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नहीं चुकाया 3809 करोड़ का ऋण, 23230 के खिलाफ आरसी जारी
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23 हजार बकाएदारों की आरसी जारी
बिजनौर। जिले के उपभोक्ताओं में बंटे 7600 करोड़ में से 3809 करोड़ का ऋण एनपीए श्रेणी में आ गया है। जिले के उपभोक्ताओं को बांटे गए ऋण का यह आधा हिस्सा है। उपभोक्ताओं पर डूबे ऋण को निकालने के लिए अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। बैंकों ने ऋण जमा न करने वाले 23 हजार 230 उपभोक्ताओं की आरसी काट दी है। आरसी जारी होने के बाद भी ऋण जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। राजस्व विभाग द्वारा गिरफ्तारी होगी। आरसी जारी होने से उपभोक्ताओं में खलबली मच गई है।
हर वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए बैंकों में अनेक ऋण योजनाओं का संचालन किया जाता है। किसान रुपये क्रेडिट कार्ड, होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन आदि में जिले में हर साल अरबों रुपये का ऋण बांटा जाता है। हर ऋण को जमा करने की समयसीमा होती है। समयसीमा बीतने के बाद भी उपभोक्ता अपना ऋण जमा नहीं करते हैं। ऐसे खाते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) में शामिल हो जाते हैं। ऐसे खातों से ऋण वसूली के लिए सख्त कदम उठाते हैं। वर्तमान में जिले के उपभोक्ताओं पर 7600 करोड़ रुपये का ऋण है। इसमें से आधों से भी कुछ ज्यादा 3809 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए श्रेणी में आ गया है। यह ऋण 23 हजार 230 उपभोक्ताओं के बीच बांटा गया है। इस बकाया राशि को वसूलने के लिए बैंकों ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बैंक ऋण जमा न करने वाले उपभोक्ताओं की आरसी काट रहे हैं। आरसी कटने के बाद उपभोक्ताओं से ऋण वसूली राजस्व की टीम करेगी। अगर राजस्व की टीम को भी उपभोक्ता बकाया राशि नहीं देते हैं तो इन उपभोक्ताओं को जेल भी जाना पड़ सकता है।
यह है एनपीए का फार्मूला
अग्रणी जिला प्रबंधक अजय कुमार के अनुसार होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन में उपभोक्ता के बैक से ऋण लेने से 90 दिन के अंदर ब्याज या मूलधन के बराबर राशि जमा करनी होती है। 90 दिन से ज्यादा समय बीतने पर भी मूलधन या ब्याज वापस न करने वाले उपभोक्ताओं के खाते एनपीए हो जाते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड में एक साल के अंदर मूलधन, ब्याज सहित जमा करना होता है, ऐसा न करने वाले किसानों के खाते अनियमित हो जाते हैं। इन किसानों को ब्याज पर तीन प्रतिशत सब्सिडी का भी लाभ नहीं मिलता है।
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आरसी जारी होने पर भी जो उपभोक्ता ऋण जमा नहीं करते हैं उनके खिलाफ राजस्व विभाग की टीम कुर्की-जब्ती की कार्रवाई करती है। ऐसे उपभोक्ताओं को मूलधन व ब्याज की कुल राशि पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त देना होता है।
सबसे ज्यादा कर्ज है किसानों पर
जिले के उपभोक्ताओं में बकाया राशि में सबसे ज्यादा कर्ज किसानों पर है। कुल 3809 करोड़ की एनपीए राशि में से 2500 करोड़ रुपये किसान क्रेडिट कार्ड के होने का अनुमान है। इसके अलावा मुद्रा योजना में भी 500 करोड़ से ज्यादा का ऋण एनपीए हो चुका है। होम लोन, कार लोन व पर्सनल लोन लेने वाले भी बैंक के रुपये नहीं लौटा रहे हैं। आमतौर पर माना जाता है कि किसान ऋण लेकर बैंकों को रुपये नहीं लौटाते हैं, लेकिन अब मकान, कार आदि कार्य के लिए लिया गया ऋण भी नहीं लौटाया जा रहा है। ऐसे उपभोक्ता बैंकों के लिए सिरदर्द बने हैं।
कर्जमाफी की आस में उपभोक्ताओं के खाते एनपीए हो रहे हैं। किसानों के अलावा अब मुद्रा योजना में ऋण लेने वाले भी कर्जमाफी के कयास लगा रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। किसानों के कर्जमाफी की भी अनेक शर्त होती हैं। इन शर्त पर कम ही उपभोक्ता खरे उतरते हैं।
बैंकों के बकाएदारों पर कर्ज की स्थिति पर नजर
बैंक बकाएदार कर्ज
पीएनबी 10570 173 करोड़
एसबीआई 2334 345 करोड़
सर्व यूपी ग्रामीण बैंक 2894 21.92 करोड़
सहकारी ग्राम विकास बैंक 2055 28 करोड़
किसानों के कर्ज पर एक नजर
साल कर्ज
2008-09 1071 करोड़
2009-10 1296 करोड़
2010-11 1454 करोड़
2011-12 1842 करोड़
2012-13 2010 करोड़
2013-14 2874 करोड़
2014-15 3250 करोड़
2015-16 3840 करोड़
2016-17 3744 करोड़
2017-18 4300 करोड़
2018-19 3500 करोड़ (मार्च तक)
2018-19 4697 कचरोड़(सितंबर तक)
नोट:यह आंकड़े जिला अग्रणी बैंक कार्यालय से लिए गए हैं।
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बिजनौर। जिले के उपभोक्ताओं में बंटे 7600 करोड़ में से 3809 करोड़ का ऋण एनपीए श्रेणी में आ गया है। जिले के उपभोक्ताओं को बांटे गए ऋण का यह आधा हिस्सा है। उपभोक्ताओं पर डूबे ऋण को निकालने के लिए अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। बैंकों ने ऋण जमा न करने वाले 23 हजार 230 उपभोक्ताओं की आरसी काट दी है। आरसी जारी होने के बाद भी ऋण जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। राजस्व विभाग द्वारा गिरफ्तारी होगी। आरसी जारी होने से उपभोक्ताओं में खलबली मच गई है।
हर वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए बैंकों में अनेक ऋण योजनाओं का संचालन किया जाता है। किसान रुपये क्रेडिट कार्ड, होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन आदि में जिले में हर साल अरबों रुपये का ऋण बांटा जाता है। हर ऋण को जमा करने की समयसीमा होती है। समयसीमा बीतने के बाद भी उपभोक्ता अपना ऋण जमा नहीं करते हैं। ऐसे खाते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) में शामिल हो जाते हैं। ऐसे खातों से ऋण वसूली के लिए सख्त कदम उठाते हैं। वर्तमान में जिले के उपभोक्ताओं पर 7600 करोड़ रुपये का ऋण है। इसमें से आधों से भी कुछ ज्यादा 3809 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए श्रेणी में आ गया है। यह ऋण 23 हजार 230 उपभोक्ताओं के बीच बांटा गया है। इस बकाया राशि को वसूलने के लिए बैंकों ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बैंक ऋण जमा न करने वाले उपभोक्ताओं की आरसी काट रहे हैं। आरसी कटने के बाद उपभोक्ताओं से ऋण वसूली राजस्व की टीम करेगी। अगर राजस्व की टीम को भी उपभोक्ता बकाया राशि नहीं देते हैं तो इन उपभोक्ताओं को जेल भी जाना पड़ सकता है।
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यह है एनपीए का फार्मूला
अग्रणी जिला प्रबंधक अजय कुमार के अनुसार होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन में उपभोक्ता के बैक से ऋण लेने से 90 दिन के अंदर ब्याज या मूलधन के बराबर राशि जमा करनी होती है। 90 दिन से ज्यादा समय बीतने पर भी मूलधन या ब्याज वापस न करने वाले उपभोक्ताओं के खाते एनपीए हो जाते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड में एक साल के अंदर मूलधन, ब्याज सहित जमा करना होता है, ऐसा न करने वाले किसानों के खाते अनियमित हो जाते हैं। इन किसानों को ब्याज पर तीन प्रतिशत सब्सिडी का भी लाभ नहीं मिलता है।
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आरसी जारी होने पर भी जो उपभोक्ता ऋण जमा नहीं करते हैं उनके खिलाफ राजस्व विभाग की टीम कुर्की-जब्ती की कार्रवाई करती है। ऐसे उपभोक्ताओं को मूलधन व ब्याज की कुल राशि पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त देना होता है।
सबसे ज्यादा कर्ज है किसानों पर
जिले के उपभोक्ताओं में बकाया राशि में सबसे ज्यादा कर्ज किसानों पर है। कुल 3809 करोड़ की एनपीए राशि में से 2500 करोड़ रुपये किसान क्रेडिट कार्ड के होने का अनुमान है। इसके अलावा मुद्रा योजना में भी 500 करोड़ से ज्यादा का ऋण एनपीए हो चुका है। होम लोन, कार लोन व पर्सनल लोन लेने वाले भी बैंक के रुपये नहीं लौटा रहे हैं। आमतौर पर माना जाता है कि किसान ऋण लेकर बैंकों को रुपये नहीं लौटाते हैं, लेकिन अब मकान, कार आदि कार्य के लिए लिया गया ऋण भी नहीं लौटाया जा रहा है। ऐसे उपभोक्ता बैंकों के लिए सिरदर्द बने हैं।
कर्जमाफी की आस में उपभोक्ताओं के खाते एनपीए हो रहे हैं। किसानों के अलावा अब मुद्रा योजना में ऋण लेने वाले भी कर्जमाफी के कयास लगा रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। किसानों के कर्जमाफी की भी अनेक शर्त होती हैं। इन शर्त पर कम ही उपभोक्ता खरे उतरते हैं।
बैंकों के बकाएदारों पर कर्ज की स्थिति पर नजर
बैंक बकाएदार कर्ज
पीएनबी 10570 173 करोड़
एसबीआई 2334 345 करोड़
सर्व यूपी ग्रामीण बैंक 2894 21.92 करोड़
सहकारी ग्राम विकास बैंक 2055 28 करोड़
किसानों के कर्ज पर एक नजर
साल कर्ज
2008-09 1071 करोड़
2009-10 1296 करोड़
2010-11 1454 करोड़
2011-12 1842 करोड़
2012-13 2010 करोड़
2013-14 2874 करोड़
2014-15 3250 करोड़
2015-16 3840 करोड़
2016-17 3744 करोड़
2017-18 4300 करोड़
2018-19 3500 करोड़ (मार्च तक)
2018-19 4697 कचरोड़(सितंबर तक)
नोट:यह आंकड़े जिला अग्रणी बैंक कार्यालय से लिए गए हैं।