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कूंची से की सामाजिक बुराइयों पर चोट
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Sun, 21 Feb 2016 01:58 AM IST
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ये बातें केेएनपीजी के प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार वर्मा ने चित्रकला परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय कला प्रदर्शनी रंग-तरंग के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि कला का स्वरूप गहन अनुभूतियों से जुड़ा है। देखने वाले की आंखें और संवेदना कितनी गहराई तक पहुंच पाती है, इससे रंग-तरंग के महत्व का पता चलता है।
केएनपीजी के चित्रकला विभाग की ओर से आयोजित रंग-तरंग प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने अपनी कला का पेंटिंग के माध्यम से प्रदर्शन किया।
शिक्षकों और प्रदर्शनी में आए अन्य तमाम लोगों ने चित्रों का अवलोकन किया। कलाकारों ने सामाजिक बुराइयों पर चोट करती तस्वीरों को उकेरकर समाज को सही राह दिखाने का प्रयास किया।
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इस दौरान सामाजिक, संस्कृतिक, कलात्मक नारी शोषण, ग्रामीण परिवेश, पौढ़ शिक्षा, दहेज हत्या, धार्मिक, सामाजिक पर्वों पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई।
प्रदर्शनी में तैल रंग, जल रंग, एक्रैलिक, मिश्रित एवं पेन इंक विधि से बनाएं गए चित्र लगाए गए थे। राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डीएन सिंह ने कहा कि कला से ही चेतना, आविष्कार और संस्कार जन्म लेते हैं।
प्रदर्शनी में विष्णुदेव शुक्ल, रवि विश्वकर्मा, प्रभाकर मौर्य, संतोष सरोज, वीरेंद्र पाल, चंद्रशेखर, अशरफ अली, आंचल रावत, मीनू, पूजा सिंह, ज्योति आदि कलाकरों ने अपने चित्रों को प्रदर्शित किया। समापन समारोह में चित्रकला विभागाध्यक्ष डॉ. रोशन प्रसाद, डॉ. रमेश यादव, डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, डॉ. दीप नारायण मिश्र, डॉ. प्रियंका, डॉ. माला श्रीवास्तव, डॉ. अजय सिंह, डॉ. प्रियंका मराल, डॉ. पीएन डोगरे आदि मौजूद रहे। अंत में प्राचार्य ने नारियल फोड़कर प्रदर्शनी का समापन किया।
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इस मौके पर उन्होंने कहा कि कला का स्वरूप गहन अनुभूतियों से जुड़ा है। देखने वाले की आंखें और संवेदना कितनी गहराई तक पहुंच पाती है, इससे रंग-तरंग के महत्व का पता चलता है।
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केएनपीजी के चित्रकला विभाग की ओर से आयोजित रंग-तरंग प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने अपनी कला का पेंटिंग के माध्यम से प्रदर्शन किया।
शिक्षकों और प्रदर्शनी में आए अन्य तमाम लोगों ने चित्रों का अवलोकन किया। कलाकारों ने सामाजिक बुराइयों पर चोट करती तस्वीरों को उकेरकर समाज को सही राह दिखाने का प्रयास किया।
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इस दौरान सामाजिक, संस्कृतिक, कलात्मक नारी शोषण, ग्रामीण परिवेश, पौढ़ शिक्षा, दहेज हत्या, धार्मिक, सामाजिक पर्वों पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई।
प्रदर्शनी में तैल रंग, जल रंग, एक्रैलिक, मिश्रित एवं पेन इंक विधि से बनाएं गए चित्र लगाए गए थे। राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डीएन सिंह ने कहा कि कला से ही चेतना, आविष्कार और संस्कार जन्म लेते हैं।
प्रदर्शनी में विष्णुदेव शुक्ल, रवि विश्वकर्मा, प्रभाकर मौर्य, संतोष सरोज, वीरेंद्र पाल, चंद्रशेखर, अशरफ अली, आंचल रावत, मीनू, पूजा सिंह, ज्योति आदि कलाकरों ने अपने चित्रों को प्रदर्शित किया। समापन समारोह में चित्रकला विभागाध्यक्ष डॉ. रोशन प्रसाद, डॉ. रमेश यादव, डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, डॉ. दीप नारायण मिश्र, डॉ. प्रियंका, डॉ. माला श्रीवास्तव, डॉ. अजय सिंह, डॉ. प्रियंका मराल, डॉ. पीएन डोगरे आदि मौजूद रहे। अंत में प्राचार्य ने नारियल फोड़कर प्रदर्शनी का समापन किया।