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पांच दिन में हाफिज ने कराई तरावीह मुकम्मल
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Wed, 24 Jun 2015 01:29 AM IST
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गोपीगंज नगर के अस्पताल गली स्थित मदरसे में चांद रात से चल रही तरावीह सोमवार रात को पांचवें दिन मुकम्मल हो गई। तरावीह पूरी होते हाफिज-ए-कुरआन को रोजेदारों ने माला फूल पहनाकर और गले मिलकर मुबारकबाद दी।
जामा मस्जिद गोपीगंज के इमाम हाफिज मोहम्मद अनीश ने सबसे कम समय में तरावीह मुकम्मल कराई। माह-ए-मुबारक में मदरसे में मुकम्मल होने वाली जिले की पहली तरावीह है। देर रात चले जलसे में नातिया कलाम पढ़े गए, रमजान की फजीलतों पर उलेमा ने रोशनी भी डाली।
माह-ए-मुबारक रमजान में इशा की नमाज के बाद हाफिज-ए-कुर आन से तरावीह सुनना सुन्नते मोक्कदा है। रमजान में चांद नजर आने के पूर्व तक तरावीह होती है। विभिन्न कार्यों में व्यस्त रहने वालों के लिए कम समय में तरावीह मुकम्मल करने के इंतजाम होते हैं।
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मदरसे में तरावीह मुकम्मल होने पर जलसे का एहतमाम हुआ। हाफिज अनीश ने खिताब किया। कहा कि रमजान में पूरे माह तरावीह सुनने चाहिए। न कि शौकिया तौर पर समय बचाने के लिए कम समय में। जिनके पास समय है, वह मस्जिदों में जाकर पूरे रमजान तक तरावीह सुने।
उन्होंने रमजान की फजीलतों पर रोशनी डाली। कहा कि एक माह का रोजा मुसलमान को बड़े ही खुशनसीबी से मिलती है। इसमें इबादत का सवाब सत्तर गुना बढ़ता है, तो कई तरह की रोजेदारों को रियायत भी मिलती है।
ऐसे मुबारक माह में जो भी गफलत में रहेगा, उसके लिए आखिरत में मुश्किलें आएगी। उन्होंने कहा कि एक माह का रोजा खुदा की रहमत हासिल करने, मगफिरत पाने और जहन्नम से निजात का सबसे अफजल मौका होता है। इसके लिए हमें खुदा का शुक्रगुजार होना चाहिए। इस मौके पर मौलाना जाहिद रजा समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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जामा मस्जिद गोपीगंज के इमाम हाफिज मोहम्मद अनीश ने सबसे कम समय में तरावीह मुकम्मल कराई। माह-ए-मुबारक में मदरसे में मुकम्मल होने वाली जिले की पहली तरावीह है। देर रात चले जलसे में नातिया कलाम पढ़े गए, रमजान की फजीलतों पर उलेमा ने रोशनी भी डाली।
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माह-ए-मुबारक रमजान में इशा की नमाज के बाद हाफिज-ए-कुर आन से तरावीह सुनना सुन्नते मोक्कदा है। रमजान में चांद नजर आने के पूर्व तक तरावीह होती है। विभिन्न कार्यों में व्यस्त रहने वालों के लिए कम समय में तरावीह मुकम्मल करने के इंतजाम होते हैं।
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मदरसे में तरावीह मुकम्मल होने पर जलसे का एहतमाम हुआ। हाफिज अनीश ने खिताब किया। कहा कि रमजान में पूरे माह तरावीह सुनने चाहिए। न कि शौकिया तौर पर समय बचाने के लिए कम समय में। जिनके पास समय है, वह मस्जिदों में जाकर पूरे रमजान तक तरावीह सुने।
उन्होंने रमजान की फजीलतों पर रोशनी डाली। कहा कि एक माह का रोजा मुसलमान को बड़े ही खुशनसीबी से मिलती है। इसमें इबादत का सवाब सत्तर गुना बढ़ता है, तो कई तरह की रोजेदारों को रियायत भी मिलती है।
ऐसे मुबारक माह में जो भी गफलत में रहेगा, उसके लिए आखिरत में मुश्किलें आएगी। उन्होंने कहा कि एक माह का रोजा खुदा की रहमत हासिल करने, मगफिरत पाने और जहन्नम से निजात का सबसे अफजल मौका होता है। इसके लिए हमें खुदा का शुक्रगुजार होना चाहिए। इस मौके पर मौलाना जाहिद रजा समेत तमाम लोग मौजूद रहे।