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बढ़ापुर वन रेंज में हाथी के अवशेष बरामद होने का प्रकरण
Updated Wed, 28 Mar 2018 11:36 PM IST
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नजीबाबाद/बढ़ापुर। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के नेतृत्व में गठित पशु चिकित्सकों की टीम ने डीएफओ के साथ बढ़ापुर में हाथी के अवशेष मिलने वाले स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। वन विभाग ने बरामद हाथी की हड्डियों का डीएनए टेस्ट कराने का निर्णय लिया है।
बिजनौर वन विभाग के बढ़ापुर रेंज में 25 मार्च को मिले हाथी के अवशेेष प्रकरण में वन विभाग तीन दिन बाद भी घटना के खुलासे को लेकर परेशान हैं। वन विभाग ने बुधवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.भूपेंद्र सिंह, नगीना, बढ़ापुर के पशु चिकित्सकों की टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद टीम ने पुन: इस बात का दावा किया कि जिस स्थान पर हाथी के अवशेष मिले हैं, वहां पर हाथी को नहीं मारा गया है। डीएफओ उदयवीर सिंह का कहना है कि एक हाथी में औसतन 30 से 40 किलोग्राम रक्त होता है। टीम ने घटनास्थल और चप्पा चप्पा तलाशा, लेकिन कहीं रक्त नहीं मिला। कहा कि हाथी के अवशेष घटनास्थल पर लाकर डाले जाने की प्रथम दृष्ट्या संकेत मिले हैं। डीएफओ उदयवीर सिंह के अनुसार डीएनए टेस्ट के बाद ही हाथी के नर और मादा होने तथा उसकी मृत्यु के अनुमानित समय की पुष्टि हो सकेगी। प्रथम दृष्ट्या बरामद अवशेष काफी पुराने प्रतीत हो रहे हैं।
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बिजनौर वन विभाग के बढ़ापुर रेंज में 25 मार्च को मिले हाथी के अवशेेष प्रकरण में वन विभाग तीन दिन बाद भी घटना के खुलासे को लेकर परेशान हैं। वन विभाग ने बुधवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.भूपेंद्र सिंह, नगीना, बढ़ापुर के पशु चिकित्सकों की टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद टीम ने पुन: इस बात का दावा किया कि जिस स्थान पर हाथी के अवशेष मिले हैं, वहां पर हाथी को नहीं मारा गया है। डीएफओ उदयवीर सिंह का कहना है कि एक हाथी में औसतन 30 से 40 किलोग्राम रक्त होता है। टीम ने घटनास्थल और चप्पा चप्पा तलाशा, लेकिन कहीं रक्त नहीं मिला। कहा कि हाथी के अवशेष घटनास्थल पर लाकर डाले जाने की प्रथम दृष्ट्या संकेत मिले हैं। डीएफओ उदयवीर सिंह के अनुसार डीएनए टेस्ट के बाद ही हाथी के नर और मादा होने तथा उसकी मृत्यु के अनुमानित समय की पुष्टि हो सकेगी। प्रथम दृष्ट्या बरामद अवशेष काफी पुराने प्रतीत हो रहे हैं।
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