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दलित आंदोलन में हिंसा कराने में विपक्षियों का हाथ, चेतन चौहान
Updated Thu, 05 Apr 2018 02:40 AM IST
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अमरोहा। कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान ने एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में हुए दलितों के हिंसक प्रदर्शन को विपक्षी पार्टियों का हाथ बताया है। फोटो और रिकॉर्डिंग के माध्यम से दंगाईयों को चिन्हित किया जा रहा है। हिंसा फैलाने वालों को शरण नहीं दी जाएगी। सूबे में आगजनी और बवाल कराने वाले राजनैतिक लोग हों या अन्य, किसी को बख्शा नहीं जाएगा। यूपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त नहीं हुई है बल्कि दूसरे राज्यों के मुकाबले हिंसा कम हुई हैं। सरकार दलितों के आरक्षण के विरोध में नहीं हैं। इसलिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। यह बातें उन्होंने स्कूल चलो अभियान कार्यक्रम में कहीं।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में केंद्र व यूपी सरकार की कोई बदलाव करने की मंशा नहीं हैं। इसलिए एससी-एसटी एक्ट को बरकरार रखा जाएगा। लेकिन सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शन में कई निर्दोष लोगों ही जान चली गई। सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे असामाजिक तत्वों को छोड़ा नहीं जाएगा। जिस राज्य में भाजपा की सरकार चल रही है। वहां हम कानून अपने हाथों में नहीं लेने देंगे। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करके गुजारिश की है कि जैसा कानून पहले था वैसा ही रहे। हिंसा दूसरी पार्टियां करा रही हैं। मध्य प्रदेश व राजस्थान में इसलिए घटनाए ज्यादा हो रही हैं, क्योंकि वहां पर चुनाव है। दलितों का जो आंदोलन हुआ वह पूरी तरह से सुनियोजित था। उसके पीछे विपक्षी पार्टियों व असामाजिक तत्वों का हाथ रहा है।
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उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में केंद्र व यूपी सरकार की कोई बदलाव करने की मंशा नहीं हैं। इसलिए एससी-एसटी एक्ट को बरकरार रखा जाएगा। लेकिन सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शन में कई निर्दोष लोगों ही जान चली गई। सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे असामाजिक तत्वों को छोड़ा नहीं जाएगा। जिस राज्य में भाजपा की सरकार चल रही है। वहां हम कानून अपने हाथों में नहीं लेने देंगे। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करके गुजारिश की है कि जैसा कानून पहले था वैसा ही रहे। हिंसा दूसरी पार्टियां करा रही हैं। मध्य प्रदेश व राजस्थान में इसलिए घटनाए ज्यादा हो रही हैं, क्योंकि वहां पर चुनाव है। दलितों का जो आंदोलन हुआ वह पूरी तरह से सुनियोजित था। उसके पीछे विपक्षी पार्टियों व असामाजिक तत्वों का हाथ रहा है।
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