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फसल बीमा योजना से बाहर हुए 2.35 लाख किसान

Sat, 01 Aug 2020 11:18 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2020 11:18 PM IST
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2.35 lakh farmers dropped out of crop insurance scheme
फसल बीमा योजना से बाहर हुए 2.35 लाख किसान
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बिजनौर। स्वैच्छिक की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में दो लाख 35 हजार किसान पहले ही बाहर हो चुके हैं। बाकी किसान भी योजना से खुद को बाहर करने के लिए बैंकों में आवेदन कर रहे हैं। योजना में किसानों की ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। हालांकि बैंकों में काफी किसानों ने योजना में खुद को लाभान्वित करने के लिए भी पत्र लिखा है। बैंक व बीमा कंपनी किसानों को योजना में शामिल करने के लिए उन्हें जागरूक कर रहे हैं।
किसानों की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की जा रही है। पहले योजना में सभी फसलों को शामिल किया गया था। योजना में किसान जब क्रेडिट कार्ड पर ऋण लेते हैं तो कुल राशि की डेढ़ से दो प्रतिशत राशि फसल बीमा के प्रीमियम के रूप में कट जाती है। यानि एक लाख रुपये के कर्ज पर डेढ़ से दो हजार का प्रीमियम कट जाता है। किसानों ने गन्ने की फसल को बीमा में शामिल करने का विरोध किया था। किसानों का कहना था कि गन्ने की फसल को नुकसान नहीं होता है। प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद गन्ने की फसल को बीमा योजना से बाहर कर दिया गया था। इस साल केंद्र सरकार ने फसल बीमा को स्वैच्छिक कर दिया था। यानि अगर किसी को बीमा योजना का लाभ नहीं लेना है तो उसे बैंक में लिखकर देना होगा। ऐसा करने पर उसकी फसल के बीमा का प्रीमियम नहीं कटेगा। जिले में करीब साढ़े तीन लाख किसान क्रेडिट कार्ड बने हैं। इनमें से दो लाख 36 हजार 136 कार्ड धारकों ने गन्ने को मुख्य फसल बताया गया है। यानि ये किसान क्रेडिट कार्ड पर गन्ने की फसल के लिए ऋण लेते हैं। ये अपने आप योजना से बाहर हो गए हैं। बाकि किसानों से योजना का लाभ न लेने पर बैंक में लिखित में देने को कहा गया है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र का कहना है कि फसल बीमा योजना स्वैच्छिक है। किसान के लिए यह फायदेमंद है। फिर भी जो किसान योजना का लाभ नहीं लेना चाहते हैं वे बैंक में लिखकर दे दें।
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यह है योजना का लाभ
अगर किसान बीमित फसल बोता है और बारिश होने की वजह से फसल बर्बाद होती है और उसे दोबारा फसल बोने का मौका न मिले तो वह क्षतिपूर्ति का पात्र होता है। इसके अलावा ओलावृष्टि या कीटों से फसल को नुकसान होने, फसल कटने से 15 दिन पहले किसी प्राकृतिक आपदा मेें उत्पादन 50 प्रतिशत से अधिक कम होने या फसल कटने के बाद भी कोई नुकसान होने पर किसान क्षतिपूर्ति के प्राप्त होते हैं। लेकिन फसल बीमा योजना में क्षतिपूर्ति के लिए ग्राम समाज को इकाई माना गया है। यानि अगर पूरे गांव की फसल को नुकसान होगा तभी बीमित किसान को क्षतिपूर्ति की जाएगी।
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