{"_id":"595fd8be4f1c1b35198b46d8","slug":"41499453630-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोद ली एक और बेटी का किया कन्यादान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोद ली एक और बेटी का किया कन्यादान
Updated Sat, 08 Jul 2017 12:23 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोद ली एक और बेटी का किया कन्यादान
नजीबाबाद (बिजनौर)। नजीबाबाद के मध्यवर्गीय दंपति ने गोद लिए छह बच्चों में से एक और कन्या को डोली में घर से विदा कर दिया।
मोहल्ला दरोदग्रान में ओमप्रकाश प्रजापति के आवास पर शुक्रवार को बारात आई। मौका था उनकी गोद ली बेटी शिवांगी के विवाह का। हिंदू रीति-रिवाज के साथ गांव राजपुर नवादा निवासी दूल्हा हिमांशु के साथ शिवांगी दांपत्य सूत्र में बंध गई। विवाह के बाद ओमप्रकाश प्रजापति और उनकी पत्नी कमलेश ने शिवांगी की डोली विदा की।
अमर उजाला ने एक जनवरी 2011 के अंक में ‘खून के रिश्ते ने भुलाया, गैरों ने अपनाया...’ शीर्षक से सचित्र खबर प्रकाशित की थी। दरअसल मोहल्ला दरोदग्रान निवासी ओमप्रकाश प्रजापति को देहरादून में छह बच्चे लावारिस मिले थे। वह उन्हें अपने साथ नजीबाबाद ले आए थे। बच्चों ने उन्हें बताया था कि पुलिस विभाग में कार्यरत उनके पिता उन्हें व मां को छोड़कर चले गए थे। उन्होंने दूसरा विवाह कर लिया था। बीमार मां के निधन के बाद वे अनाथ हो गए थे।
बखूबी निभा रहे परवरिश की जिम्मेदारी
समाज के संभ्रांत वर्ग के लिए मध्य वर्गीय ओमप्रकाश दंपति ने मिसाल कायम की है। अपनी तीन बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई पूरी करा उन्हें उनके पांव पर खड़ा करने के साथ-साथ उनकी शादियां तो कराईं ही, गोद ली गई पांच कन्याओं और एक बालक की जिम्मेदारी से परवरिश भी की। गोद ली दो कन्याओं की वे पहले ही शादी कर चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नजीबाबाद (बिजनौर)। नजीबाबाद के मध्यवर्गीय दंपति ने गोद लिए छह बच्चों में से एक और कन्या को डोली में घर से विदा कर दिया।
मोहल्ला दरोदग्रान में ओमप्रकाश प्रजापति के आवास पर शुक्रवार को बारात आई। मौका था उनकी गोद ली बेटी शिवांगी के विवाह का। हिंदू रीति-रिवाज के साथ गांव राजपुर नवादा निवासी दूल्हा हिमांशु के साथ शिवांगी दांपत्य सूत्र में बंध गई। विवाह के बाद ओमप्रकाश प्रजापति और उनकी पत्नी कमलेश ने शिवांगी की डोली विदा की।
अमर उजाला ने एक जनवरी 2011 के अंक में ‘खून के रिश्ते ने भुलाया, गैरों ने अपनाया...’ शीर्षक से सचित्र खबर प्रकाशित की थी। दरअसल मोहल्ला दरोदग्रान निवासी ओमप्रकाश प्रजापति को देहरादून में छह बच्चे लावारिस मिले थे। वह उन्हें अपने साथ नजीबाबाद ले आए थे। बच्चों ने उन्हें बताया था कि पुलिस विभाग में कार्यरत उनके पिता उन्हें व मां को छोड़कर चले गए थे। उन्होंने दूसरा विवाह कर लिया था। बीमार मां के निधन के बाद वे अनाथ हो गए थे।
विज्ञापन
बखूबी निभा रहे परवरिश की जिम्मेदारी
समाज के संभ्रांत वर्ग के लिए मध्य वर्गीय ओमप्रकाश दंपति ने मिसाल कायम की है। अपनी तीन बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई पूरी करा उन्हें उनके पांव पर खड़ा करने के साथ-साथ उनकी शादियां तो कराईं ही, गोद ली गई पांच कन्याओं और एक बालक की जिम्मेदारी से परवरिश भी की। गोद ली दो कन्याओं की वे पहले ही शादी कर चुके हैं।
विज्ञापन