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ग्राम पंचायत की बैठक में नहीं जा सकेंगे ‘प्रधान पति’
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ग्राम पंचायत की बैठक में नहीं जा सकेंगे ‘प्रधान पति’
बिजनौर। महिला ग्राम प्रधानों के पति अब ग्रामपंचायत के कामकाज में दखलंदाजी नहीं कर सकेंगे। शासन ने इन पर अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है। महिला प्रधान को पंचायत की बैठकों में नहीं आना भारी पड़ सकता है। मामला पकड़ में आने पर महिला प्रधान को अपना पद भी गंवाना पड़ सकता है।
जिला पंचायतराज अधिकारी के अनुसार पंचायत शासकीय मानकों के अनुसार चलेंगी। जिले में 1128 ग्राम पंचायत हैं। इनमें 188 पंचायतों में सामान्य जाति, 102 पंचायतों में पिछड़ी जाति व 86 पंचायतों में अनुसूचित जाति की महिला ग्राम प्रधान हैं। पंचायतराज अधिनियम के अनुसार ग्रामपंचायत की बैठकों की अध्यक्षता ग्राम प्रधान करते हैं। शासन की योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी भी ग्राम प्रधान की होती है। शासन को इस बात की लगातार शिकायत मिल रही हैं कि महिला ग्राम प्रधान बैठकों में नहीं आती है। प्रधान के पति बैठक में आते हैं। आरोप है कि प्रधान पति पंचायत के कामकाज में दखलंदाजी करते हैं। इसका असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। शासकीय योजनाओं की जानकारी ग्रामवासियों को नहीं होने से वे लाभ से वंचित रह जाते हैं।
जिला पंचायतराज अधिकारी सतीश कुमार के अनुसार शासन की मंशा है कि पंचायतराज एक्ट का पालन हो। शासन की योजनाएं हर व्यक्ति तक पहुंचे। लोकतंत्र में पंचायत विकास की पहली सीढ़ी है। महिला प्रधानों का पंचायत की बैठकों में नहीं आना गंभीर मामला है। ग्राम पंचायत अधिकारियों को पंचायत एक्ट का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। महिला ग्राम प्रधानों को विभागीय परिपत्र भेजे जा रहे हैं, जिसमें पंचायत की बैठकों में आने के लिए कहा जाएगा। यदि जांच में महिला ग्राम प्रधान की बैठकों में नहीं आने की बात सही मिलती है तो कार्रवाई होगी। महिला प्रधान की प्रधानी से छुट्टी हो सकती है। डीपीआरओ के मुताबिक किसी भी बाहरी व्यक्ति का पंचायत की बैठकों में नियमानुसार जाना वर्जित है। भले ही वह प्रधान का पति ही क्यों न हो। मामले में यदि पंचायत सचिव की भूमिका पंचायत एक्ट के अनुसार नहीं है तो उसे भी नहीं बक्सा जाएगा।
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पंचायत घर या प्राथमिक स्कूल में ही होंगी बैठक
बिजनौर। ग्राम पंचायतों व सभी सरकारी बैठक पंचायतघरों में होंगी। पंचायतघर नहीं होने पर बैठक प्राथमिक स्कूल में होंगी। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार इस बारे में सहायक विकास अधिकारी पंचायत व ग्राम सचिव को हिदायत दे दी गई हैं। पंचायतघर की साफ सफाई और रख रखाव करने को कहा गया है। ऐसा होने पर पंचायत का कामकाज निष्पक्ष भाव से होगा तथा लोगों को भी इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
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बिजनौर। महिला ग्राम प्रधानों के पति अब ग्रामपंचायत के कामकाज में दखलंदाजी नहीं कर सकेंगे। शासन ने इन पर अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है। महिला प्रधान को पंचायत की बैठकों में नहीं आना भारी पड़ सकता है। मामला पकड़ में आने पर महिला प्रधान को अपना पद भी गंवाना पड़ सकता है।
जिला पंचायतराज अधिकारी के अनुसार पंचायत शासकीय मानकों के अनुसार चलेंगी। जिले में 1128 ग्राम पंचायत हैं। इनमें 188 पंचायतों में सामान्य जाति, 102 पंचायतों में पिछड़ी जाति व 86 पंचायतों में अनुसूचित जाति की महिला ग्राम प्रधान हैं। पंचायतराज अधिनियम के अनुसार ग्रामपंचायत की बैठकों की अध्यक्षता ग्राम प्रधान करते हैं। शासन की योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी भी ग्राम प्रधान की होती है। शासन को इस बात की लगातार शिकायत मिल रही हैं कि महिला ग्राम प्रधान बैठकों में नहीं आती है। प्रधान के पति बैठक में आते हैं। आरोप है कि प्रधान पति पंचायत के कामकाज में दखलंदाजी करते हैं। इसका असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। शासकीय योजनाओं की जानकारी ग्रामवासियों को नहीं होने से वे लाभ से वंचित रह जाते हैं।
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जिला पंचायतराज अधिकारी सतीश कुमार के अनुसार शासन की मंशा है कि पंचायतराज एक्ट का पालन हो। शासन की योजनाएं हर व्यक्ति तक पहुंचे। लोकतंत्र में पंचायत विकास की पहली सीढ़ी है। महिला प्रधानों का पंचायत की बैठकों में नहीं आना गंभीर मामला है। ग्राम पंचायत अधिकारियों को पंचायत एक्ट का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। महिला ग्राम प्रधानों को विभागीय परिपत्र भेजे जा रहे हैं, जिसमें पंचायत की बैठकों में आने के लिए कहा जाएगा। यदि जांच में महिला ग्राम प्रधान की बैठकों में नहीं आने की बात सही मिलती है तो कार्रवाई होगी। महिला प्रधान की प्रधानी से छुट्टी हो सकती है। डीपीआरओ के मुताबिक किसी भी बाहरी व्यक्ति का पंचायत की बैठकों में नियमानुसार जाना वर्जित है। भले ही वह प्रधान का पति ही क्यों न हो। मामले में यदि पंचायत सचिव की भूमिका पंचायत एक्ट के अनुसार नहीं है तो उसे भी नहीं बक्सा जाएगा।
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पंचायत घर या प्राथमिक स्कूल में ही होंगी बैठक
बिजनौर। ग्राम पंचायतों व सभी सरकारी बैठक पंचायतघरों में होंगी। पंचायतघर नहीं होने पर बैठक प्राथमिक स्कूल में होंगी। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार इस बारे में सहायक विकास अधिकारी पंचायत व ग्राम सचिव को हिदायत दे दी गई हैं। पंचायतघर की साफ सफाई और रख रखाव करने को कहा गया है। ऐसा होने पर पंचायत का कामकाज निष्पक्ष भाव से होगा तथा लोगों को भी इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा।