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Bijnor News: 85 के मोखा, 65 की नूर, दोनों ने निकाह किया मंजूर
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85 साल की उम्र में निकाह करने वाले मोखा शाह।
संवाद न्यूज एजेंसी
बरूकी (बिजनौर)। उम्र के अंतिम पड़ाव में घर संभालने की मजबूरी 85 वर्षीय मोखा शाह और 65 साल की नूरजहां को करीब ले आई। दोनों ने करीब 15 दिन पूर्व निकाह कर लिया। मोखा के परिवार ने भी इस निकाह में शामिल होकर रजामंदी दी जबकि नूरजहां के परिवारवालों ने भी कोई एतराज नहीं किया।
मोखा शाह गांव गनौरा के निवासी हैं। उनकी पत्नी की मौत करीब चार साल पहले हो गई थी। तीन में से दो बेटे अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ रहते हैं, जबकि एक बेटा उनके पास रहता है। गांव में रह रहा बेटा एक हादसे में जल गया था। उसकी पत्नी बच्चों को लेकर चली गई है। पिता-पुत्र खाना बनाने और घर संभालने से परेशान थे। कुछ दिन पूर्व मोखा के समधी ने उनके सामने जलालाबाद निवासी नूरजहां से निकाह का प्रस्ताव रखा। नूरजहां के बेटे भी बाहर रहते हैं। वह भी अपनी गुजर-बसर को लेकर परेशान थी।
दोनों ने रजामंद होकर 15 दिसंबर को निकाह कर लिया। इस निकाह में मोखा का तो पूरा पIरिवार शामिल हुआ, जबकि नूरजहां के परिवार वाले नहीं थे। हालांकि उन्होंने भी कोई खास विरोध नहीं जताया। गांव के ही मौलवी ने यह निकाह कराया। मोखा का कहना है कि वह और उनका बेटा खाना बनाने और घर संभालने को लेकर परेशान थे। उनके निकाह करने से यह समस्या हल हो गई है। साथ ही नूरजहां को भी सहारा मिल गया है।
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बरूकी (बिजनौर)। उम्र के अंतिम पड़ाव में घर संभालने की मजबूरी 85 वर्षीय मोखा शाह और 65 साल की नूरजहां को करीब ले आई। दोनों ने करीब 15 दिन पूर्व निकाह कर लिया। मोखा के परिवार ने भी इस निकाह में शामिल होकर रजामंदी दी जबकि नूरजहां के परिवारवालों ने भी कोई एतराज नहीं किया।
मोखा शाह गांव गनौरा के निवासी हैं। उनकी पत्नी की मौत करीब चार साल पहले हो गई थी। तीन में से दो बेटे अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ रहते हैं, जबकि एक बेटा उनके पास रहता है। गांव में रह रहा बेटा एक हादसे में जल गया था। उसकी पत्नी बच्चों को लेकर चली गई है। पिता-पुत्र खाना बनाने और घर संभालने से परेशान थे। कुछ दिन पूर्व मोखा के समधी ने उनके सामने जलालाबाद निवासी नूरजहां से निकाह का प्रस्ताव रखा। नूरजहां के बेटे भी बाहर रहते हैं। वह भी अपनी गुजर-बसर को लेकर परेशान थी।
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दोनों ने रजामंद होकर 15 दिसंबर को निकाह कर लिया। इस निकाह में मोखा का तो पूरा पIरिवार शामिल हुआ, जबकि नूरजहां के परिवार वाले नहीं थे। हालांकि उन्होंने भी कोई खास विरोध नहीं जताया। गांव के ही मौलवी ने यह निकाह कराया। मोखा का कहना है कि वह और उनका बेटा खाना बनाने और घर संभालने को लेकर परेशान थे। उनके निकाह करने से यह समस्या हल हो गई है। साथ ही नूरजहां को भी सहारा मिल गया है।
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