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टीबी नियंत्रण में प्रदेश में दसवें स्थान पर है जिला
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टीबी नियंत्रण में प्रदेश में दसवें स्थान पर है जिला
बिजनौर। टीबी को नियंत्रित करने में जिला बिजनौर को प्रदेश में दसवां स्थान मिला है। अफसरों के अनुसार अभी हाल ही में लखनऊ में प्रदेश भर के जिला क्षय रोग अधिकारियों की मीटिंग के दौरान प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव ने इसकी पुष्टि की थी। राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य दे रखा है।
भारत सरकार की मंशा है कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी रोग से मुक्त किया जा सके। इसके लिए तेजी से अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने रोगियों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रखी हैं। जिससे लोग जागरुक हों और इलाज कराने के बाद पूर्णत: ठीक हो सकें। अफसरों के मुताबिक टीबी के अधिकांश मरीज मजदूर तबके के हैं, जो दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में निवास करते हैं। ऐसे लोग लापरवाही के चलते टीबी रोग की जांच कराने या तो अस्पताल नहीं पहुंच पाते या फिर उनके नजदीकी अस्पतालों में यह टीबी जांच की मशीन नहीं होती। जांच के बाद गंभीर रोगियों को दवा का वितरण किया जाएगा। सुझाव के लिए उनका उपचार किया जाएगा। कार्यवाहक जिला क्षय रोग अधिकारी शैलेश जैन ने बताया कि फिलहाल जनपद मेें करीब 3400 मरीज हैं। उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में सूबे के सभी जिला क्षय रोग अधिकारियों की प्रमुख सचिव ने लखनऊ में मीटिंग ली। इसमें सभी क्षय रोग अधिकारियों ने अपने अपने जिले की रिपोर्टिंग की। इस दौरान प्रमुख सचिव की ओर से जनपद बिजनौर को प्रदेश में दसवें स्थान दिया गया।
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बिजनौर। टीबी को नियंत्रित करने में जिला बिजनौर को प्रदेश में दसवां स्थान मिला है। अफसरों के अनुसार अभी हाल ही में लखनऊ में प्रदेश भर के जिला क्षय रोग अधिकारियों की मीटिंग के दौरान प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव ने इसकी पुष्टि की थी। राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य दे रखा है।
भारत सरकार की मंशा है कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी रोग से मुक्त किया जा सके। इसके लिए तेजी से अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने रोगियों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रखी हैं। जिससे लोग जागरुक हों और इलाज कराने के बाद पूर्णत: ठीक हो सकें। अफसरों के मुताबिक टीबी के अधिकांश मरीज मजदूर तबके के हैं, जो दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में निवास करते हैं। ऐसे लोग लापरवाही के चलते टीबी रोग की जांच कराने या तो अस्पताल नहीं पहुंच पाते या फिर उनके नजदीकी अस्पतालों में यह टीबी जांच की मशीन नहीं होती। जांच के बाद गंभीर रोगियों को दवा का वितरण किया जाएगा। सुझाव के लिए उनका उपचार किया जाएगा। कार्यवाहक जिला क्षय रोग अधिकारी शैलेश जैन ने बताया कि फिलहाल जनपद मेें करीब 3400 मरीज हैं। उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में सूबे के सभी जिला क्षय रोग अधिकारियों की प्रमुख सचिव ने लखनऊ में मीटिंग ली। इसमें सभी क्षय रोग अधिकारियों ने अपने अपने जिले की रिपोर्टिंग की। इस दौरान प्रमुख सचिव की ओर से जनपद बिजनौर को प्रदेश में दसवें स्थान दिया गया।
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