{"_id":"5ae0cc354f1c1b6e098b656e","slug":"71524681781-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्रों को स्कूल लाने में छूट रहे पसीने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्रों को स्कूल लाने में छूट रहे पसीने
Updated Thu, 26 Apr 2018 12:16 AM IST
विज्ञापन
छात्रों को स्कूल लाने में छूट रहे पसीने
बिजनौर। गेहूं की कटाई के चलते परिषदीय स्कूलों में बच्चों को स्कूल तक लाने में शिक्षकों को पसीना बहाना पड़ रहा है। स्कूलों छात्रों की उपस्थिति कम होने से शिक्षक परेशान हैं। गेहूं की कटाई से बेसिक शिक्षा पूरी तरह से प्रभावित हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई जोरो पर चल रही है। इसके चलते परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम है। बच्चों को स्कूलों में लाने के लिए शिक्षक अभिभावकों के घरों पर जा रहे हैं। पर अभिभावक नहीं मिलते। छात्र अपने छोटे भाई बहिनों के साथ घर पर मिलते हैं। जो उनकी देखभाल में लगे हैं। बच्चो से शिक्षक पता करते हैं तो कहते है कि खेतों में कटाई हो रही है। इसके बाद भी वह स्कूल आएंगे। सर्व शिक्षा अभियान के तहत नामांकन भी हो रहा है। अभिभावकों के गेहूं कटाई में लगे होने से नामांकन भी प्रभावित रहा है। बुधवार को डीएम के निर्देश पर जिले के कई अधिकारियों ने स्कूलों में छापे मारे। पर काफी स्कूल ऐसे पाए गए जिनमें छात्रों की संख्या कम थी। इसके पीछे गेहूं की कटाई बताई जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 10 मई के बाद ही बढे़गी। इस बीच गेहूं की कटाई पूरी हो जाएगी। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे किसानों के हैं। बच्चों के माता पिता गेहूं की कटाई कर पूरे वर्ष के लिए अनाज एकत्रित करने में लगे रहते हैं। जो छोटे बच्चों का भी सहारा लेते हैं। उधर, बीएसए महेश चंद ने शिक्षकों से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर ध्यान देने को कहा है।
विज्ञापन
बिजनौर। गेहूं की कटाई के चलते परिषदीय स्कूलों में बच्चों को स्कूल तक लाने में शिक्षकों को पसीना बहाना पड़ रहा है। स्कूलों छात्रों की उपस्थिति कम होने से शिक्षक परेशान हैं। गेहूं की कटाई से बेसिक शिक्षा पूरी तरह से प्रभावित हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई जोरो पर चल रही है। इसके चलते परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम है। बच्चों को स्कूलों में लाने के लिए शिक्षक अभिभावकों के घरों पर जा रहे हैं। पर अभिभावक नहीं मिलते। छात्र अपने छोटे भाई बहिनों के साथ घर पर मिलते हैं। जो उनकी देखभाल में लगे हैं। बच्चो से शिक्षक पता करते हैं तो कहते है कि खेतों में कटाई हो रही है। इसके बाद भी वह स्कूल आएंगे। सर्व शिक्षा अभियान के तहत नामांकन भी हो रहा है। अभिभावकों के गेहूं कटाई में लगे होने से नामांकन भी प्रभावित रहा है। बुधवार को डीएम के निर्देश पर जिले के कई अधिकारियों ने स्कूलों में छापे मारे। पर काफी स्कूल ऐसे पाए गए जिनमें छात्रों की संख्या कम थी। इसके पीछे गेहूं की कटाई बताई जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 10 मई के बाद ही बढे़गी। इस बीच गेहूं की कटाई पूरी हो जाएगी। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे किसानों के हैं। बच्चों के माता पिता गेहूं की कटाई कर पूरे वर्ष के लिए अनाज एकत्रित करने में लगे रहते हैं। जो छोटे बच्चों का भी सहारा लेते हैं। उधर, बीएसए महेश चंद ने शिक्षकों से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर ध्यान देने को कहा है।
विज्ञापन