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बिजनौर गंगा बैराज पर रोज रहे 150 शवों के अंतिम संस्कार
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बिजनौर गंगा बैराज पर रोज रहे 150 शवों के अंतिम संस्कार
बिजनौर। जिले में कोरोना से ज्यादा बुखार से लोगों की मौत हो रही है। जिसके चलते श्मशान घाट व कब्रिस्तानों में लाशों के ढेर लगे हैं। गंगा बैराज पर रोजाना 150 से ज्यादा शवों के दाह संस्कार हो रहे हैं। आलम यह हैं कि एक-एक एंबुलेंस में तीन-तीन शव लाकर एक साथ चिताएं जलाई जा रही हैं। इन शवों के साथ कोई परिजन नहीं आ रहा है।
गंगा बैराज पर एक दिन में 20 से 25 चिताएं जलती थीं। तीन दिन पहले तक यह आंकड़ा 100 तक पहुंचा, लेकिन अब यह डेढ़ गुना हो गया है। गंगा बैराज पर रहने वाले उमेश कुमार के मुताबिक रोजाना दिन निकलने से लेकर देर रात तक चिताएं जलती रहती हैं। अब तो लोग सूर्यास्त होने के बाद भी चिताएं जला रहे हैं। चिता जलाने के लिए लोगों को वेटिंग में रहना पड़ रहा है। बिजनौर के अलावा उत्तराखंड व आसपास के जिलों के लोग भी शवों का दाह संस्कार करने यहां ला रहे हैं। रोजाना 20 से 25 एंबुलेंस अस्पतालों से शवों को लेकर बैराज पर पहुंच रही हैं। इनके पास कोई परिजन नहीं होता है। एक एंबुलेंस में तीन-तीन शव तक लाए जा रहे हैं। एक साथ तीन लोगों की चिताएं भी जल रही हैं।
यही आलम कब्रिस्तानों का भी है। सरकारी स्तर पर कोरोना से होने वाली मौतों का तो पता चल जाता है, लेकिन बुखार से गांव देहात में मरीजों की हो रही मौतों का किसी के पास कोई आंकड़ा नहीं है। शहर या गांव देहात में जो भी पुरुष या महिला बुखार की चपेट में आ गया उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। गांव देहात में लोग उपचार कराने के लिए अस्पतालों में जाने से बच रहे हैं। झोलाछापों के यहां ऐसे मरीजों की दिन रात भीड़ लगी हुई है। बुखार से पीड़ित ये लोग कोरोना की जांच कराने से भी बच रहे हैं और घर पर ही अपना उपचार कराने में लगे हैं।
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बिजनौर। जिले में कोरोना से ज्यादा बुखार से लोगों की मौत हो रही है। जिसके चलते श्मशान घाट व कब्रिस्तानों में लाशों के ढेर लगे हैं। गंगा बैराज पर रोजाना 150 से ज्यादा शवों के दाह संस्कार हो रहे हैं। आलम यह हैं कि एक-एक एंबुलेंस में तीन-तीन शव लाकर एक साथ चिताएं जलाई जा रही हैं। इन शवों के साथ कोई परिजन नहीं आ रहा है।
गंगा बैराज पर एक दिन में 20 से 25 चिताएं जलती थीं। तीन दिन पहले तक यह आंकड़ा 100 तक पहुंचा, लेकिन अब यह डेढ़ गुना हो गया है। गंगा बैराज पर रहने वाले उमेश कुमार के मुताबिक रोजाना दिन निकलने से लेकर देर रात तक चिताएं जलती रहती हैं। अब तो लोग सूर्यास्त होने के बाद भी चिताएं जला रहे हैं। चिता जलाने के लिए लोगों को वेटिंग में रहना पड़ रहा है। बिजनौर के अलावा उत्तराखंड व आसपास के जिलों के लोग भी शवों का दाह संस्कार करने यहां ला रहे हैं। रोजाना 20 से 25 एंबुलेंस अस्पतालों से शवों को लेकर बैराज पर पहुंच रही हैं। इनके पास कोई परिजन नहीं होता है। एक एंबुलेंस में तीन-तीन शव तक लाए जा रहे हैं। एक साथ तीन लोगों की चिताएं भी जल रही हैं।
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यही आलम कब्रिस्तानों का भी है। सरकारी स्तर पर कोरोना से होने वाली मौतों का तो पता चल जाता है, लेकिन बुखार से गांव देहात में मरीजों की हो रही मौतों का किसी के पास कोई आंकड़ा नहीं है। शहर या गांव देहात में जो भी पुरुष या महिला बुखार की चपेट में आ गया उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। गांव देहात में लोग उपचार कराने के लिए अस्पतालों में जाने से बच रहे हैं। झोलाछापों के यहां ऐसे मरीजों की दिन रात भीड़ लगी हुई है। बुखार से पीड़ित ये लोग कोरोना की जांच कराने से भी बच रहे हैं और घर पर ही अपना उपचार कराने में लगे हैं।
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