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आढ़त के बाद दुकानों पर दोगुने हो रहे टमाटर के दाम
Updated Tue, 25 Jul 2017 12:39 AM IST
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दुकानों पर जाते ही दोगुने हो रहे टमाटर के दाम
बिजनौर।
महंगाई ने टमाटर का रंग और लाल कर दिया है। इसका कारण फसल कम या खराब होना नहीं, बल्कि दुकानदारों की मुनाफाखोरी है। आढ़त के बाद दुकानों पर जाते-जाते टमाटर के दाम दोगुने तक बढ़ रहे हैं।
जिले की सब्जी मंडी से जुड़े लोग बताते हैं कि स्थानीय टमाटर की फसल जून माह तक खत्म हो जाती है। जून तक हर रोज मुख्य मंडी में 20 क्विंटल तक टमाटर आता है। इसके अलावा महाराष्ट्र की मंडी से भी टमाटर आता है। जुलाई के बाद टमाटर की आवक केवल महाराष्ट्र से होती है। इस समय महाराष्ट्र से जिले की सदर मंडी में तीन क्विंटल तक टमाटर रोज आ रहा है। आढ़त पर टमाटर की कीमत 40 रुपये किलो है, जबकि दुकानों पर यह 70 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। दुकानदार उपभोक्ताओं से टमाटर के लगभग दोगुने दाम वसूल रहे हैं।
उपभोक्ता नीरज, रवि, ओमप्रकाश सिंह आदि का कहना है कि किसानों से सब्जी कम दाम पर खरीदकर उन्हें महंगे दामों पर दी जा रही है। उनका कहना है कि दुकानदारों को केवल 20 प्रतिशत तक ही मुनाफा वसूलना चाहिए। इसके बावजूद दुकानदार उपभोक्ताओं से बहुत ज्यादा कीमत वसूल कर रहे हैं।
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बिजनौर।
महंगाई ने टमाटर का रंग और लाल कर दिया है। इसका कारण फसल कम या खराब होना नहीं, बल्कि दुकानदारों की मुनाफाखोरी है। आढ़त के बाद दुकानों पर जाते-जाते टमाटर के दाम दोगुने तक बढ़ रहे हैं।
जिले की सब्जी मंडी से जुड़े लोग बताते हैं कि स्थानीय टमाटर की फसल जून माह तक खत्म हो जाती है। जून तक हर रोज मुख्य मंडी में 20 क्विंटल तक टमाटर आता है। इसके अलावा महाराष्ट्र की मंडी से भी टमाटर आता है। जुलाई के बाद टमाटर की आवक केवल महाराष्ट्र से होती है। इस समय महाराष्ट्र से जिले की सदर मंडी में तीन क्विंटल तक टमाटर रोज आ रहा है। आढ़त पर टमाटर की कीमत 40 रुपये किलो है, जबकि दुकानों पर यह 70 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। दुकानदार उपभोक्ताओं से टमाटर के लगभग दोगुने दाम वसूल रहे हैं।
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उपभोक्ता नीरज, रवि, ओमप्रकाश सिंह आदि का कहना है कि किसानों से सब्जी कम दाम पर खरीदकर उन्हें महंगे दामों पर दी जा रही है। उनका कहना है कि दुकानदारों को केवल 20 प्रतिशत तक ही मुनाफा वसूलना चाहिए। इसके बावजूद दुकानदार उपभोक्ताओं से बहुत ज्यादा कीमत वसूल कर रहे हैं।
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