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बिजनौर जिले में हर घंटे जन्म ले रहे हैं 11 बच्चे
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11 children are being born every hour in Bijnor district
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बिजनौर जिले में हर घंटे जन्म ले रहे हैं 11 बच्चे
बिजनौर। जिले की जनसंख्या वृद्धि दर देश की जन्म दर से कहीं अधिक आ रही है। जिले में हर महीने औसतन आठ हजार से अधिक बच्चे पैदा हो रहे हैं। हालांकि परिवार नियोजन को भी अब जिलेेवासी अपना रहे हैं। जिले की जनसंख्या वृद्धि दर में कमी लाने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर घंटे 11 बच्चे जन्म ले रहे हैं।
जिले में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। 2011 में हुई जनगणना में जिले की जनसंख्या करीब 36.5 लाख थी, जो अब बढ़कर 42 लाख होने का अनुमान लगाया जाता है। सीमित संसाधनों के बीच बच्चों को पालने के लिए आबादी भी सीमित होनी चाहिए। देश की जन्म दर 17 प्रतिशत है, जबकि जिले की जन्म दर 24 प्रतिशत से भी अधिक है। जनसंख्या बढ़ने का असर भी दिखता है और जहां पहले खेत खलिहान थे, वहां पर अब कॉलोनी कटी हुई नजर आती हैं। जन्म दर को नियंत्रित रखने के लिए काफी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और दंपतियों को इससे जोड़ा भी जा रहा है। नवविवाहिताओं को शादी के दो साल तक बच्चे न करने व एक के बाद दूसरे बच्चे में तीन से पांच साल तक का अंतर रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। परिवार नियोजन के अन्य साधनों को भी अपनाने की अपील की जा रही है।
दंपतियों को कर रहे जागरूक
एसीएमओ डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि जन्म दर को जागरूकता से ही कम किया जा सकता है। इसके लिए बहुत प्रयास किए जा रहे हैं। जिलेवासी अब परिवार नियोजन को पहले से ज्यादा अपना रहे हैं। सभी दंपती को इसमें सहयोग करना चाहिए।
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बिजनौर। जिले की जनसंख्या वृद्धि दर देश की जन्म दर से कहीं अधिक आ रही है। जिले में हर महीने औसतन आठ हजार से अधिक बच्चे पैदा हो रहे हैं। हालांकि परिवार नियोजन को भी अब जिलेेवासी अपना रहे हैं। जिले की जनसंख्या वृद्धि दर में कमी लाने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर घंटे 11 बच्चे जन्म ले रहे हैं।
जिले में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। 2011 में हुई जनगणना में जिले की जनसंख्या करीब 36.5 लाख थी, जो अब बढ़कर 42 लाख होने का अनुमान लगाया जाता है। सीमित संसाधनों के बीच बच्चों को पालने के लिए आबादी भी सीमित होनी चाहिए। देश की जन्म दर 17 प्रतिशत है, जबकि जिले की जन्म दर 24 प्रतिशत से भी अधिक है। जनसंख्या बढ़ने का असर भी दिखता है और जहां पहले खेत खलिहान थे, वहां पर अब कॉलोनी कटी हुई नजर आती हैं। जन्म दर को नियंत्रित रखने के लिए काफी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और दंपतियों को इससे जोड़ा भी जा रहा है। नवविवाहिताओं को शादी के दो साल तक बच्चे न करने व एक के बाद दूसरे बच्चे में तीन से पांच साल तक का अंतर रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। परिवार नियोजन के अन्य साधनों को भी अपनाने की अपील की जा रही है।
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दंपतियों को कर रहे जागरूक
एसीएमओ डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि जन्म दर को जागरूकता से ही कम किया जा सकता है। इसके लिए बहुत प्रयास किए जा रहे हैं। जिलेवासी अब परिवार नियोजन को पहले से ज्यादा अपना रहे हैं। सभी दंपती को इसमें सहयोग करना चाहिए।
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