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विधायक को पकडने गई पुलिस स्टे देखकर लौटी खाली हाथ
Updated Tue, 08 Aug 2017 12:24 AM IST
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विधायक को पकड़ने गई पुलिस स्टे देखकर लौटी
नगीना (बिजनौर)। जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण के मामले में बिजनौर पुलिस ने सोमवार की दोपहर सपा से नगीना विधायक मनोज पारस को पकड़ने के लिए उनके आवास पर छापामारी की। लेकिन विधायक ने 15 दिन का स्टे दिखा दिया, जिसके बाद पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। इस दौरान विधायक व पुलिस में नोकझोंक भी हुई।
उत्तराखंड के थाना लक्ष्मण झूला ऋषिकेश में वर्ष 2013 में 18 जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण के मामले में विधायक मनोज पारस, तत्कालीन सपा सरकार के मंत्री रहे मूलचंद चौहान, मंत्री के पुत्र अमित प्रताप सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन समेत कई सपा नेताओं पर मुकदमा दर्ज है। इस मामले में पौड़ी न्यायालय में विधायक मनोज पारस के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। मनोज पारस को पकड़ने की जिम्मेदारी पौड़ी पुलिस को दी गई थी, लेकिन पौड़ी पुलिस विधायक को पकड़ने में नाकाम रही।
इसके बाद विधायक को पकड़ने की जिम्मेदारी बिजनौर पुलिस को दी गई। बिजनौर एसपी अतुल शर्मा के निर्देश पर सीओ नगीना ब्रजराज और सीओ धामपुर के नेतृत्व में पुलिस ने विधायक मनोज पारस को पकड़ने के लिए सोमवार की दोपहर उनके आवास पर छापामारी की। इस दौरान कई थानों की पुलिस भी मौजूद रही। विधायक का आवास छाबनी में तब्दील हो गया। विधायक मनोज पारस ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया। काफी देर तक विधायक और पुलिस अधिकारियों में नोकझोंक चलती रही। शाम को मनोज पारस ने पुलिस अधिकारियों को स्टे की कॉपी दिखाई। पुलिस अधिकारियों ने स्टे की कॉपी पौड़ी एसपी को भेजी, जो जांच में सही पाई गई। आखिर में पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।
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नगीना (बिजनौर)। जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण के मामले में बिजनौर पुलिस ने सोमवार की दोपहर सपा से नगीना विधायक मनोज पारस को पकड़ने के लिए उनके आवास पर छापामारी की। लेकिन विधायक ने 15 दिन का स्टे दिखा दिया, जिसके बाद पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। इस दौरान विधायक व पुलिस में नोकझोंक भी हुई।
उत्तराखंड के थाना लक्ष्मण झूला ऋषिकेश में वर्ष 2013 में 18 जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण के मामले में विधायक मनोज पारस, तत्कालीन सपा सरकार के मंत्री रहे मूलचंद चौहान, मंत्री के पुत्र अमित प्रताप सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन समेत कई सपा नेताओं पर मुकदमा दर्ज है। इस मामले में पौड़ी न्यायालय में विधायक मनोज पारस के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। मनोज पारस को पकड़ने की जिम्मेदारी पौड़ी पुलिस को दी गई थी, लेकिन पौड़ी पुलिस विधायक को पकड़ने में नाकाम रही।
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इसके बाद विधायक को पकड़ने की जिम्मेदारी बिजनौर पुलिस को दी गई। बिजनौर एसपी अतुल शर्मा के निर्देश पर सीओ नगीना ब्रजराज और सीओ धामपुर के नेतृत्व में पुलिस ने विधायक मनोज पारस को पकड़ने के लिए सोमवार की दोपहर उनके आवास पर छापामारी की। इस दौरान कई थानों की पुलिस भी मौजूद रही। विधायक का आवास छाबनी में तब्दील हो गया। विधायक मनोज पारस ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया। काफी देर तक विधायक और पुलिस अधिकारियों में नोकझोंक चलती रही। शाम को मनोज पारस ने पुलिस अधिकारियों को स्टे की कॉपी दिखाई। पुलिस अधिकारियों ने स्टे की कॉपी पौड़ी एसपी को भेजी, जो जांच में सही पाई गई। आखिर में पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।
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