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Bhadohi News: सड़क किनारे पेड़ सूखे, हादसे के इंतजार में जिम्मेदार

Mon, 11 Aug 2025 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 11 Aug 2025 12:06 AM IST
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Trees on the roadside are dry, responsible for the accident awaits
ज्ञानपुर के पटेल नगर में सड़क के किनारे सुखा पेड़। संवाद - फोटो : संवाद
ज्ञानपुर। हरे-भरे पेड़-पौधे जिंदगी देते हैं तो सूखे पेड़ जान भी ले सकते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं सड़क के किनारे महीनों से सूखे पड़े पेड़ों की, जो घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। लेकिन, इस ओर न तो वन विभाग ना ही स्थानीय प्रशासन या निजी स्वामित्व रखने वालों का ध्यान है। बाराबंकी में अभी हाल ही में रोडवेज बस पर सूखे पेड़ के गिरने से चार लोगों की मौत हो गई और पांच लोग घायल हो गए। इसके बाद भी अफसरों ने सबक नहीं लिया।
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जिले की मुख्य सड़कों, आसपास के गांवों में बस्ती के बीच और सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में सूखे पड़े हैं। बरसात के दिनों में इन सूखे पेड़ों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग इन्हें कटवाने को लेकर संवेदनशील नहीं हैं। लोगों की मानें तो तेज हवा से ये पेड़ कभी भी धराशायी हो सकते हैं। आंधी चलने से सूखे पेड़ों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे सड़क पर आने-जाने वाले राहगीरों को क्षति हो सकती है। मुख्यालय मार्ग और पटेल नगर में करीब सालभर से सूखा पेड़ सड़क के किनारे खड़ा है। मुख्यालय मार्ग से लेकर, ज्ञानपुर भदोही मार्ग, ज्ञानुपर पाली मोढ़ मार्ग, पटेल नगर, वेदपुर, औराई, सीतामढ़ी आदि मार्गों पर भी सूखे पेड़ हैं। यदि समय रहते इन पेड़ों को नहीं काटा गया, तो बड़ा हादसा हो सकता है।
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डीएफओ विवेक यादव ने बताया कि सूखे पड़ों की लाट बनाकर वन निगम मिर्जापुर को भेजा जाता है। पेड़ों को कटवाने का काम वन निगम ही करता है। किसी विशेष परिस्थति में ही वन विभाग कटवा सकता है। वह भी वन निगम से अनुमति लेने के बाद। एक साल पूर्व सड़क चौड़ीकरण होने से ज्ञानपुर-नथईपुर मार्ग पर 347 पेड़ों की लाट बनाई गई थी, जिसे काटा गया। सूखे पेड़ों की सूची बनाकर भेजी जाएगी।
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बारिश के सीजन में अभी तक 60 से 65 स्थानों पर शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों के विभिन्न मार्गों पर हरे पेड़ गिरे थे। थोड़ी बहुत लकड़ी रेंज कार्यालय पर आती है। बाकी बाहर ही बेच दिए जाते हैं। सबसे अधिक पेड़ गिरने की सूचना ज्ञानपुर रेंज अंतर्गत आती है। रेंज के अधीन तीन ब्लाॅक सुरियावां, ज्ञानपुर, अभोली है। गिरे हुए पेड़ को विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से बाहर ही बाहर क्रय कर दिया गया। उच्चाधिकारियों को भनक तक नहीं लगती है।
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