 हजार 50 हेक्टेयर जमीन में केवल 0236 प्रजाति का ही गन्ना खड़ा है, जो कुल रकबे का 97.48 प्रतिशत है। पिछले साल 0238 का रकबा 96 प्रतिशत था। अगर यही हाल रहा तो अगले साल तक यह प्रजाति बाकी सब प्रजातियों को खत्म कर देगी। जबकि कई और अगेती प्रजाति का गन्ना भी अच्छी पैदावार दे रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में एक ही प्रजाति का गन्ना 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। क्योंकि यदि इस प्रजाति में कोई बीमारी आती है तो पूरे क्षेत्र की फसल बर्बाद हो सकती है।
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चीनी मिल पैड़ी रकबा पौधा रकबा
बिजनौर 4394 3387
धामपुर 26967 21642
स्योहारा 21085 16970
नजीबाबाद 7878 8417
बुंदकी 15731 14108
चांदपुर 8489 6723
बिलाई 14738 13865
बरकातपुर 16166 12549
बहादरपुर 14106 14923
धनौरा 2575 2375
खाईखेड़ी 204 179
कुल 132333 115138
नोट:आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
यह है रकबा बढ़ने की वजह
0238 प्रजाति ने गन्ने की खेती को बदल दिया है। रेतीली जमीन में जहां केवल गेहूं और चारे की फसल होती थी वहां भी इसकी अच्छी पैदावार निकल रही है। इसके अलावा किसानों ने बाकी फसलों के मुकाबले गन्ने की खेती को ही चुना है। जो किसान पहली बार या कई साल बाद गन्ने की खेती करते हैं वे 0238 प्रजाति को ही बोते हैं।
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अन्य प्रजाति का गन्ना भी बोएं किसान : जिला गन्ना अधिकारी
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह का कहना है कि किसानों को एक ही प्रजाति के गन्ने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। किसान बाकी अगेती प्रजाति में दूसरे गन्ने भी बोएं। एक ही प्रजाति बोने से किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।