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इमरजेंसी का विरोध करने पर 140 लोग हुए थे गिरफ्तार

Mon, 25 Jun 2018 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Mon, 25 Jun 2018 12:26 AM IST
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140 people arrested for protesting emergency
प्रवीण शास्त्री। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में 25 जून को इमरजेंसी लगे हुए 43 साल हो जाएंगे। इमरजेंसी के दौरान जिले में भी कर्फ्यू जैसे हालात थे। इमरजेंसी का विरोध करने वाले रात को गुपचुप बैठक करते थे। रातोंरात कॉलेजों में विद्यार्थियों व शिक्षकों की डेस्क पर इमरजेंसी के विरोध में पर्चे रख दिए जाते थे। जिले भर में सत्याग्रह आंदोलन चलाए गए। लोकतंत्र की बहाली के लिए लोकतंत्र रक्षक सेनानियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। 
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बिजनौर निवासी आरएसएस से जुड़े पंडित प्रवीण शास्त्री उस समय 14 साल के थे। 25 जून 1975 को उनका परीक्षाफल आया था। प्रवीण शास्त्री बताते हैं कि उस समय इंदिरा गांधी का बहुत विरोध था। वे 26 जून की सुबह उठे तो पता चला कि देश में इमरजेंसी लग गई है। आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। प्रवीण शास्त्री के अनुसार उन्होंने इमरजेंसी के विरोध में गुपचुप सभाएं करनी शुरू कीं। रात में ही स्कूल-कॉलेजों में इमरजेंसी के विरोध वाले पत्र रखे जाते थे। वे स्कूल जाते थे तो जंगल के रास्ते से। पुलिस ने परिजनों को उनका घर फूंकने की धमकी दी, फिर भी वे नहीं डरे। उन्होंने 1 दिसंबर 1975 को इमरजेंसी के विरोध में अपने साथियों अभिमन्यु, जसवंत सिंह, योगेश्वर भटनागर व मायाराम के साथ धामपुर के बाजार में सत्याग्रह आंदोलन किया। इंदिरा गांधी के खिलाफ नारे लगाए। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और पूरी रात थाने में रखा। वे जेल गए और जेल में भी सत्याग्रह जारी रखा। फरवरी 2016 में इमरजेंसी में ढील होने पर उन्हें जेल से रिहा किया गया। इसके बाद भी सीआईडी काफी समय तक उनके पीछे लगी रही। प्रवीण शास्त्री के मुताबिक 49 लोकतंत्र रक्षक सेनानी आज भी जिंदा हैं। 
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आरएसएस प्रचारक शिवकुुमार ने रात में बैठक कर चलाया अभियान
लोकतंत्र रक्षक सेनानी शिव कुमार शर्मा इमरजेंसी के समय जिले में संघ के प्रचारक बनकर आए थे। इमरजेंसी में जनता के दिल में इंदिरा गांधी की दहशत बैठ गई। जनता विरोध करना चाहती थी, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे हिम्मत नहीं कर पाती थी। इमरजेंसी के खिलाफ उन्होंने पूरे जिले में रात में बैठक कर अभियान चलाया। यह बैठकें बहुत गोपनीय होती थीं। शिव कुमार शर्मा के मुताबिक उनके जिले में नया होने के कारण पुलिस उन्हें पहचानती नहीं थी। उन्होंने 14 दिसंबर को कलक्ट्रेट में अपने साथियों भगवतशरण खन्ना, लाखन सिंह, महावीर सिंह के साथ सत्याग्रह आंदोलन किया। पुलिस ने उन्हें जेल में डाल दिया। जेल में रहते हुए भी कई दिनों तक धरना दिया। जनता दल की सरकार बनने पर वे जेल से बाहर आए। वे 22 मार्च 1977 को जेल से रिहा हुए थे। अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह गहलौत इमरजेंसी के दौरान जेल में चौधरी चरण सिंह से मिले थे। चौधरी चरण सिंह ने उन्हें इंदिरा गांधी को लिखा पत्र दिया था। यह पत्र उन्होंने किसी तरह इंदिरा गांधी तक पहुंचाया था। चंद्रवीर सिंह गहलोत के मुताबिक यह पत्र पढ़ने के बाद ही इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी में ढील शुरू की थी। 
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धमकी देते थे कांग्रेसी 
पंडित प्रवीण शास्त्री के अनुसार इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता विरोध करने वालों को धमकी देते घूमते थे। एक बार उन्होंने किसी से सुना था कि इंदिरा गांधी ने कहा है कि अब हिंदुस्तान   में उनके खिलाफ कुत्ता भी नहीं भौंक सकता है। लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सरकार द्वारा अनेक सुविधाएं दी जाती हैं। मुलायम सिंह यादव ने प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने पर लोकतंत्र सेनानियों के   लिए 500 रुपये महीना सम्मान राशि देनी शुरू की थी जो बढ़ाते बढ़ाते 15 हजार रुपये कर दी। बसों में किराए में भी छूट मिलती   है। मुलायम सिंह ने लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सबसे  ज्यादा सम्मान दिया है। 
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