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धामपुर गन्ना कौंसिल को 1493 ब्रीडर सीड का हुआ आवंटन
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धामपुर। गन्ना विभाग की ओर से धामपुर गन्ना परिषद को शोध केंद्रों पर तैयार नई प्रजाति के 1493 क्विंटल ब्रीडर सीड का आवंटन हुआ है। जो पिछले साल की तुलना में करीब 300 क्विंटल अधिक है। यह बीज चीनी मिल को आपूर्ति किए जाने वाले गन्ने के भाव से 115 रुपये प्रति क्विंटल महंगा है। बीज के आवंटन के लिए विभाग की ओर से किसानों का पंजीयन कराने का काम तेजी से किया जा रहा है। अब तक परिषद क्षेत्र में करीब 35 किसान पंजीकरण करा चुुके हैं।
इस बीज को शाहजहांपुर शोध केंद्र, रिसर्च गन्ना शोध केंद्र सिरसा बरेली और वैज्ञानिकों की देखरेख में चीनी मिलों के फार्मों पर तैयार किया गया है। इनमें 821 क्विंटल बीज अगैती प्रजाति और 672 क्विंटल बीज सामान्य प्रजाति का शामिल है। अगैती प्रजाति में कोसा. 08272, को. 118, को. 238, यूपी 05125 और कोसा 8436 शामिल हैं। जबकि सामान्य प्रजाति में कोसा. 09232, कोसा. 8279, कोसा. 8276, कोसा. 12232, को. 05011 कोशे. 11453 है। एससीडीआई अमित कुमार पांडेय ने बताया कि अगैती प्रजाति के गन्ने की पैदावार 950 से 1000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और सामान्य की 850 से 900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की होने की उम्मीद है।
दोनों प्रजाति के गन्ने का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। प्रति क्विंटल 40 रुपये कटाई, छिलाई और ढुलाई अलग से है। इस प्रकार से किसान को नई प्रजाति का बीज 440 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से उपलब्ध कराया जाएगा। बीज की खरीदारी के दो विकल्प निर्धारित किए गए हैं। यदि किसान नकद में लेना चाहते हैं, तो नकद में भी ले सकते हैं। यदि ऐसा करने में अक्षम हैं तो गन्ना समिति से अपनी जरूरत के हिसाब से ऋण के आधार पर भी बीज को प्राप्त कर गन्ने की बुवाई कर सकते हैं। इस बीज से क्षेत्र में करीब 35 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की बुवाई आसानी की जा सकती है।
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ट्रेंच विधि से बुवाई में पड़ता है कम बीज
एससीडीआई ने बताया कि यदि किसान गन्ने की बुवाई ट्रेंच विधि से करते हैं तो प्रति हेक्टेयर 60 से 70, सामान्य विधि से 70 से 80 क्विंटल और सिंगल विधि से बुआई करने पर 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बीज लगेगा। सिंगल विधि से गन्ने की बुवाई करने पर कम बीज लगता है। क्योंकि इस विधि में गन्ने की आंख को ही गन्ने से काट कर बोया जाता है। नई प्रजाति के बीज से बुवाई करने में सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसमें एक तो रोग नहीं लगता और उत्पादन बंपर होता है।
पौधशाला तैयार करने वालों को मिलेगा 50 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान
अधिकारियों ने बताया कि जो इस किसान इस बीज को अपने यहां पर वैज्ञानिकों की देखरेख में पौधशालाओं में रूप में तैयार कराना चाहते हैं। तो विभाग की ओर से ऐसे किसानों को 50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से अनुदान देने की व्यवस्था है। यह अनुदान धनराशि विभाग की ओर से नेफ्ट विधि से सीधे उनके खातों में पहुंचेगी। किसानों को योजना से लाभ दिलाने को विभाग की ओर से गांवों में जाकर प्रचार प्रसार किया जा रहा है।
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इस बीज को शाहजहांपुर शोध केंद्र, रिसर्च गन्ना शोध केंद्र सिरसा बरेली और वैज्ञानिकों की देखरेख में चीनी मिलों के फार्मों पर तैयार किया गया है। इनमें 821 क्विंटल बीज अगैती प्रजाति और 672 क्विंटल बीज सामान्य प्रजाति का शामिल है। अगैती प्रजाति में कोसा. 08272, को. 118, को. 238, यूपी 05125 और कोसा 8436 शामिल हैं। जबकि सामान्य प्रजाति में कोसा. 09232, कोसा. 8279, कोसा. 8276, कोसा. 12232, को. 05011 कोशे. 11453 है। एससीडीआई अमित कुमार पांडेय ने बताया कि अगैती प्रजाति के गन्ने की पैदावार 950 से 1000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और सामान्य की 850 से 900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की होने की उम्मीद है।
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दोनों प्रजाति के गन्ने का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। प्रति क्विंटल 40 रुपये कटाई, छिलाई और ढुलाई अलग से है। इस प्रकार से किसान को नई प्रजाति का बीज 440 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से उपलब्ध कराया जाएगा। बीज की खरीदारी के दो विकल्प निर्धारित किए गए हैं। यदि किसान नकद में लेना चाहते हैं, तो नकद में भी ले सकते हैं। यदि ऐसा करने में अक्षम हैं तो गन्ना समिति से अपनी जरूरत के हिसाब से ऋण के आधार पर भी बीज को प्राप्त कर गन्ने की बुवाई कर सकते हैं। इस बीज से क्षेत्र में करीब 35 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की बुवाई आसानी की जा सकती है।
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ट्रेंच विधि से बुवाई में पड़ता है कम बीज
एससीडीआई ने बताया कि यदि किसान गन्ने की बुवाई ट्रेंच विधि से करते हैं तो प्रति हेक्टेयर 60 से 70, सामान्य विधि से 70 से 80 क्विंटल और सिंगल विधि से बुआई करने पर 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बीज लगेगा। सिंगल विधि से गन्ने की बुवाई करने पर कम बीज लगता है। क्योंकि इस विधि में गन्ने की आंख को ही गन्ने से काट कर बोया जाता है। नई प्रजाति के बीज से बुवाई करने में सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसमें एक तो रोग नहीं लगता और उत्पादन बंपर होता है।
पौधशाला तैयार करने वालों को मिलेगा 50 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान
अधिकारियों ने बताया कि जो इस किसान इस बीज को अपने यहां पर वैज्ञानिकों की देखरेख में पौधशालाओं में रूप में तैयार कराना चाहते हैं। तो विभाग की ओर से ऐसे किसानों को 50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से अनुदान देने की व्यवस्था है। यह अनुदान धनराशि विभाग की ओर से नेफ्ट विधि से सीधे उनके खातों में पहुंचेगी। किसानों को योजना से लाभ दिलाने को विभाग की ओर से गांवों में जाकर प्रचार प्रसार किया जा रहा है।