सीतामढ़ी। गंगा का रौद्र रूप अब तटवर्ती गावों की मुसीबत बढ़ाने लगी है। बस्तियों में दो से तीन फीट तक पानी भरने से प्रभावित लोग सुरक्षित स्थानों पर रुख करने लगे हैं। छह गावों में कटान की रफ्तार बढ़ गई है। अब तक छह बिस्वा से अधिक जमीन गंगा में समा चुकी है जबकि डेढ़ हजार बीघे फसल डूबकर नष्ट हो गई। उधर, डीएम के सख्त तेवर से अधिकारी अलर्ट मोड में है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कानूनगो, लेखपाल और अमीन कैंप कर चुके हैं। पीड़ितों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उधर, जलस्तर आधा सेमी प्रति घंटे बढ़ रहा है। बाढ़ की दृष्टि से अतिसंवेदनशील कोनिया क्षेत्र तीन ओर गंगा से घिरा हुआ है। कटान के साथ क्षेत्र के कई गांव के सैकड़ों किसानों करीब डेढ हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई है। इटहरा, छेछुआ, भुर्रा, बसगोती मवैया सहित छह गावों में कटान तेज है। जलस्तर बढ़ने से हरीरामपुर के निषाद, इटहरा के डफ़ाली, मवैया थान सिंह के ठाकुर और कलिकमवैया की विश्वकर्मा बस्ती में पानी पहुंच गया है। बाढ़ का पानी पहुंचने से लोग सकते में हैं। डीघ, बनकट, बारीपुर और नारेपार आदि गांव में बाढ़ का पानी बस्तियों की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग सीतामढ़ी के प्रभारी दिनेश शर्मा ने बताया कि मीटर गेज पर गंगा का जलस्तर 80.420 मीटर तक पहुंच गया है। जो खतरे के निशान से ऊपर है। सीतामढ़ी और बारीपुर मैं बारिश के पानी को गंगा में निकासी के लिए बने तट बंध से गंगा का पानी ओवरफ्लो कर उल्टा आने लगा है। कौलापुर : क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बदरी और सामुदायिक शौचालय में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। जिससे शिक्षक स्कूल में नहीं पहुंच सके। औराई के टेढ़वा में सैकड़ो बीघे फसल डूब गई है। रामपुर घाट स्थित बाढ़ राहत शिविर में नायब तहसीलदार संजय के नेतृत्व में अमीन और लेखपाल राहत कार्य में लगे है। मंगलवार को राहत शिविर के कर्मचारियों ने करीब 70 पीड़ितों को भोजन का पैकट और जरूरी सामान पहुंचाया। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष बसगोती मवैया निवासी महेश सिंह के घर मे पानी घुस गया है। घर के लोग पहली मंजिल पर शरण ले लिए हैं। ओमकार नाथ मिश्रा, मंटू सिंह, शेरा सिंह और संतोष सिंह के घर के बाहर बाढ़ का पानी भरा है। कलिक मवैया के लोहार बस्ती में पानी पहुंच गया है। इसी प्रकार देवीप्रसाद , बड़कऊ, पंडित लोहार, गोल्हई लोहार के घर के सामने पानी भर रहा है। हरिरामपुर गांव का प्राचीन शिवालय पानी मे डूब गया है। मल्हाल बस्ती में संजय निषाद, राहुल निषाद के घर के सामने और एक बाइक गैरेज में पानी भर गया है। इटहरा गांव के डफाली बस्ती में पानी भर जाने से एक कुनबे के 22 लोगों को विमल सिंह महाविद्यालय इटहरा में आश्रय मिला है। टहरा के पश्चिम वाहिनी गंगा तट पर स्थित डमरू बाबा आश्रम पूरी तरह बाढ़ के पानी मे डूब गया है। आश्रम के चारों ओर आठ से 10 फीट तक पानी लग चुका है। डमरू बाबा अपनी दो गायों और गाय के दो बच्चों के साथ आश्रम के दूसरे मंजिल पर शरण लिए हुए हैं। आश्रम तक जाने के सभी रास्ते पानी मे डूबे हुए है। नाव के सहारे जरूरी सामान पहुंचाए जा रहे हैं। राष्ट्रपति पुरस्कृत कलातुलसी गांव निवासी संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान प्रो. रामयत्न शुक्ल के हरिरामपुर गांव में स्थित घर तक जाने वाली सड़क पर तीन फिट से अधिक बाढ़ का पानी भर गया है। गंगेश्वरनाथ धाम से इटहरा पासी चौराहा की पक्की सड़क पर भर जाने से आवागमन बंद हो गया है।