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मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है मलेरिया : डीएमओ
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‘मलेरिया से बचना है तो पानी इकट्ठा न होने दें’
बिजनौर। जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने कहा कि मलेरिया रोग साफ पानी में ठहरे हुए मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। इसलिए इस रोग से बचाव के लिए अपने घरों और आसपास में जलभराव न होने दें।
बृहस्पतिवार को जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने अपने कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में यह बात कही। उन्होंने कहा कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर सूर्यास्त से पहले काटता है, जबकि मलेरिया रोग बढ़ाने वाले मच्छर सूर्यास्त के बाद डंक मारते हैं। इन्हीं सब चीजों के प्रति सचेत करने के लिए 25 अप्रैल को विश्व भर में मलेरिया दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 की थीम जीरो मलेरिया स्टार्ट विद मी है। इसी थीम के आधार पर डेंगू और मलेरिया को मिटाने के लिए वर्ष भर काम करना है। जिला मलेरिया अधिकारी ने कहा कि मलेरिया परजीवी कुछ प्रजाति के मच्छरों के द्वारा मलेरिया रोगी के शरीर से स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पहुंचते हैं। मादा एनाफिलीज मच्छर जब मलेरिया रोगी का रक्त चुसती है तब रक्त के साथ मलेरिया परजीवी भी उसके आमाश्य में प्रवेश कर जाते हैं।
इससे 14 से 21 दिन के भीतर संबंधित व्यक्ति को बुखार आता है और मलेरिया संक्रमण होने के बाद सर्दी व कंपन्न के साथ तेज बुखार आता है। तेज सिर दर्द और बुखार के अलावा बुखार उतारते समय पसीना अधिक आता है। इस दौरान जिले भर के स्कूलों गोष्ठियों और रैली के माध्यमों से मच्छरदानी अथवा मच्छर भगाने की क्रीम लगाने आदि के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही घरों में रखे कूलर, टायर छतों पर निष्प्रयोज्य सामग्री को साफ करने आदि के लिए विस्तारपूर्वक जानकारी देकर जागरूक किया गया।
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मलेरिया से बचने क्या करें
रुके हुए पानी के स्थानों को मिट्टी से भर दें। यदि ऐसा संभव हो तो उसमें मिट्टी का तेल या डीजल आदि डाल दें। जिससे मच्छर नष्ट हो जाएं। इसके अलावा नारियल के खोल, प्लास्टिक कप, बोतल आदि में जल एकत्रित न होने दें। जहां तक संभव हो पूरे आस्तीन की कमीज, मौजे आदि से शरीर को अधिक से अधिक हिस्से को ढक कर रखें। तेज बुखार होने पर चिकित्सक से संपर्क करें और मलेरिया का शक होने पर नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच कराएं।
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बिजनौर। जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने कहा कि मलेरिया रोग साफ पानी में ठहरे हुए मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। इसलिए इस रोग से बचाव के लिए अपने घरों और आसपास में जलभराव न होने दें।
बृहस्पतिवार को जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने अपने कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में यह बात कही। उन्होंने कहा कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर सूर्यास्त से पहले काटता है, जबकि मलेरिया रोग बढ़ाने वाले मच्छर सूर्यास्त के बाद डंक मारते हैं। इन्हीं सब चीजों के प्रति सचेत करने के लिए 25 अप्रैल को विश्व भर में मलेरिया दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 की थीम जीरो मलेरिया स्टार्ट विद मी है। इसी थीम के आधार पर डेंगू और मलेरिया को मिटाने के लिए वर्ष भर काम करना है। जिला मलेरिया अधिकारी ने कहा कि मलेरिया परजीवी कुछ प्रजाति के मच्छरों के द्वारा मलेरिया रोगी के शरीर से स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पहुंचते हैं। मादा एनाफिलीज मच्छर जब मलेरिया रोगी का रक्त चुसती है तब रक्त के साथ मलेरिया परजीवी भी उसके आमाश्य में प्रवेश कर जाते हैं।
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इससे 14 से 21 दिन के भीतर संबंधित व्यक्ति को बुखार आता है और मलेरिया संक्रमण होने के बाद सर्दी व कंपन्न के साथ तेज बुखार आता है। तेज सिर दर्द और बुखार के अलावा बुखार उतारते समय पसीना अधिक आता है। इस दौरान जिले भर के स्कूलों गोष्ठियों और रैली के माध्यमों से मच्छरदानी अथवा मच्छर भगाने की क्रीम लगाने आदि के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही घरों में रखे कूलर, टायर छतों पर निष्प्रयोज्य सामग्री को साफ करने आदि के लिए विस्तारपूर्वक जानकारी देकर जागरूक किया गया।
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मलेरिया से बचने क्या करें
रुके हुए पानी के स्थानों को मिट्टी से भर दें। यदि ऐसा संभव हो तो उसमें मिट्टी का तेल या डीजल आदि डाल दें। जिससे मच्छर नष्ट हो जाएं। इसके अलावा नारियल के खोल, प्लास्टिक कप, बोतल आदि में जल एकत्रित न होने दें। जहां तक संभव हो पूरे आस्तीन की कमीज, मौजे आदि से शरीर को अधिक से अधिक हिस्से को ढक कर रखें। तेज बुखार होने पर चिकित्सक से संपर्क करें और मलेरिया का शक होने पर नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच कराएं।