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संतान की दीर्घायु के लिए किया अहोई अष्टमी व्रत
Updated Thu, 01 Nov 2018 12:05 AM IST
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बिजनौर। संतान की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए महिलाओं ने अहोई अष्टमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया। महिलाओं ने व्रत रखे और माता अहोई की पूजा-अर्चना के बाद तारे के दर्शन कर व्रत खोले। इस अवसर पर घरों में पकवान बनाए गए।
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाने वाले अहोई अष्टमी पर्व पर महिलाएं अपने बच्चों की सलामती के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत करने से अहोई माता प्रसन्न होकर बच्चों की सलामती का आशीर्वाद देती हैं। बुधवार को अहोई अष्टमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर माताओं ने मिट्टी के बर्तनों को धन-धान्य से भरकर घरों में स्थापित किया। महिलाओं ने मिट्टी के करवे आदि जल से भरकर रखे। उन पर रोली से तिलक और चावल लगाया और करवों में अहोई पहनाई गई। इसके बाद मीठे पुओं और फलों से अहोई माता की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने सामूहिक रूप से घरों में बैठकर अहोई माता की कथा सुनी और चरण स्पर्श कर बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। बच्चों ने पूए और फल आदि खाकर माताओं के चरण स्पर्श दीर्घायु होने का आशीर्वाद लिया। रात को तारे निकलने के बाद महिलाओं द्वारा जल चढ़ाकर व्रत खोला गया। घरों में बने पकवान का सभी ने आनंद लिया।
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कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाने वाले अहोई अष्टमी पर्व पर महिलाएं अपने बच्चों की सलामती के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत करने से अहोई माता प्रसन्न होकर बच्चों की सलामती का आशीर्वाद देती हैं। बुधवार को अहोई अष्टमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर माताओं ने मिट्टी के बर्तनों को धन-धान्य से भरकर घरों में स्थापित किया। महिलाओं ने मिट्टी के करवे आदि जल से भरकर रखे। उन पर रोली से तिलक और चावल लगाया और करवों में अहोई पहनाई गई। इसके बाद मीठे पुओं और फलों से अहोई माता की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने सामूहिक रूप से घरों में बैठकर अहोई माता की कथा सुनी और चरण स्पर्श कर बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। बच्चों ने पूए और फल आदि खाकर माताओं के चरण स्पर्श दीर्घायु होने का आशीर्वाद लिया। रात को तारे निकलने के बाद महिलाओं द्वारा जल चढ़ाकर व्रत खोला गया। घरों में बने पकवान का सभी ने आनंद लिया।
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