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गन्ने की दुर्गति

Thu, 29 Mar 2018 11:04 PM IST
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:04 PM IST
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गन्ने की दुर्गति
बिजनौर । गन्ने के बंपर उत्पादन व चीनी मिलों की बेरुखी ने गन्ने की दुर्गति कर दी है। संकट के समय किसानों के साथी माने जाने वाले कोल्हुओं पर गन्ने के दाम 190 से 230 रुपये प्रति क्विंटल तक है, जबकि सीजन की आखिरी में कोल्हुओं पर गन्ने के दाम मिलों के रेट के बराबर तक होते थे। इतनी कम कीमत पर भी किसान कोल्हुओं व क्रेशरों पर गन्ना बेचने को मजबूर हैं।
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जिले में गन्ने की बंपर पैदावार हुई है। चार साल पहले तक नौ प्रतिशत रहने वाली रिकवरी अब बढ़कर 13 प्रतिशत तक जा पहुंची है। इससे चीनी के साथ साथ गुड़ के दाम भी धड़ाम हुए हैं। गुड़ जहां सीजन की शुरुआत में 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था, अब गुड़ के दाम करीब 2400 रुपये प्रति क्विंटल ही रह गए हैं। चीनी के साथ जिले में गुड़ का भी बंपर उत्पादन हुआ। शुरुआत में कोल्हुओं पर गन्ने का दाम 280 रुपये प्रति क्विंटल तक थे। गुड़ के दाम कम होने से गन्ने के दामों में कमी आना भी लाजिमी है। गुड़ के बंपर उत्पादन से काफी कोल्हू जनवरी में ही बंद हो गए थे। जो थोड़े बहुत चल रहे हैं, उन पर गन्ना 180 से 230 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा जा रहा है। इसे गन्ने की दुर्गति ही कहा जाएगा कि किसान इतनी कम कीमत पर भी गन्ना बेचने को मजबूर हैं। वजह है पहले से ज्यादा उत्पादन और मिलों द्वारा समय से गन्ना पर्ची न देना। सरकार द्वारा गन्ने का मूल्य 325 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन समय से खेत खाली करने के लिए किसान बहुत कम कीमत पर गन्ना बेच रहे हैं।
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पसंद बन गई मजबूरी
खेत से गन्ना खत्म करके गेहूं बोना हो या घर का खर्च चलाने के लिए नगद गन्ना बेचना हो, कोल्हू व क्रेशर किसानों की पहली पसंद है। जिले में एक हजार कोल्हू व 70 क्रेशर हैं। एक कोल्हू पर प्रतिदिन करीब 100 कुंतल गन्ने व क्रेशर पर करीब एक हजार कुंतल गन्ने की पेराई रोज होती है। कोल्हू व क्रेशर दोनों को मिलाकर रोजाना करीब डेढ़ लाख कुंतल गन्ने की पेराई होती है।
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साल गन्ना उत्पादन
2013-14 660
2014-15 700
2015-16 746
2016-17 891
2017-18 815 अब तक
नोट:उक्त आंकड़े जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से लिए गए हैं।

मिलों की क्षमता अपेक्षाकृत नहीं बढ़ी
भाकियू प्रदेश महासचिव रामअवतार सिंह व जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार प्रशासन ने गन्ने का उत्पादन तो बढ़वा लिया लेकिन शुगर मिलों की क्षमता उस अनुपात में नहीं बढ़ाई। जिले के किसान धैर्य रखें। जब तक एक एक किसान के खेत में खड़ा गन्ना खत्म नहीं होगा कोई मिल बंद नहीं होगी। ऐसा हुआ तो जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में गन्ना डाला जाएगा।
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