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एजेंसी संचालकों की लापरवाही से किसान यंत्रों पर सब्सिडी से हुए वंचित
Updated Sun, 18 Nov 2018 12:40 AM IST
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एजेंसी संचालकों की लापरवाही से नहीं मिली सब्सिडी
बिजनौर। कृषि यंत्रों की एजेंसी चलाने वालों की वजह से किसान कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी से वंचित रह गए। एजेंसी संचालकों ने किसानों के यंत्रों की एडवांस बुकिंग तो कर दी, लेकिन समय से यंत्र उपलब्ध नहीं कराए। सत्यापन में किसानों के घर पर कृषि यंत्र नहीं मिले। इन किसानों को सब्सिडी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।
किसान खेतों में फसलों के अवशेषों (जड़, पत्ती, तना) आदि को जला देते हैं। इससे पर्यावरण तो प्रदूषित होता ही है, मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी खत्म होती है। इन अवशेषों को जोतकर खेत में खाद बनाया जाए तो यह मिट्टी को उर्वरक बनाते हैं। फसल के अवशेषों को जोतकर मिट्टी में मिलाने के लिए कृषि विभाग की ओर से कृषि यंत्रों पर अनुदान की घोषणा की गई थी। कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा था। नियम के अनुसार किसान शासन द्वारा नामित कंपनी के कृषि यंत्र खरीदकर उपनिदेशक कृषि विभाग में सब्सिडी के लिए आवेदन करते हैं। आवेदन के समय किसान को यंत्र खरीदने के शपथ पत्र के साथ साथ संबंधित एजेंसी के यंत्र खरीद के पक्के बिल भी जमा करने थे। अंतिम तिथि छह नवंबर तक 799 किसानों ने सब्सिडी के लिए आवेदन किया।
विभाग द्वारा किसानों के घर जाकर कृषि यंत्रों का भौतिक सत्यापन किया गया तो 35 प्रतिशत से अधिक किसानों के यहां पर कृषि यंत्र नहीं मिले। जांच में पता चला कि इन किसानों के कृषि यंत्रों की एजेंसी संचालकों ने एडवांस बुकिंग कर दी थी। किसानों को एजेंसी से यंत्र खरीद के पक्के बिल भी दे दिए थे, लेकिन समय से यंत्रों की सप्लाई नहीं की गई। जांच में किसानों के यहां कृषि यंत्र नहीं मिलने पर इन्हें सब्सिडी की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। अब इन किसानों को सब्सिडी नहीं मिलेगी। उपनिदेशक कृषि जेपी चौधरी के अनुसार सत्यापन में काफी किसानों के यहां कृषि यंत्र नहीं मिले हैं। जिन किसानों के पास कृषि यंत्र नहीं मिले, फिलहाल उन्हें सब्सिडी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।
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बिजनौर। कृषि यंत्रों की एजेंसी चलाने वालों की वजह से किसान कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी से वंचित रह गए। एजेंसी संचालकों ने किसानों के यंत्रों की एडवांस बुकिंग तो कर दी, लेकिन समय से यंत्र उपलब्ध नहीं कराए। सत्यापन में किसानों के घर पर कृषि यंत्र नहीं मिले। इन किसानों को सब्सिडी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।
किसान खेतों में फसलों के अवशेषों (जड़, पत्ती, तना) आदि को जला देते हैं। इससे पर्यावरण तो प्रदूषित होता ही है, मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी खत्म होती है। इन अवशेषों को जोतकर खेत में खाद बनाया जाए तो यह मिट्टी को उर्वरक बनाते हैं। फसल के अवशेषों को जोतकर मिट्टी में मिलाने के लिए कृषि विभाग की ओर से कृषि यंत्रों पर अनुदान की घोषणा की गई थी। कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा था। नियम के अनुसार किसान शासन द्वारा नामित कंपनी के कृषि यंत्र खरीदकर उपनिदेशक कृषि विभाग में सब्सिडी के लिए आवेदन करते हैं। आवेदन के समय किसान को यंत्र खरीदने के शपथ पत्र के साथ साथ संबंधित एजेंसी के यंत्र खरीद के पक्के बिल भी जमा करने थे। अंतिम तिथि छह नवंबर तक 799 किसानों ने सब्सिडी के लिए आवेदन किया।
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विभाग द्वारा किसानों के घर जाकर कृषि यंत्रों का भौतिक सत्यापन किया गया तो 35 प्रतिशत से अधिक किसानों के यहां पर कृषि यंत्र नहीं मिले। जांच में पता चला कि इन किसानों के कृषि यंत्रों की एजेंसी संचालकों ने एडवांस बुकिंग कर दी थी। किसानों को एजेंसी से यंत्र खरीद के पक्के बिल भी दे दिए थे, लेकिन समय से यंत्रों की सप्लाई नहीं की गई। जांच में किसानों के यहां कृषि यंत्र नहीं मिलने पर इन्हें सब्सिडी की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। अब इन किसानों को सब्सिडी नहीं मिलेगी। उपनिदेशक कृषि जेपी चौधरी के अनुसार सत्यापन में काफी किसानों के यहां कृषि यंत्र नहीं मिले हैं। जिन किसानों के पास कृषि यंत्र नहीं मिले, फिलहाल उन्हें सब्सिडी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।
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