{"_id":"5ab7f23a4f1c1be93f8b4dac","slug":"131522004538-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामाजिक समरसता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामाजिक समरसता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
Updated Mon, 26 Mar 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नजीबाबाद। पृथ्वी पर हर एक चीज एक दूसरे से जुड़ी है। समरसता एक वैज्ञानिक पद्धति है। भगवान श्रीराम हमारे आदर्श हैं। हमें भारतीय संस्कृति की पहचान को बनाए रखने के लिए सामाजिक समरसता को मजबूती प्रदान करना है। राष्ट्रीय संगोष्ठी में यह बात केंद्रीय विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर बीके कुठियाला ने कही।
तपोभूमि विचार परिषद पश्चिमी उत्तर प्रदेश मेरठ की ओर से नजीबाबाद के एनआईआईटी में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। सामाजिक समरसता भारतीय ज्ञान संपदा का अभिन्न अंग है विषय से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति से जुड़े समरसता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। भारत मां और श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ संगोष्ठी शुरू हुई।
मुख्यवक्ता केंद्रीय विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रोफेसर बीके कुठियाला ने कहा कि समरसता भारत की एक ऐसी वैैज्ञानिक पद्धति है जो एक दूसरे पर निर्भर रहते हुए आपस में जुड़ी है। उन्होंने भारत को जोड़ने वाले उद्घोष और लेखन से समरसता की जड़ों को सींचने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय घुमंतू जाति आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भीकू आर इदाते और प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय टोली सदस्य राजेंद्र चड्ढा ने हिंदू समाज से जाति बंधन से ऊपर उठकर एक पुष्प की माला बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत भूमि संतों, मुनियों और राष्ट्रभक्तों के खून पसीने से सींची गई तपोभूमि है जिसने दुनिया को समरसता का संदेश दिया है।
विज्ञापन
सांसद डॉ.यशवंत सिंह की अध्यक्षता और निवेदिता के संचालन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में एनआईआईटी के एमडी अवनीश अग्रवाल, तपोभूमि विचार परिषद के डॉ.आरपी भारद्वाज, वीरपाल सिंह ने सामाजिक समरसता पर चर्चा की। समंवयक डॉ.एलएस बिष्ट, संयोजक सुधीर भुईयार, सचिव डॉ.एमपी काला के निर्देेशन में आयोजित संगोष्ठी में सुभाष राजपूत, नकुल अग्रवाल, डॉ.बेगराज सिंह, डॉ.नवनीत, तरूण अग्रवाल, हेमंत अग्रवाल, डॉ.अनिल यादव ने अतिथि वक्ताओं का स्वागत किया।
विज्ञापन
तपोभूमि विचार परिषद पश्चिमी उत्तर प्रदेश मेरठ की ओर से नजीबाबाद के एनआईआईटी में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। सामाजिक समरसता भारतीय ज्ञान संपदा का अभिन्न अंग है विषय से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति से जुड़े समरसता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। भारत मां और श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ संगोष्ठी शुरू हुई।
विज्ञापन
मुख्यवक्ता केंद्रीय विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रोफेसर बीके कुठियाला ने कहा कि समरसता भारत की एक ऐसी वैैज्ञानिक पद्धति है जो एक दूसरे पर निर्भर रहते हुए आपस में जुड़ी है। उन्होंने भारत को जोड़ने वाले उद्घोष और लेखन से समरसता की जड़ों को सींचने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय घुमंतू जाति आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भीकू आर इदाते और प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय टोली सदस्य राजेंद्र चड्ढा ने हिंदू समाज से जाति बंधन से ऊपर उठकर एक पुष्प की माला बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत भूमि संतों, मुनियों और राष्ट्रभक्तों के खून पसीने से सींची गई तपोभूमि है जिसने दुनिया को समरसता का संदेश दिया है।
विज्ञापन
सांसद डॉ.यशवंत सिंह की अध्यक्षता और निवेदिता के संचालन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में एनआईआईटी के एमडी अवनीश अग्रवाल, तपोभूमि विचार परिषद के डॉ.आरपी भारद्वाज, वीरपाल सिंह ने सामाजिक समरसता पर चर्चा की। समंवयक डॉ.एलएस बिष्ट, संयोजक सुधीर भुईयार, सचिव डॉ.एमपी काला के निर्देेशन में आयोजित संगोष्ठी में सुभाष राजपूत, नकुल अग्रवाल, डॉ.बेगराज सिंह, डॉ.नवनीत, तरूण अग्रवाल, हेमंत अग्रवाल, डॉ.अनिल यादव ने अतिथि वक्ताओं का स्वागत किया।