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संपति विवाद में दो भाईयों व पुत्र की जलाकर हत्या करने वाले को फांसी की सजा
Updated Tue, 01 Aug 2017 12:34 AM IST
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बिजनौर। एडीजे रजनीश कुमार ने संपत्ति विवाद में अपने दो सगे भाइयों व पुत्र को जलाकर मारने के आरोपी इरफान उर्फ नाका को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस तिहरे हत्याकांड को अत्यंत जघन्य विरलतम श्रेणी का अपराध मानते हुए मौत की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता संजीव वर्मा के अनुसार कस्बा नजीबाबाद के मोहल्ला मुगलूशाह निवासी आरोपी इरफान उर्फ नाका ने दूसरा निकाह कर लिया था। उसका, पहली पत्नी से पैदा पुत्र इस्लामुद्दीन इस निकाह से नाराज था। वह पिता की संपत्ति में अपना हिस्सा मांग रहा था। इसे लेकर पिता-पुत्र में विवाद था। आरोपी के भाई नौशाद व इरशाद भी इरफान द्वारा इस्लामुद्दीन को पीटने पर अपने भतीजे इस्लामुद्दीन का पक्ष लेते थे। वे इस्लामुद्दीन को संपत्ति दिलाने के पक्ष में थे। इस बात को लेकर इरफान उर्फ नाका इन तीनों से अत्यंत कुपित था। छह अगस्त की रात को इरफान के भाई नौशाद व इरशाद और उसका पुत्र इस्लामुद्दीन एक कमरे में सोए हुए थे। रात करीब साढ़े 12 बजे इरफान ने कमरे को बाहर से बंद कर दिया और अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। इससे तीनों बुरी तरह झुलस गए। चीख-पुकार मचने पर परिजनों व मोहल्लेवासियों ने इन तीनों को बुरी तरह जली हालत में दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला। उन्हें पूजा अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से गंभीर हालत में इन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान नौ अगस्त को इरशाद की व 18 अगस्त को नौशाद व इस्लामुद्दीन की मौत हो गई थी। इस घटना की रिपोर्ट आरोपी के ताऊ ससुर यूनुस ने दर्ज कराई थी। सात अगस्त को दिल्ली के अस्पताल में मजिस्ट्रेट को दिए अपने मृत्यु पूर्व बयान में इरशाद व इस्लामुद्दीन ने इरफान उर्फ नाका पर उन तीनों को कमरे में सोते वक्त ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने का आरोप लगाया था। विवेचक दरोगा विष्णु गोपाल उपाध्याय ने तीनों घायलों के बयानों की वीडियो भी बनवाई थी। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में आरोपी के सगे भाई शानू व सगी बहन सोनी, वादी यूनुस ने तीनों को जलाकर मारने के संबंध में इरफान के खिलाफ अपने बयान दिए थे। कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्य व मृत्यु पूर्व बयान को आधार मानते हुए इरफान को अपने भाई नौशाद व इरशाद तथा पुत्र इस्लामुद्दीन की जलाकर हत्या करने का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है।
कोर्ट में चली वीडियो
तिहरे हत्याकांड में सुनवाई के दौरान विवेचक द्वारा बनाई गई वीडियो की सीडी भी कोर्ट में चलाई गई। वीडियो में स्पष्ट रूप से तीनों घायलों ने विस्तार से अपने साथ हुई वारदात के बारे में बताया था। इसमें स्पष्ट रूप से उन्होंने इरफान द्वारा उन्हें कमरे में बंद कर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने की बात कही थी। वीडियो में रिकॉर्ड बयान व मजिस्ट्रेट द्वारा लिए गए मृत्युपूर्व बयान तथा इरफान के ससुर यूनुस, बहन सोनी, भाई शानू उर्फ शहनवाज, पड़ोसी इमरान की गवाही केस में दोष सिद्धि के लिए अहम साक्ष्य बनी।
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जमानत पर था इरफान
इरफान अपराधी प्रवृत्ति का है। वह उत्तराखंड में हुई एक हत्या के मामले में जेल जा चुका है। वारदात के वक्त इरफान जमानत पर छूटा हुआ था।
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शासकीय अधिवक्ता संजीव वर्मा के अनुसार कस्बा नजीबाबाद के मोहल्ला मुगलूशाह निवासी आरोपी इरफान उर्फ नाका ने दूसरा निकाह कर लिया था। उसका, पहली पत्नी से पैदा पुत्र इस्लामुद्दीन इस निकाह से नाराज था। वह पिता की संपत्ति में अपना हिस्सा मांग रहा था। इसे लेकर पिता-पुत्र में विवाद था। आरोपी के भाई नौशाद व इरशाद भी इरफान द्वारा इस्लामुद्दीन को पीटने पर अपने भतीजे इस्लामुद्दीन का पक्ष लेते थे। वे इस्लामुद्दीन को संपत्ति दिलाने के पक्ष में थे। इस बात को लेकर इरफान उर्फ नाका इन तीनों से अत्यंत कुपित था। छह अगस्त की रात को इरफान के भाई नौशाद व इरशाद और उसका पुत्र इस्लामुद्दीन एक कमरे में सोए हुए थे। रात करीब साढ़े 12 बजे इरफान ने कमरे को बाहर से बंद कर दिया और अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। इससे तीनों बुरी तरह झुलस गए। चीख-पुकार मचने पर परिजनों व मोहल्लेवासियों ने इन तीनों को बुरी तरह जली हालत में दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला। उन्हें पूजा अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से गंभीर हालत में इन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान नौ अगस्त को इरशाद की व 18 अगस्त को नौशाद व इस्लामुद्दीन की मौत हो गई थी। इस घटना की रिपोर्ट आरोपी के ताऊ ससुर यूनुस ने दर्ज कराई थी। सात अगस्त को दिल्ली के अस्पताल में मजिस्ट्रेट को दिए अपने मृत्यु पूर्व बयान में इरशाद व इस्लामुद्दीन ने इरफान उर्फ नाका पर उन तीनों को कमरे में सोते वक्त ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने का आरोप लगाया था। विवेचक दरोगा विष्णु गोपाल उपाध्याय ने तीनों घायलों के बयानों की वीडियो भी बनवाई थी। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में आरोपी के सगे भाई शानू व सगी बहन सोनी, वादी यूनुस ने तीनों को जलाकर मारने के संबंध में इरफान के खिलाफ अपने बयान दिए थे। कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्य व मृत्यु पूर्व बयान को आधार मानते हुए इरफान को अपने भाई नौशाद व इरशाद तथा पुत्र इस्लामुद्दीन की जलाकर हत्या करने का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है।
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कोर्ट में चली वीडियो
तिहरे हत्याकांड में सुनवाई के दौरान विवेचक द्वारा बनाई गई वीडियो की सीडी भी कोर्ट में चलाई गई। वीडियो में स्पष्ट रूप से तीनों घायलों ने विस्तार से अपने साथ हुई वारदात के बारे में बताया था। इसमें स्पष्ट रूप से उन्होंने इरफान द्वारा उन्हें कमरे में बंद कर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने की बात कही थी। वीडियो में रिकॉर्ड बयान व मजिस्ट्रेट द्वारा लिए गए मृत्युपूर्व बयान तथा इरफान के ससुर यूनुस, बहन सोनी, भाई शानू उर्फ शहनवाज, पड़ोसी इमरान की गवाही केस में दोष सिद्धि के लिए अहम साक्ष्य बनी।
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जमानत पर था इरफान
इरफान अपराधी प्रवृत्ति का है। वह उत्तराखंड में हुई एक हत्या के मामले में जेल जा चुका है। वारदात के वक्त इरफान जमानत पर छूटा हुआ था।