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कोर्ट ने अधिकारियों को किया आरोप से मुक्त

Sun, 07 Jan 2018 12:13 AM IST
Updated Sun, 07 Jan 2018 12:13 AM IST
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कोर्ट ने अधिकारियों को किया आरोप से मुक्त
बिजनौर/नहटौर। लघुवाद न्यायधीश राकेश वशिष्ठ ने नहटौर के वक्फ अल्लाताला कब्रिस्तान में बनी दुकानों को प्रशासन द्वारा गिरा दिए जाने के मामले में एडीएम, एसडीएम, सीओ, अल्पसंख्यक अधिकारी सहित आठ आरोपियों को अदालत के आदेश की अवमानना के आरोप से मुक्त करते हुए वाद को भी निरस्त कर दिया है।
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नहटौर निवासी कलवा ने अदालत में दाखिल वाद में कहा था कि वक्फ अल्लाताला कब्रिस्तान चौराहे के मुतवल्ली गैयरूल इस्लाम ने सिविल कोर्ट में वर्ष 2004 में एक वाद दायर किया था। इस वाद में कब्रिस्तान की विवादित आराजी पर बनी दुकानों को हटाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने पांच जनवरी 2004 को पक्षकारों को वक्फ कब्रिस्तान की विवादित आराजी पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश पारित किए थे। कलवा का कहना था कि इस आराजी का पश्चिमी भाग मुतवल्ली गैयरूल इस्लाम के पिता शमशुल इस्लाम से उसके पिता रमजान शाह द्वारा 25 जुलाई 1977 को बैनामे के द्वारा खरीदा गया था। यहां पर आठ दुकान लिंटरशुदा नहटौर पालिका से इजाजत लेकर बनाई गईं। इनमे मिजाज अहमद, शाकिर हुसैन, शकील अहमद, शमशाद हुसैन, अवैश इकबाल आदि किराएदार थे। स्टे आदेश की कॉपी एडीएम व अल्पसंख्यक अधिकारी के कार्यालय में 16 जनवरी 2004 को रिसीव करा दी गई थी तथा प्रशासन, सीओ व थानाध्यक्ष को भी दे दी गई थी। लेकिन इसके बावजूद भी मुतवल्ली गैयरूल इस्लाम ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए 22 जनवरी को ये दुकानें अपने सहयोगियों अब्दुल समी व इरशाद अहमद एवं पुलिस व प्रशासन की मदद से गिरवा दीं और दुकानों में रखा सामान लूट लिया। दुकान गिराए जाने के समय मौके पर एडीएम श्रवण कुमार, अल्पसंख्यक अधिकारी वीके सैनी, एसडीएम धामपुर जेपी सिंह, सीओ अनिल यादव, थानाध्यक्ष नहटौर राममूर्ति यादव मौजूद थे। इस मामले में मुतवल्ली व अब्दुल समी, इरशाद अहमद की ओर से कहा गया कि जिस संपत्ति पर दुकान बनी थीं, वो लंबे समय से कब्रिस्तान है। कब्रिस्तान की जमीन का बैनामा नहीं किया जा सकता है। इस मामले में अल्पसंख्यक अधिकारी द्वारा वक्फ संपत्ति को क्षतिग्रस्त करने व फर्जी बैनामा कराने की रिपोर्ट थाना नहटौर में दर्ज है। इसमें कलवा व उसके साथी जेल जा चुके हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ के आदेश पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई कर दुकानें हटाई गईं। प्रशासन की ओर से तत्कालीन एडीएम, एसडीएम, अल्पसंख्यक अधिकारी, सीओ व एसओ की ओर से कहा गया कि वह उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों के आदेशों के अनुपालन में कार्रवाई की। आदेशों का पालन करना सेवा में रहते हुए उनका कर्तव्य है। कब्रिस्तान से अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग तथा सुन्नी सेंट्रल बोर्ड लखनऊ के आदेश पर की गई। इस मामले में अपने निर्णय में कोर्ट ने कहा है कि प्रशासन द्वारा कार्रवाई सचिव उत्तर प्रदेश शासन अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ के आदेश के अनुपालन में की गई है। यह न्यायालय के किसी आदेश का उल्लंघन नहीं है। ऐसा भी कोई सबूत पेश नहीं किया गया है जिससे यह साबित होता हो कि मुतवल्ली गैयरूल इस्लाम ने प्रशासन से हमसाज होकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है। प्रशासन द्वारा इस प्रकरण में कानून के अधीन कार्रवाई की गई है। इसलिए अदालत के आदेश की अवमानना का मामला नहीं बनता है। इसलिए कलवा द्वारा दाखिल अदालत के आदेश की अवमानना का वाद निरस्त किया जाता है।
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