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नलकूप खा रहे जंग, ढाई हजार बीघे की खेती हो रही प्रभावित
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नलकूप खा रहे जंग, ढाई हजार बीघे की खेती प्रभावित
ज्ञानपुर। जिले के सभी छह ब्लाक क्षेत्रों में खेती करने वाले करीब 50 हजार से ज्यादा किसानों को सिंचाई की सुविधा देने के लिए सरकार ने राजकीय नलकूप लगवाया है। उनके रख-रखाव पर लाखों रुपये खर्च भी किए जाते हैं। देख-रेख और मरम्मत के लिए कर्मी भी रखे गए हैं, लेकिन विभागीय कर्मियों व अधिकारियों की सुस्ती के कारण करीब 25 स्थानों के राजकीय नलकूप इन दिनों बंद पड़े हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को निजी नलकूपों पर आश्रित होना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत भी बढ़ रही है।
एक दशक पूर्व ग्राम पंचायत वार लगभग 520 नलकूपों की स्थापना की गई थी, लेकिन रख-रखाव के अभाव में कहीं ट्रांसफार्मर तो कहीं स्टार्टर, बोरिंग बैठने, नालियों के जर्जर होने से न वह चल पा रहे हैं न पानी खेतों तक पहुंच रहा है। डीघ के नारेपार, कलिक मवैया, अभोली के भंडा गांव में काफी दिनों से बंद पड़े नलकूप सब कुछ बयां करते हैं। भंडा गांव के किसान ओमप्रकाश सिंह, सुरेश सिंह, हेमंत सिंह, रामप्रसाद सिंह, गुलाब सिंह, रामचंद्र सिंह, शिवप्रताप सिंह, सुभाष उमर ने बताया कि राजकीय नलकूप बंद होने से किसानों को 90 से 120 रुपये प्रति घंटे देकर निजी नलकूपों से सिंचाई करना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है। कहा कि एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने में लगी है तो वहीं स्थानीय स्तर पर सुस्ती के कारण लागत बढ़ रही है और आय कम। विभागीय सूत्रों के अनुसार 25 से ज्यादा ही नलकूप बंद हैं।
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केस-एक
डीघ ब्लाक के नारेपार का राजकीय नलकूप संख्या 32 करीब दो माह से बंद पड़ा है। करीब 200 किसानों की खेती को सिंचित करने के लिए बनाए गए इस नलकूप के बंदी का कारण मोटर की खराबी बतायी जाती है। नलकूप न चलने से किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ता है।
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केस-दो
ज्ञानपुर तहसील के बनकट गांव में दो राजकी नलकूप लगाए गए हैं। उद्देश्य था कि सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। करीब एक साल से ज्यादा समय बीत गया लेकिन वह बंद पड़ा है। कोई इसका ठोस कारण भी नहीं बता पाता।
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किसानों की प्रतिक्रिया----
करीब दो माह से नलकूप खराब होने के कारण निजी नलकूप का सहारा लेना पड़ता है। इस वजह से खेती की लागत भी बढ़ जाती है। विभाग के अधिकारी नलकूप को देखने तक नहीं आते। शीघ्र ठीक कराया जाए।
- मुन्ना सिंह, नारेपार
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ग्राम सभा डीघ में पांच राजकीय नलकूपों में तीन खराब हैं। किसान खेती कैसे करें। शिकायतों के बावजूद विभाग के लोग समस्या समाधान करते ही नहीं हैं। किसान परेशान हैं। नलकूप के खराब होने से सैकड़ों बीघा फसल प्रभावित होती है।
- माता चरन तिवारी, डीघ
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भुर्रा का राजकीय नलकूप 30 वर्षो से बंद पड़ा है। छेछुआ के दो नलकूप में एक वर्षो से खराब है। गजाधरपुर गांव का राजकीय नलकूप तीन वर्षो से बंद पड़ा है और तुलसीकला का नलकूप एक वर्ष से बंद पड़ा है।
आदर्श पांडेय, कला तुलसी
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गांव का राजकीय नलकूप खराब है। नलकूप का पंप हाउस चारों ओर सरपत और घास फूस के जंगल से घिर गया है। न मोटर है न पाइपें और अन्य उपकरण किसान परेशान है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
हृदय नारायण दुबे, कलिक मवैया
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वर्जन---
ट्रांसफार्मर की कमी से बंद होने वाले नलकूपों को तीन से पांच दिन के अंदर चलवाने का प्रयास रहता है। अन्य खराबियों को दूर करने में बजट की कमी आड़े आती है। इसके लिए शासन को लिखापढ़ी की गई है।
- संजय भारती, अधिशासी अभियंता- नलकूप खंड
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ज्ञानपुर। जिले के सभी छह ब्लाक क्षेत्रों में खेती करने वाले करीब 50 हजार से ज्यादा किसानों को सिंचाई की सुविधा देने के लिए सरकार ने राजकीय नलकूप लगवाया है। उनके रख-रखाव पर लाखों रुपये खर्च भी किए जाते हैं। देख-रेख और मरम्मत के लिए कर्मी भी रखे गए हैं, लेकिन विभागीय कर्मियों व अधिकारियों की सुस्ती के कारण करीब 25 स्थानों के राजकीय नलकूप इन दिनों बंद पड़े हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को निजी नलकूपों पर आश्रित होना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत भी बढ़ रही है।
एक दशक पूर्व ग्राम पंचायत वार लगभग 520 नलकूपों की स्थापना की गई थी, लेकिन रख-रखाव के अभाव में कहीं ट्रांसफार्मर तो कहीं स्टार्टर, बोरिंग बैठने, नालियों के जर्जर होने से न वह चल पा रहे हैं न पानी खेतों तक पहुंच रहा है। डीघ के नारेपार, कलिक मवैया, अभोली के भंडा गांव में काफी दिनों से बंद पड़े नलकूप सब कुछ बयां करते हैं। भंडा गांव के किसान ओमप्रकाश सिंह, सुरेश सिंह, हेमंत सिंह, रामप्रसाद सिंह, गुलाब सिंह, रामचंद्र सिंह, शिवप्रताप सिंह, सुभाष उमर ने बताया कि राजकीय नलकूप बंद होने से किसानों को 90 से 120 रुपये प्रति घंटे देकर निजी नलकूपों से सिंचाई करना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है। कहा कि एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने में लगी है तो वहीं स्थानीय स्तर पर सुस्ती के कारण लागत बढ़ रही है और आय कम। विभागीय सूत्रों के अनुसार 25 से ज्यादा ही नलकूप बंद हैं।
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केस-एक
डीघ ब्लाक के नारेपार का राजकीय नलकूप संख्या 32 करीब दो माह से बंद पड़ा है। करीब 200 किसानों की खेती को सिंचित करने के लिए बनाए गए इस नलकूप के बंदी का कारण मोटर की खराबी बतायी जाती है। नलकूप न चलने से किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ता है।
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केस-दो
ज्ञानपुर तहसील के बनकट गांव में दो राजकी नलकूप लगाए गए हैं। उद्देश्य था कि सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। करीब एक साल से ज्यादा समय बीत गया लेकिन वह बंद पड़ा है। कोई इसका ठोस कारण भी नहीं बता पाता।
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किसानों की प्रतिक्रिया----
करीब दो माह से नलकूप खराब होने के कारण निजी नलकूप का सहारा लेना पड़ता है। इस वजह से खेती की लागत भी बढ़ जाती है। विभाग के अधिकारी नलकूप को देखने तक नहीं आते। शीघ्र ठीक कराया जाए।
- मुन्ना सिंह, नारेपार
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ग्राम सभा डीघ में पांच राजकीय नलकूपों में तीन खराब हैं। किसान खेती कैसे करें। शिकायतों के बावजूद विभाग के लोग समस्या समाधान करते ही नहीं हैं। किसान परेशान हैं। नलकूप के खराब होने से सैकड़ों बीघा फसल प्रभावित होती है।
- माता चरन तिवारी, डीघ
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भुर्रा का राजकीय नलकूप 30 वर्षो से बंद पड़ा है। छेछुआ के दो नलकूप में एक वर्षो से खराब है। गजाधरपुर गांव का राजकीय नलकूप तीन वर्षो से बंद पड़ा है और तुलसीकला का नलकूप एक वर्ष से बंद पड़ा है।
आदर्श पांडेय, कला तुलसी
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गांव का राजकीय नलकूप खराब है। नलकूप का पंप हाउस चारों ओर सरपत और घास फूस के जंगल से घिर गया है। न मोटर है न पाइपें और अन्य उपकरण किसान परेशान है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
हृदय नारायण दुबे, कलिक मवैया
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वर्जन---
ट्रांसफार्मर की कमी से बंद होने वाले नलकूपों को तीन से पांच दिन के अंदर चलवाने का प्रयास रहता है। अन्य खराबियों को दूर करने में बजट की कमी आड़े आती है। इसके लिए शासन को लिखापढ़ी की गई है।
- संजय भारती, अधिशासी अभियंता- नलकूप खंड