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प्रवासी पक्षियों को भाई बिजनौर की धरती
Updated Sun, 26 Nov 2017 11:46 PM IST
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प्रवासी पक्षियों को भाई बिजनौर की धरती
बिजनौर। जिले की नदियों का पानी और उनके आसपास का क्षेत्र साइबेरियन पक्षियों को भी भा गया है। साइबेरियन पक्षी गंगा किनारे के क्षेत्र में डेरा डाल रहे हैं। बीते साल वन विभाग द्वारा की गई बर्ड वॉचिंग में 46 प्रजाति के 2700 पक्षी मिले थे। पक्षियों द्वारा फिर से गंगा किनारे डेरा डालने से वन अधिकारी गदगद हैं।
जिले में गंगा, रामगंगा, मालन और खो नदी के किनारे हर साल साइबेरिया व अन्य देशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। सर्दी के दौरान यह पक्षी यहीं प्रवास करते हैं। वन विभाग द्वारा इनकी गिनती की जाती है। जिले में गंगा नदी में डॉल्फिन का कुनबा पहले ही बढ़ चुका है। उत्तर प्रदेश वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम को बिजनौर क्षेत्र में गंगा नदी में इस साल 11 डॉल्फिन दिखी थीं। प्रवासी पक्षियों द्वारा भी जिले में डेरा डालने को अच्छा संकेत माना जा रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रवासी पक्षी गंगा के आसपास प्रजनन करने के लिए आते हैं। वे गंगा किनारे रेत में ही घोंसला बनाते हैं और अंडे देते हैं। तीन से चार महीने में ही उनके बच्चे इतने विकसित हो जाते हैं कि वे अपने माता पिता के साथ खुद साइबेरिया के लिए उड़ सकते हैं। पिछले साल गंगा बैराज, हरेवली, पीली डेम के पास डीएफओ एम सेम्मारन, बर्ड की अनेक प्रजातियों के विशेषज्ञ हरेंद्र त्यागी ने अपनी टीम के साथ विदेशी पक्षियों की नस्ल, उनकी संख्या की गिनती की थी। टीम को तीनों जगहों पर 46 प्रजाति के 2700 पक्षी मिले थे। जबकि 2015 में टीम को 38 प्रजातियों के 1881 पक्षी ही मिले थे।
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बिजनौर में ये पक्षी आते हैं प्रवास पर
टीम को बर्ड वॉचिंग के दौरान डारटर, ब्लू रॉक, पिनटेल, कामन टेल, लार्ज एरागेट, ग्रे लग ग्रीस, बेडर ग्रीस, पोस्टर पनकोन आदि पक्षी दिखाई दिए। डीएफओ एम सेम्मारन के मुताबिक जिले की धरती पर प्रवासी पक्षियों को भा गई है। जल्दी ही पक्षियों की गिनती कराई जाएगी।
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बिजनौर। जिले की नदियों का पानी और उनके आसपास का क्षेत्र साइबेरियन पक्षियों को भी भा गया है। साइबेरियन पक्षी गंगा किनारे के क्षेत्र में डेरा डाल रहे हैं। बीते साल वन विभाग द्वारा की गई बर्ड वॉचिंग में 46 प्रजाति के 2700 पक्षी मिले थे। पक्षियों द्वारा फिर से गंगा किनारे डेरा डालने से वन अधिकारी गदगद हैं।
जिले में गंगा, रामगंगा, मालन और खो नदी के किनारे हर साल साइबेरिया व अन्य देशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। सर्दी के दौरान यह पक्षी यहीं प्रवास करते हैं। वन विभाग द्वारा इनकी गिनती की जाती है। जिले में गंगा नदी में डॉल्फिन का कुनबा पहले ही बढ़ चुका है। उत्तर प्रदेश वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम को बिजनौर क्षेत्र में गंगा नदी में इस साल 11 डॉल्फिन दिखी थीं। प्रवासी पक्षियों द्वारा भी जिले में डेरा डालने को अच्छा संकेत माना जा रहा है।
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वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रवासी पक्षी गंगा के आसपास प्रजनन करने के लिए आते हैं। वे गंगा किनारे रेत में ही घोंसला बनाते हैं और अंडे देते हैं। तीन से चार महीने में ही उनके बच्चे इतने विकसित हो जाते हैं कि वे अपने माता पिता के साथ खुद साइबेरिया के लिए उड़ सकते हैं। पिछले साल गंगा बैराज, हरेवली, पीली डेम के पास डीएफओ एम सेम्मारन, बर्ड की अनेक प्रजातियों के विशेषज्ञ हरेंद्र त्यागी ने अपनी टीम के साथ विदेशी पक्षियों की नस्ल, उनकी संख्या की गिनती की थी। टीम को तीनों जगहों पर 46 प्रजाति के 2700 पक्षी मिले थे। जबकि 2015 में टीम को 38 प्रजातियों के 1881 पक्षी ही मिले थे।
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बिजनौर में ये पक्षी आते हैं प्रवास पर
टीम को बर्ड वॉचिंग के दौरान डारटर, ब्लू रॉक, पिनटेल, कामन टेल, लार्ज एरागेट, ग्रे लग ग्रीस, बेडर ग्रीस, पोस्टर पनकोन आदि पक्षी दिखाई दिए। डीएफओ एम सेम्मारन के मुताबिक जिले की धरती पर प्रवासी पक्षियों को भा गई है। जल्दी ही पक्षियों की गिनती कराई जाएगी।