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छात्र-छात्राओं ने वेस्ट फूलों से तैयार किया प्रोजेक्ट
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:03 AM IST
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वेस्ट फूलों से तैयार किया प्रोजेक्ट
बिजनौर। बिजनौर पब्लिक स्कूल के कक्षा आठ के छात्र-छात्राओं ने मंदिरों, बैैंक्वेट हॉल आदि से वेस्ट फूलों को एकत्रित कर एक बेहतरीन प्रोजेक्ट तैयार किया। प्रोजेक्ट के तहत छात्र-छात्राएं धूपबत्ती, अगरबत्ती, खाद, प्राकृतिक रंग वस्तुओं का निर्माण करेंगे। 29 नवंबर को आरजेपी इंटर कॉलेज में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में छात्र-छात्राएं अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे।
प्रधानाचार्य संजीव कुमार राठी के अनुसार विद्यालय के छात्र-छात्राएं एनसीएससी (राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस) द्वारा दिए गए विषय क्लीन इंडिया, ग्रीन इंडिया एवं स्वच्छ भारत मिशन के तहत अपने अंदर छिपी वैज्ञानिक प्रतिभा को तराशने का कार्य कर रहे हैं। जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों ने बताया कि प्लास्टिक, मैटल और कांच आदि वस्तुएं तो पुन:उपयोग में लाई जा सकती हैं। परंतु फूल जो प्रकृति का एक सुंदर उपहार है, ये प्रतिदिन क्विंटलों की मात्रा में मंदिरों, अन्य धार्मिक स्थलों, बैंक्वेट हॉल, घरों आदि में सजावट के काम में लाए जाते हैं। इसके बावजूद प्रयोग करने के बाद फूलों को इधर-उधर फेंक दिया जाता है या फिर गंगा आदि पवित्र नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता है। इससे एक ओर प्रदूषण फैलता है तो दूसरी ओर इनका कोई और प्रयोग नहीं हो पाता। इसी को ध्यान में रखते हुए कक्षा आठवीं के विद्यार्थी वैभव सोनी, कार्तिक राजपूत ने अपनी शिक्षिका शिप्रा चौधरी के साथ मिलकर मंदिरों आदि धार्मिक स्थलों से फूलों को एकत्रित कर प्रोजेक्ट तैयार किया।
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बिजनौर। बिजनौर पब्लिक स्कूल के कक्षा आठ के छात्र-छात्राओं ने मंदिरों, बैैंक्वेट हॉल आदि से वेस्ट फूलों को एकत्रित कर एक बेहतरीन प्रोजेक्ट तैयार किया। प्रोजेक्ट के तहत छात्र-छात्राएं धूपबत्ती, अगरबत्ती, खाद, प्राकृतिक रंग वस्तुओं का निर्माण करेंगे। 29 नवंबर को आरजेपी इंटर कॉलेज में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में छात्र-छात्राएं अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे।
प्रधानाचार्य संजीव कुमार राठी के अनुसार विद्यालय के छात्र-छात्राएं एनसीएससी (राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस) द्वारा दिए गए विषय क्लीन इंडिया, ग्रीन इंडिया एवं स्वच्छ भारत मिशन के तहत अपने अंदर छिपी वैज्ञानिक प्रतिभा को तराशने का कार्य कर रहे हैं। जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों ने बताया कि प्लास्टिक, मैटल और कांच आदि वस्तुएं तो पुन:उपयोग में लाई जा सकती हैं। परंतु फूल जो प्रकृति का एक सुंदर उपहार है, ये प्रतिदिन क्विंटलों की मात्रा में मंदिरों, अन्य धार्मिक स्थलों, बैंक्वेट हॉल, घरों आदि में सजावट के काम में लाए जाते हैं। इसके बावजूद प्रयोग करने के बाद फूलों को इधर-उधर फेंक दिया जाता है या फिर गंगा आदि पवित्र नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता है। इससे एक ओर प्रदूषण फैलता है तो दूसरी ओर इनका कोई और प्रयोग नहीं हो पाता। इसी को ध्यान में रखते हुए कक्षा आठवीं के विद्यार्थी वैभव सोनी, कार्तिक राजपूत ने अपनी शिक्षिका शिप्रा चौधरी के साथ मिलकर मंदिरों आदि धार्मिक स्थलों से फूलों को एकत्रित कर प्रोजेक्ट तैयार किया।
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