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हैदरपुर वैटलैंड में दिखे 140 बारसिंघा, अभी दो दिन और ड्रोन कैमर से होगी गणना
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बिजनौर-मुजफ्फरनगर की सीमा पर बने हैदरपुर वैटलैंड में घूमता बारहसिंघो का झुंड। (फोटो सौजन्य आशीष ?
- फोटो : BIJNOR
हैदरपुर वैटलैंड में दिखे 140 बारसिंघा
- अभी दो दिन और ड्रोन कैमर से होगी गणना, टीम को दिखे बारहसिंघा के बड़े बड़े झुंड
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून की टीम ने ड्रोन कैमरे से हैदरपुर वैटलैंड में बाहरसिंघा की गिनती शुरू कर दी है। टीम को पहले ही दिन वैटलैंड में 140 बाहरसिंघा दिखे हैं। अभी दो दिन और बारहसिंघा की गणना चलेगी। यह गिनती अभी और बढ़ने की संभावना है।
हस्तिनापुर सेंक्चुरी में लंबे समय बाद बारहसिंघा दिख रहे हैं। इस सेंक्चुरी को बारहसिंघा को संरक्षण देने के लिए ही बनाया गया था। बारसिंघा के पैरों के तले बहुत नाजुक होते हैं। ये कठोर जमीन वाले जंगल में खुद को वहां के माहौल के हिसाब से ढाल नहीं पाते हैं। गंगा किनारे का रेतीला व दलदला क्षेत्र इनके लिए बहुत उपयुक्त होता है। केदारनाथ आपदा से पहले हैदरपुर गंगा किनारे बारहसिंघा के बड़े बड़े झुंड दिखाई देते थे, लेकिन वे बाढ़ में बह गए थे। अब हैदरपुर वैटलैंड में श्री श्री रविशंकर की आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े आशीष लोया को बारहसिंघा का झुंड दिखाई दिया था। उनकी इस सूचना पर वन विभाग ने वैटलैंड में बारहसिंघा की गणना करानी शुरू की है। शुक्रवार को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून से आए सेजल, सुतोश्री, सोहिनी, तथागतो ने आशीष लोया के साथ मिलकर ड्रोन कैमरे से वैटलैंड में बारहसिंघा की गणना की। पहले दिन 140 बारसिंघा दिखे हैं। सभी झुंड में थे। इनके काफी शावक भी टीम को दिखे हैं। आशीष लोया का कहना है कि अभी गणना दो दिन और चलेगी। उन्होंने बताया कि हैदरपुर वैटलैंड में पक्षियों और अन्य वन्य जीवों का खजाना देखने को मिल रहा है। यहां आने वाले समय में वन्य संपदा और ज्यादा बढ़ेगी।
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- अभी दो दिन और ड्रोन कैमर से होगी गणना, टीम को दिखे बारहसिंघा के बड़े बड़े झुंड
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून की टीम ने ड्रोन कैमरे से हैदरपुर वैटलैंड में बाहरसिंघा की गिनती शुरू कर दी है। टीम को पहले ही दिन वैटलैंड में 140 बाहरसिंघा दिखे हैं। अभी दो दिन और बारहसिंघा की गणना चलेगी। यह गिनती अभी और बढ़ने की संभावना है।
हस्तिनापुर सेंक्चुरी में लंबे समय बाद बारहसिंघा दिख रहे हैं। इस सेंक्चुरी को बारहसिंघा को संरक्षण देने के लिए ही बनाया गया था। बारसिंघा के पैरों के तले बहुत नाजुक होते हैं। ये कठोर जमीन वाले जंगल में खुद को वहां के माहौल के हिसाब से ढाल नहीं पाते हैं। गंगा किनारे का रेतीला व दलदला क्षेत्र इनके लिए बहुत उपयुक्त होता है। केदारनाथ आपदा से पहले हैदरपुर गंगा किनारे बारहसिंघा के बड़े बड़े झुंड दिखाई देते थे, लेकिन वे बाढ़ में बह गए थे। अब हैदरपुर वैटलैंड में श्री श्री रविशंकर की आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े आशीष लोया को बारहसिंघा का झुंड दिखाई दिया था। उनकी इस सूचना पर वन विभाग ने वैटलैंड में बारहसिंघा की गणना करानी शुरू की है। शुक्रवार को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून से आए सेजल, सुतोश्री, सोहिनी, तथागतो ने आशीष लोया के साथ मिलकर ड्रोन कैमरे से वैटलैंड में बारहसिंघा की गणना की। पहले दिन 140 बारसिंघा दिखे हैं। सभी झुंड में थे। इनके काफी शावक भी टीम को दिखे हैं। आशीष लोया का कहना है कि अभी गणना दो दिन और चलेगी। उन्होंने बताया कि हैदरपुर वैटलैंड में पक्षियों और अन्य वन्य जीवों का खजाना देखने को मिल रहा है। यहां आने वाले समय में वन्य संपदा और ज्यादा बढ़ेगी।

बिजनौर-मुजफ्फरनगर की सीमा पर बने हैदरपुर वैटलैंड में घूमता बारहसिंघो का झुंड। (फोटो सौजन्य आशीष ?- फोटो : BIJNOR
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