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बिजनौर बना अर्ली प्रजाति के गन्ने का बाउल
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:39 AM IST
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इस बार और बढ़ेगी मिलों की रिकवरी
बिजनौर। बीते साल राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान बनाने वाली जिले की शुगर मिलों में इस साल रिकवरी और बढ़ना तय है। गन्ना विभाग व मिलों द्वारा कराए गए सर्वे में बता चला है कि इस साल जिले में गन्ने के कुल रकबे के 93 प्रतिशत क्षेत्रफल में अर्ली प्रजाति बोई गई है। अर्ली प्रजाति के गन्ने से रिकवरी बढ़ती है। किसानों को गन्ने का दाम भी अधिक मिलता है।
बीते साल जिले में दो हजार 761 करोड़ रुपये कीमत के नौ करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी। बीते साल कई शुगर मिलों ने रिकवरी के रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इसका कारण किसानों का अर्ली प्रजाति के गन्ने को अपनाना था। जिले के किसान अर्ली प्रजाति के गन्ने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। किसानों को इसका दाम भी सामान्य गन्ने से दस रुपये प्रति क्विंटल अधिक मिलता है। डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, अर्ली प्रजाति किसान और मिल दोनों के लिए फायदे का सौदा है। जल्दी ही जिले में शत-प्रतिशत रकबा अर्ली प्रजाति का होगा।
बढ़ रहा सिलसिला
साल रकबा अर्ली प्रजाति
2013-14 2.09 9 प्रतिशत
2014-15 1.99 28
2015-16 2.03 51
2016-17 2.10 75
2017-18 2.12 93
नोट : रकबा लाख हेक्टेअर में, गन्ना विभाग के मुताबिक।
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बिजनौर। बीते साल राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान बनाने वाली जिले की शुगर मिलों में इस साल रिकवरी और बढ़ना तय है। गन्ना विभाग व मिलों द्वारा कराए गए सर्वे में बता चला है कि इस साल जिले में गन्ने के कुल रकबे के 93 प्रतिशत क्षेत्रफल में अर्ली प्रजाति बोई गई है। अर्ली प्रजाति के गन्ने से रिकवरी बढ़ती है। किसानों को गन्ने का दाम भी अधिक मिलता है।
बीते साल जिले में दो हजार 761 करोड़ रुपये कीमत के नौ करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी। बीते साल कई शुगर मिलों ने रिकवरी के रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इसका कारण किसानों का अर्ली प्रजाति के गन्ने को अपनाना था। जिले के किसान अर्ली प्रजाति के गन्ने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। किसानों को इसका दाम भी सामान्य गन्ने से दस रुपये प्रति क्विंटल अधिक मिलता है। डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, अर्ली प्रजाति किसान और मिल दोनों के लिए फायदे का सौदा है। जल्दी ही जिले में शत-प्रतिशत रकबा अर्ली प्रजाति का होगा।
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बढ़ रहा सिलसिला
साल रकबा अर्ली प्रजाति
2013-14 2.09 9 प्रतिशत
2014-15 1.99 28
2015-16 2.03 51
2016-17 2.10 75
2017-18 2.12 93
नोट : रकबा लाख हेक्टेअर में, गन्ना विभाग के मुताबिक।