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काष्ठकला में बनीं लकड़ी की टाइल्स
Updated Sun, 04 Mar 2018 11:48 PM IST
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बिजनौर। जिले की काष्ठकला के नायाब नमूने लकड़ी की बनी टाइल्स देशभर में मशहूर हो रही हैं। पहाड़ी राज्यों में इन टाइल्स की बहुत डिमांड है। पांच सितारा होटलों में ये टाइल्स व पाए लगाए जा रहे हैं। लकड़ी की टाइल्स की मांग बढ़ने से जिले की काष्ठ कला और मशहूर हो रही है।
जिले की काष्ठकला की प्रसिद्धि विदेशों तक है। जिले की काष्ठकला के अंतर्गत बना माल विदेशों को भी निर्यात होता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक उत्पाद में भी जिले की काष्ठकला को चुना गया है। जिले की काष्ठकला से बने फर्नीचर, सजावट के आइटम व आभूषण की विदेशों तक में खूब मांग है। अब जिले में बनी लकड़ी की टाइल्स की भी बहुत मांग हो रही है। लकड़ी की टाइल्स देशभर के शहरों में जा रही हैं। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में इनकी बहुत डिमांड है। लकड़ी से बनीं ये टाइल्स कश्मीर तक भेजी जा रही हैं। इसके अलावा सीढ़ियों की रेलिंग के लकड़ी से बने पाए लगाने का चलन भी बढ़ रहा है। ये पाए भी जिले में ही बन रहे हैं।
लकड़ी की टाइल्स बनाने वाले उद्यमी रोशन बिलाल के अनुसार पत्थर की टाइल्स की तरह लकड़ी की टाल्स दीवार, छत, यहां तक कि फर्श में भी लगाई जा सकती हैं। इसके अलावा समंदर के पास वाले पॉश इलाकों में भी लकड़ी की ये टाइल्स लगाई जाती हैं। वहां पर लोहा नमी भरी समुद्री हवा से खराब हो जाता है। ये टाइल्स काफी समय तक चलती हैं व खराब नहीं होती हैं।
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पहाड़ी क्षेत्र में लकड़ी से बनी टाइल्स लगाने का वैज्ञानिक महत्व भी है। वहां सर्दी का मौसम अधिक रहता है। ऐसे में मकान को गर्म रखना चुनौती रहता है। लकड़ी ऊष्मा की कुचालक होती है। अगर मकान को आग जलाकर या हीटर से गर्म कर लिया जाए और मकान में लकड़ी की टाइल्स लगी हों तो वह गर्मी को मकान के बाहर नहीं जाने देगी।
लकड़ी की टाइल्स बनाने में खास पेड़ों की लकड़ी इस्तेमाल की जाती हैं। ये लकड़ी साउथ अमेरिका, कनाडा, यूरोप आदि से मंगाई जाती है।
उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा के अनुसार जिले की काष्ठकला बड़ा बाजार बनती जा रही है। इससे युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
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जिले की काष्ठकला की प्रसिद्धि विदेशों तक है। जिले की काष्ठकला के अंतर्गत बना माल विदेशों को भी निर्यात होता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक उत्पाद में भी जिले की काष्ठकला को चुना गया है। जिले की काष्ठकला से बने फर्नीचर, सजावट के आइटम व आभूषण की विदेशों तक में खूब मांग है। अब जिले में बनी लकड़ी की टाइल्स की भी बहुत मांग हो रही है। लकड़ी की टाइल्स देशभर के शहरों में जा रही हैं। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में इनकी बहुत डिमांड है। लकड़ी से बनीं ये टाइल्स कश्मीर तक भेजी जा रही हैं। इसके अलावा सीढ़ियों की रेलिंग के लकड़ी से बने पाए लगाने का चलन भी बढ़ रहा है। ये पाए भी जिले में ही बन रहे हैं।
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लकड़ी की टाइल्स बनाने वाले उद्यमी रोशन बिलाल के अनुसार पत्थर की टाइल्स की तरह लकड़ी की टाल्स दीवार, छत, यहां तक कि फर्श में भी लगाई जा सकती हैं। इसके अलावा समंदर के पास वाले पॉश इलाकों में भी लकड़ी की ये टाइल्स लगाई जाती हैं। वहां पर लोहा नमी भरी समुद्री हवा से खराब हो जाता है। ये टाइल्स काफी समय तक चलती हैं व खराब नहीं होती हैं।
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पहाड़ी क्षेत्र में लकड़ी से बनी टाइल्स लगाने का वैज्ञानिक महत्व भी है। वहां सर्दी का मौसम अधिक रहता है। ऐसे में मकान को गर्म रखना चुनौती रहता है। लकड़ी ऊष्मा की कुचालक होती है। अगर मकान को आग जलाकर या हीटर से गर्म कर लिया जाए और मकान में लकड़ी की टाइल्स लगी हों तो वह गर्मी को मकान के बाहर नहीं जाने देगी।
लकड़ी की टाइल्स बनाने में खास पेड़ों की लकड़ी इस्तेमाल की जाती हैं। ये लकड़ी साउथ अमेरिका, कनाडा, यूरोप आदि से मंगाई जाती है।
उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा के अनुसार जिले की काष्ठकला बड़ा बाजार बनती जा रही है। इससे युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है।